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फांसी देने के तरीके को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, अदालत ने केंद्र से 3 सप्ताह में मांगा जवाब

 Reported By: Atul Bhatia Edited By: Mangal Yadav
 Published : Jan 22, 2026 09:37 pm IST,  Updated : Jan 22, 2026 09:43 pm IST

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें फांसी देने के तरीके को दूसरी तरह से अपनाने की मांग की है। याचिका में फांसी देने को क्रूर बताया गया है।

सुप्रीम कोर्ट- India TV Hindi
सुप्रीम कोर्ट Image Source : ANI

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने उन याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिनमें मौत की सजा पाए दोषियों को फांसी देने के वैकल्पिक तरीके की मांग की गई है। याचिकाओं में तर्क दिया गया है कि फांसी देना मौत की सजा को अंजाम देने का एक दर्दनाक तरीका है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने याचिकाकर्ताओं के वकीलों और केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अटॉर्नी जनरल को तीन सप्ताह के भीतर अपने लिखित दलीलें दाखिल करने को कहा है।

याचिका में कही गई है ये बातें

याचिका में कहा गया है कि फांसी देने का तरीका क्रूर और तकलीफदेह है। याचिका में कहा गया है कि दोषी को फांसी की बजाय घातक इंजेक्शन, गोली मारा जा सकता है। दोषी को इलेक्ट्रिक चेयर भी दी जा सकती है। याचिका में यह भी सुझाव दिया गया है कि दोषी को जहर का इंजेक्शन भी दिया जा सकता है। 

आतंकवादी की मौत की सजा के खिलाफ याचिका पर दिल्ली सरकार को नोटिस

वहीं,सुप्रीम कोर्ट ने 2000 के लाल किला हमले के मामले में मौत की सजा पाए लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के आतंकवादी मोहम्मद आरिफ की उपचारात्मक याचिका पर सुनवाई करने पर बृहस्पतिवार को सहमति जताई। इस हमले में सेना के तीन जवान शहीद हो गए थे। न्यायालय ने इस मामले में सजा के खिलाफ आरिफ की पुनर्विचार याचिका तीन नवंबर 2022 को खारिज कर दी थी। आरिफ उर्फ ​​अशफाक को अक्टूबर 2005 में निचली अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी और दिल्ली उच्च न्यायालय ने सितंबर 2007 में निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा था। 

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