Saturday, February 07, 2026
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Panchak Ke Niyam: पंचक में लकड़ी खरीदने की है मनाही, दक्षिण दिशा की यात्रा करना भी होता है अशुभ, लेकिन क्यों? जानें

Panchak Ke Niyam: पंचक के दौरान कुछ कामों को करने की सख्त मनाही की जाती है। इन पांच दिनों में लकड़ी, ईंधन का संग्रह और दक्षिण दिशा की यात्रा वर्जित मानी जाती है। इसके पीछे धार्मिक, ज्योतिषीय और व्यावहारिक कारण बताए गए हैं। चलिए जानते हैं इसके पीछे क्या कारण बताए गए हैं।

Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
Published : Jan 22, 2026 09:33 pm IST, Updated : Jan 22, 2026 09:33 pm IST
Panchak Ke Niyam- India TV Hindi
Image Source : PEXELS पंचक के दौरान लकड़ी खरीदना और दक्षिण दिशा की यात्रा क्यों वर्जित?

Panchak Niyam, Inn Dino Lakdi Kharidna aur Dakshin Disha ki Yatra Kyun Ashubh: ज्योतिष शास्त्र में पंचक को एक विशेष और संवेदनशील समय माना जाता है। इस दौरान कुछ काम न करने की सलाह दी जाती है। जनवरी 2026 में 21 तारीख को रात 01:35 बजे से पंचक की शुरुआत हुई है, जो 25 जनवरी दोपहर 01:35 बजे तक रहेगा। मान्यता है कि इन दिनों किए गए गलत निर्णय भविष्य में परेशानी का कारण बन सकते हैं। खासतौर पर पंचक में लकड़ी खरीदना और दक्षिण दिशा की यात्रा को अशुभ माना गया है, ये तो सभी जानते ही होंगे। लेकिन क्यों इन दिनों में लकड़ी खरीदने या लकड़ी से जुड़े काम करने और दक्षिण दिशा की यात्रा के लिए निकलने की मनाही की जाती है? आइए यहां जानते हैं विस्तार से...

पंचक क्या होता है?

हिंदू पंचांग के अनुसार, पंचक पांच दिनों का एक विशेष काल होता है, जब चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों में भ्रमण करता है। इस अवधि में राहु का प्रभाव अधिक माना जाता है, जिससे कार्यों में बाधा, नुकसान या अनहोनी की आशंका बढ़ जाती है। इसी कारण पंचक को सामान्य दिनों की तुलना में सावधानी का समय माना जाता है।

पंचक में लकड़ी खरीदना के लिए क्यों है मनाही?

धर्म शास्त्रों के अनुसार, पंचक के दौरान अग्नि तत्व अत्यधिक सक्रिय रहता है। लकड़ी, घास और ईंधन ज्वलनशील होते हैं, इसलिए इन्हें इकट्ठा करना जोखिम भरा माना गया है। ऐसी मान्यता है कि पंचक में जमा की गई लकड़ी से आग लगने की संभावना बढ़ जाती है।

पंचक काल में लकड़ी खरीदना या घर की छत बनवाना पारिवारिक तनाव और नुकसान का कारण बन सकता है। यही वजह है कि पंचक में घर की छत डालने या लकड़ी से जुड़ा निर्माण कार्य टालना शुभ माना जाता है।

दक्षिण दिशा की यात्रा क्यों होती है वर्जित?

अब बात करते हैं कि आखिर पंचक के दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा क्यों वर्जित होती है, तो बता दें कि हिंदू धर्म में दिशाओं का विशेष महत्व है और पंचक के दौरान दक्षिण दिशा को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

दरअसल, दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना गया है, इसलिए इस ओर यात्रा को अशुभ समझा जाता है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार पंचक में दक्षिण दिशा की यात्रा से दुर्घटना या धन हानि की आशंका रहती है। ऐसे में पंचक के 5 नक्षत्रों का प्रभाव दक्षिण दिशा की यात्रा को व्यक्ति के लिए कष्टकारी बना सकता है।

पंचक के दौरान किन कार्यों से बचना चाहिए?

  • चारपाई या बिस्तर बनवाना
  • घर की छत डालना
  • लकड़ी, घास या ईंधन का संचय
  • बिना आवश्यकता दक्षिण दिशा की यात्रा

जरूरी होने पर ये उपाय करके शुरू कर सकते हैं यात्रा

अगर पंचक के दौरान दक्षिण दिशा में यात्रा पर निकलना अत्यंत आवश्यक हो, तो इसके लिए कुछ उपाय शास्त्रों में दिए गए हैं। इनके अनुसार यात्रा से पहले हनुमान जी के दर्शन करें या गायत्री मंत्र का जाप करें। इससे नकारात्मक प्रभाव कम होने की मान्यता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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