दावोसः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावोस के विश्व आर्थिक मंच से "पीस ऑफ बोर्ड" का बृहस्पतिवार को उद्घाटन कर दिया। उनके इस चार्टर में पाकिस्तान समेत करीब 20 देशों ने पहले दिन हस्ताक्षर किया। जबकि 35 देशों ने कुल चार्टर में शामिल होने के लिए हामी भरी। मगर पाक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के इस बोर्ड में शामिल होने और चार्टर पर हस्ताक्षर करने से पाकिस्तानी लोग भड़क उठे हैं। शहबाज के इस कदम को वह ट्रंप की बूट पॉलिश पॉलिसी करार दे रहे हैं।
पाकिस्तान के पूर्व सीनेटर और एडवोकेट मुस्तफा नवाज खोखर ने एक्स पर लिखा, "पाकिस्तान का "बोर्ड ऑफ पीस" में शामिल होने का फैसला बिना किसी सार्वजनिक बहस या संसद की राय के लिया जाना इस शासन की पाकिस्तानी राष्ट्र के प्रति उपेक्षा को दर्शाता है। यह निर्णय निम्नलिखित आधारों पर गलत है:-
इसलिए शहबाज शरीफ का यह फैसला बिना संसदीय बहस के लिया जाना लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी है। पाकिस्तान जैसे देश को ऐसे एकतरफा और अमेरिका-केंद्रित मंच में शामिल होने से पहले राष्ट्रीय हितों, संप्रभुता और वैश्विक शांति की वास्तविकता पर गहन विचार करना चाहिए था।" यूएन में पाकिस्तान की पूर्व राजदूत मलीहा लोधी ने भी मुस्तफा द्वारा उठाए गए सवालों को वैध ठहराया है। इसके साथ ही उन्होंने अपनी भी प्रतिक्रिया दी है।
शहबाज शरीफ के फैसले पर संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की पूर्व राजदूत मलीहा लोधी ने गंभीर सवाल उठाया है। उन्होंने एक्स पर लिखा, "पाकिस्तान ने एक 'संगठन' (बोर्ड ऑफ पीस) में शामिल होने के लिए साइन अप किया है, जिसे ट्रंप संयुक्त राष्ट्र (UN) के विकल्प के रूप में पेश करते हैं और जो ट्रंप की शख्सियत से जुड़ा हुआ है और उनके कार्यकाल से आगे नहीं टिक सकता। क्या ट्रंप को खुश करना सिद्धांतों का पालन करने से अधिक महत्वपूर्ण है?"
ट्रंप के पीस ऑफ बोर्ड में इजरायल भी शामिल है। पाकिस्तानी लोग इजरायल को अपनी मुस्लिम ब्रदरहुड धारा का दुश्मन मानते हैं और वह गाजा पर इजरायली हमले की खिलाफत करते हैं। ट्रंप चाहते हैं कि पाकिस्तान गाजा में अपने शांति सैनिक भी भेजे। यह उसके इस्लामिक सिद्धांत के खिलाफ होगा। अगर पाकिस्तान इससे इनकार करता है तो ट्रंप नाराज हो जाएंगे। इसलिए यह फैसला शहबाज के गले की हड्डी बन गया है।
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