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सप्ताह के हर दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत की महिमा है अलग, जानिए प्रदोष व्रत रखने का महत्व और फायदे

 Written By: Arti Azad
 Published : Aug 05, 2026 05:19 pm IST,  Updated : Aug 05, 2026 05:19 pm IST

प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है, जो महीने दो बार रखा जाता है। सोमवार से लेकर रविवार तक अलग-अलग वार पर पड़ने वाले प्रदोष व्रत का अपना विशेष महत्व होता है। श्रद्धा और विधि-विधान से रखा गया यह व्रत मानसिक शांति और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

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किस दिन का प्रदोष व्रत देता है कौन सा फल Image Source : PINTEREST

सनातन धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे महत्वपूर्ण व्रतों में से एक माना जाता है। हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को यह व्रत रखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि सप्ताह के जिस दिन प्रदोष व्रत पड़ता है, उसके अनुसार इसका महत्व और मिलने वाले शुभ फल भी अलग-अलग होते हैं। आइए जानते हैं प्रदोष व्रत रखने का महत्व और इससे मिलने वाले लाभ।

प्रदोष व्रत क्यों है खास?

मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं। इस समय की गई आराधना से आध्यात्मिक शांति मिलती है और जीवन में पॉजिटिविटी आती है। 

हर वार का अलग महत्व

ज्योतिष और धार्मिक परंपराओं के अनुसार, सप्ताह के प्रत्येक दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत का अलग महत्व बताया गया है। 

  • सोमवार का प्रदोष शिव कृपा और मनोकामना पूर्ति के लिए शुभ माना जाता है। 
  • मंगलवार का प्रदोष साहस और संकटों से मुक्ति की कामना के लिए रखा जाता है। 
  • बुधवार का प्रदोष बुद्धि और कार्यों में सफलता से जुड़ा माना जाता है। 
  • गुरु प्रदोष व्रत का संबंध ज्ञान, गुरु कृपा और परिवार की खुशहाली से माना जाता है। 
  • शुक्रवार का प्रदोष सुख, समृद्धि और खुशहाल दांपत्य जीवन के लिए है। 
  • शनिवार का प्रदोष बाधाओं से मुक्ति और कर्मों के शुभ फल के लिए रखा जाता है।
  • जबकि रविवार का प्रदोष उत्तम स्वास्थ्य, यश और सम्मान की प्राप्ति से जोड़ा जाता है।

क्या हैं प्रदोष व्रत के लाभ?

प्रदोष व्रत रखने और महादेव की पूजा करने से व्यक्ति को मानसिक शांति मिलने की मान्यता है। शिव भक्ति नकारात्मक विचारों को दूर कर मन को स्थिर रखने में सहायक मानी जाती है। वहीं, जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए महादेव से क्षमा की प्रार्थना करने का अवसर मिलता है।

चंद्रमा से भी है संबंध

ज्योतिष शास्त्र में त्रयोदशी तिथि का संबंध चंद्रमा से माना गया है। इस दिन व्रत रखने और संयम का पालन करने से चंद्र तत्व मजबूत होने की मान्यता है। चंद्रमा को मन और भावनाओं का कारक ग्रह है। इसके शुभ प्रभाव से मानसिक संतुलन और सकारात्मक सोच को बल मिलने की मान्यता है।

ग्रहों पर शुभ प्रभाव

ज्योतिष अनुसार, चंद्रमा की स्थिति मजबूत हो तो उसका शुभ प्रभाव शुक्र और बुध ग्रह पर भी पड़ता है। इससे सुख-सुविधाओं, प्रेम, पारिवारिक जीवन, शिक्षा, व्यापार और करियर से जुड़े क्षेत्रों में अनुकूल परिणाम मिलने की संभावना रहती है। 

आस्था के साथ अच्छे कर्म जरूरी

प्रदोष व्रत आत्मसंयम, अनुशासन और सकारात्मक जीवनशैली का भी प्रतीक माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत का पूरा लाभ तभी मिलता है, जब इसे सच्ची श्रद्धा, अच्छे कर्म और समर्पण के साथ किया जाए।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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