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क्या आप सोना या स्टॉक बेच रहे हैं? आयकर की ये धारा दिला सकती है आपको टैक्स छूट, जानें डिटेल

 Published : Jan 05, 2026 08:13 am IST,  Updated : Jan 05, 2026 08:13 am IST

इनकम टैक्स के सेक्शन 54F व्यक्तियों को रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी में फिर से इन्वेस्ट करके लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन पर टैक्स छूट क्लेम करने की अनुमति देता है। अगर आप पात्रता पूरी करते हैं तो आप टैक्स छूट का लाभ पा सकते हैं।

धारा 54F का मकसद घर के ओनरशिप को बढ़ावा देना है।- India TV Hindi
धारा 54F का मकसद घर के ओनरशिप को बढ़ावा देना है। Image Source : FREEPIK

जब आप अपनी संपत्ति, जैसे सोना, ज़मीन, व्यावसायिक संपत्ति या स्टॉक्स, को बेचते हैं, तो उन्हें लंबे समय तक रखी गई इन संपत्तियों पर भारी पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) टैक्स चुकाना पड़ता है। हालांकि, सरकार आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 54F के तहत इस टैक्स बोझ को आप कम कर सकते हैं। यूं कहें कि धारा 54F एक शानदार तरीका है जिससे आप लंबी अवधि की संपत्तियों पर लगने वाले पूंजीगत लाभ टैक्स से बच सकते हैं। livemint की खबर के मुताबिक, अगर आप एक उचित आवासीय संपत्ति में फिर निवेश करते हैं, तो आप इस टैक्स छूट का लाभ उठा सकते हैं।

क्या है धारा 54F?

आयकर अधिनियम की धारा 54F एक विशेष प्रावधान है, जो आपको लंबे समय तक रखी गई संपत्तियों से अर्जित पूंजीगत लाभ पर टैक्स में छूट प्राप्त करने का मौका देता है, बशर्ते आप उस लाभ को एक आवासीय संपत्ति में पुनः निवेश करें। भारत में, जुलाई 2024 के बाद अगर आप किसी संपत्ति को बेचते हैं, तो उस पर 12.5% का एक समान एलटीसीजी टैक्स लागू होता है। धारा 54F का मकसद घर के ओनरशिप को बढ़ावा देना है। जानकार के मुताबिक, यह धारा उन व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों को राहत देती है, जो अपनी लंबी अवधि की पूंजीगत संपत्तियों को बेचने के बाद अर्जित लाभ पर टैक्स छूट का दावा करना चाहते हैं।

टैक्स छूट का दावा कैसे करें?

अगर आप आयकर रिटर्न (आईटीआर) में धारा 54F के तहत टैक्स छूट का दावा करना चाहते हैं, तो आपको ITR-2 या ITR-3 फॉर्म में से कोई एक फॉर्म भरना होगा, जो आपकी आय के प्रकार पर निर्भर करेगा। टैक्स छूट का दावा करने के लिए कुछ शर्तें और नियम हैं, जिन्हें जरूर समझ लें:-

निवेश की शर्त

खबर के मुताबिक, धारा 54F के तहत टैक्स छूट तभी मिलती है जब बेचने से हासिल शुद्ध रकम को भारत में एक एकल आवासीय संपत्ति खरीदने या निर्माण करने में निवेश किया जाए। यानी आपके पास इस लाभ का दावा करने के लिए केवल एक ही आवासीय संपत्ति होनी चाहिए।

आवासीय संपत्ति की स्थिति

बिक्री के समय आपके पास एक से अधिक आवासीय संपत्ति नहीं होनी चाहिए। साथ ही बिक्री के बाद लॉक-इन अवधि के दौरान आपको कोई अतिरिक्त आवासीय संपत्ति नहीं खरीदनी चाहिए या उसका निर्माण नहीं करना चाहिए। अगर ऐसा होता है, तो टैक्स छूट का लाभ खत्म हो जाएगा।

किसको मिलता है लाभ

धारा 54F का लाभ केवल व्यक्तिगत करदाताओं और हिंदू अविभाजित परिवार को ही मिलता है। यह छूट कंपनियों या लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप को नहीं मिलती है।

लंबी अवधि की पूंजीगत संपत्ति

धारा 54F के तहत सिर्फ वही संपत्तियां योग्य होती हैं जिनका विक्रय लंबी अवधि की पूंजीगत संपत्ति से होता है, यानी ऐसी संपत्तियां जो 24 महीने से अधिक समय तक रखी गई हों (जैसे जमीन या असूचीबद्ध शेयर), या 12 महीने से अधिक समय तक रखी गई सूचीबद्ध शेयरों की बिक्री पर भी यह छूट मिलती है।

निवेश की सीमा

धारा 54F के तहत टैक्स छूट का लाभ उस शुद्ध बिक्री राशि के आधार पर मिलता है, जिसे आपने आवासीय संपत्ति में निवेश किया है। अगर आपने पूरी राशि को आवासीय संपत्ति में दोबारा निवेश किया, तो आपको पूरी टैक्स छूट मिल जाएगी। अगर केवल कुछ हिस्सा निवेश किया है, तो आपको आंशिक छूट मिलेगी।

निवेश की समय सीमा

घर खरीदने के लिए, आपको विक्रय से 1 साल पहले या 2 साल बाद एक आवासीय संपत्ति खरीदनी होगी। घर बनाने के लिए, आपको विक्रय के 3 साल के भीतर घर का निर्माण पूरा करना होगा।

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