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जितिया यानी जीवित्पुत्रिका व्रत कब है 3 या 4 अक्टूबर? नोट कर लें सही तारीख और मुहूर्त

 Written By: Laveena Sharma
 Published : Sep 27, 2026 02:29 pm IST,  Updated : Sep 27, 2026 02:30 pm IST

जितिया यानी जीवित्पुत्रिका का त्योहार पितृ पक्ष में मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु और सुखी जीवन की कामना से व्रत रहती हैं। जानिए इस साल जितिया का व्रत कब रखा जाएगा।

jitiya kab hai 2026- India TV Hindi
जितिया कब है 2026 Image Source : INDIA TV

जीवित्पुत्रिका यानी जितिया पर्व का सनातन धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। यह त्योहार पितृ पक्ष में मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रहती हैं और कुशा से बनी जीमूतवाहन की प्रतिमा की पूजा करती हैं। इसके अलावा इस दिन भगवान सूर्य देव की पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है। यह त्योहार मुख्य रूप से बिहार, झारखण्ड और उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है। इसके अलावा नेपाल में भी ये पर्व लोकप्रिय है। कहते हैं जो महिला श्रद्धापूर्वक यह व्रत करती है उसकी संतान दीर्घायु, निरोगी, तेजस्वी और सुख-सम्पन्न होती है। चलिए जानते हैं इस साल यह व्रत कब रखा जाएगा और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।

जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत कब है 2026

जितिया (जीवित्पुत्रिका) का त्योहार आश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। पंचांग अनुसार इस साल ये तिथि 3 अक्टूबर की सुबह 07 बजकर 59 से शुरू होकर 4 अक्टूबर की सुबह 05 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। यह पर्व 3 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। महिलाएं इसी दिन निर्जला व्रत रहेंगी।

जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत पूजा शुभ मुहूर्त 2026

  • ब्रह्म मुहूर्त - 04:38 AM से 05:26 AM
  • प्रातः सन्ध्या - 05:02 AM से 06:15 AM
  • अभिजित मुहूर्त - 11:46 AM से 12:34 PM
  • गोधूलि मुहूर्त - 06:05 PM से 06:29 PM
  • सायाह्न सन्ध्या - 06:05 PM से 07:18 PM

जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत पूजा विधि

  • जितिया व्रत के दिन मुख्य रूप से भगवान सूर्य नारायण और राजा जीमूतवाहन की पूजा होती है।
  • इस पूजा के लिए जितिया व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
  • फिर स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। 
  • फिर भगवान सूर्य नारायण की विधि विधान पूजा करें।
  • धूप, दीप आदि से आरती करें।
  • इसके बाद उन्हें खीर या अन्य किसी चीज का भोग लगाएं।
  • बता दें इस व्रत की मुख्य पूजा शाम में की जाती है।
  • शाम की पूजा के लिए मिट्टी और गाय के गोबर से चील व सियारिन की मूर्ति बनाएं।
  • फिर कुशा से बनी जीमूतवाहन की प्रतिमा को धूप-दीप, चावल, पुष्प आदि चीजें चढ़ाएं।
  • इसके बाद विधि-विधान से पूजा करें और व्रत कथा सुनें।
  • इसके बाद कुछ न कुछ दान करें।
  • इस व्रत का पारण अगले दिन सुबह पूजा के बाद किया जाता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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