Sunday, February 08, 2026
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'पीस ऑफ बोर्ड' में शहबाज के शामिल होने पर भड़के पाकिस्तानी, कहा-"प्रधानमंत्री कर रहे ट्रंप का बूट पॉलिश"

ट्रंप के 'पीस ऑफ बोर्ड' में पाक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के हस्ताक्षर करने के बाद बवाल मच गया है। शरीफ अपने ही देश में घिर गए हैं। पाकिस्तानी लोग शहबाज के फैसले को ट्रंप की चाटुकारिता से जोड़ कर देख रहे हैं।

Edited By: Dharmendra Kumar Mishra @dharmendramedia
Published : Jan 22, 2026 06:55 pm IST, Updated : Jan 22, 2026 06:58 pm IST
दावोस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पीछे खड़े पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ- India TV Hindi
Image Source : AP दावोस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पीछे खड़े पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ

दावोसः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावोस के विश्व आर्थिक मंच से "पीस ऑफ बोर्ड" का बृहस्पतिवार को उद्घाटन कर दिया। उनके इस चार्टर में पाकिस्तान समेत करीब 20 देशों ने पहले दिन हस्ताक्षर किया। जबकि 35 देशों ने कुल चार्टर में शामिल होने के लिए हामी भरी। मगर पाक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के इस बोर्ड में शामिल होने और चार्टर पर हस्ताक्षर करने से पाकिस्तानी लोग भड़क उठे हैं। शहबाज के इस कदम को वह ट्रंप की बूट पॉलिश पॉलिसी करार दे रहे हैं। 

शहबाज पाकिस्तान में ही घिरे

पाकिस्तान के पूर्व सीनेटर और एडवोकेट मुस्तफा नवाज खोखर ने एक्स पर लिखा, "पाकिस्तान का "बोर्ड ऑफ पीस" में शामिल होने का फैसला बिना किसी सार्वजनिक बहस या संसद की राय के लिया जाना इस शासन की पाकिस्तानी राष्ट्र के प्रति उपेक्षा को दर्शाता है। यह निर्णय निम्नलिखित आधारों पर गलत है:-

  1. तथाकथित "बोर्ड ऑफ पीस" एक औपनिवेशिक उद्यम है, जो न केवल गाजा पर शासन करने का इरादा रखता है, बल्कि संयुक्त राष्ट्र (UN) के समानांतर एक वैकल्पिक व्यवस्था बनाने का प्रयास करता है।
  2. बोर्ड की अपनी भाषा में कहा गया है कि यह "उन दृष्टिकोणों और संस्थाओं से अलग होने का साहस रखेगा जो अक्सर असफल साबित हुए हैं।" यह खुद को "एक अधिक चुस्त और प्रभावी अंतरराष्ट्रीय शांति-निर्माण निकाय" बताता है।
  3. इस "बोर्ड ऑफ पीस" के चार्टर में ट्रंप को ज़ारवादी (czarist) शक्तियां दी गई हैं, जिससे वे अपनी व्यक्तिगत तथा अमेरिकी एजेंडा को बिना किसी रोक-टोक के लागू कर सकें। इसमें एकतरफा परिणाम रोकने का कोई तंत्र नहीं है।
  4. सभी अन्य सदस्यों की नामांकन या समाप्ति का अधिकार अध्यक्ष (ट्रंप) के पास है।
  5. अध्यक्ष ही तय कर सकते हैं कि बोर्ड कब मिलेगा या क्या चर्चा होगी।
  6. इस नए मंच में ट्रंप के पास अकेले पूर्ण वीटो (absolute veto) का अधिकार है।
  7. स्थायी सीट के लिए एक अरब डॉलर का टिकट वास्तव में अमीरों का क्लब बना देता है, और ऐसे क्लब अक्सर क्या करते हैं, यह किसी से छिपा नहीं है!

इसलिए शहबाज शरीफ का यह फैसला बिना संसदीय बहस के लिया जाना लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी है। पाकिस्तान जैसे देश को ऐसे एकतरफा और अमेरिका-केंद्रित मंच में शामिल होने से पहले राष्ट्रीय हितों, संप्रभुता और वैश्विक शांति की वास्तविकता पर गहन विचार करना चाहिए था।" यूएन में पाकिस्तान की पूर्व राजदूत मलीहा लोधी ने भी मुस्तफा द्वारा उठाए गए सवालों को वैध ठहराया है। इसके साथ ही उन्होंने अपनी भी प्रतिक्रिया दी है। 

पाकिस्तान की पूर्व यूएन राजदूत ने शहबाज को घेरा

शहबाज शरीफ के फैसले पर संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की पूर्व राजदूत मलीहा लोधी ने गंभीर सवाल उठाया है। उन्होंने एक्स पर लिखा, "पाकिस्तान ने एक 'संगठन' (बोर्ड ऑफ पीस) में शामिल होने के लिए साइन अप किया है, जिसे ट्रंप संयुक्त राष्ट्र (UN) के विकल्प के रूप में पेश करते हैं और जो ट्रंप की शख्सियत से जुड़ा हुआ है और उनके कार्यकाल से आगे नहीं टिक सकता। क्या ट्रंप को खुश करना सिद्धांतों का पालन करने से अधिक महत्वपूर्ण है?"

पाकिस्तान के गले की हड्डी क्यों बना पीस ऑफ बोर्ड

ट्रंप के पीस ऑफ बोर्ड में इजरायल भी शामिल है। पाकिस्तानी लोग इजरायल को अपनी मुस्लिम ब्रदरहुड धारा का दुश्मन मानते हैं और वह गाजा पर इजरायली हमले की खिलाफत करते हैं। ट्रंप चाहते हैं कि पाकिस्तान गाजा में अपने शांति सैनिक भी भेजे। यह उसके इस्लामिक सिद्धांत के खिलाफ होगा। अगर पाकिस्तान इससे इनकार करता है तो ट्रंप नाराज हो जाएंगे। इसलिए यह फैसला शहबाज के गले की हड्डी बन गया है। 

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