ट्रंप के 'पीस ऑफ बोर्ड' में पाक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के हस्ताक्षर करने के बाद बवाल मच गया है। शरीफ अपने ही देश में घिर गए हैं। पाकिस्तानी लोग शहबाज के फैसले को ट्रंप की चाटुकारिता से जोड़ कर देख रहे हैं।
अगर यह शांति की योजना फेल हुई, तो गाजा का स्थाई विभाजन हो सकता है। इससे मानवीय संकट गहराएगा। यहां की 90% आबादी विस्थापित है और गाजा के पुनर्निर्माण के लिए 50 मिलियन टन मलबा हटाना होगा। ट्रंप जनवरी 2026 में 'पीस बोर्ड' और फेज-2 की घोषणा कर सकते हैं, लेकिन नेटन्याहू की मांगें इसमें बाधा हैं।
यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमिर जेलेंस्की ने ट्रंप को नया शांति प्रस्ताव सौंपने का फैसला किया है। इसके विंदुओं को यूरोपीय सहयोगियों से तैयार किया जा रहा है।
इजरायल हमास में करीब 2 साल तक चले युद्ध के बाद अब गाजा को फिर से बसाने का प्रयास तेज कर दिया गया है। इजरायली सेना की बमबारी में फिलहाल गाजा खंडहर में तब्दील हो चुका है। यहां की आबादी पलायन कर चुकी थी। अब वह फिर लौटने लगी है।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने कहा है कि जरूरी हो तो हम यह लिखकर देने को तैयार हैं कि यूरोप और नाटो पर कभी हमला नहीं करेंगे। यह हथियार बेचने वालों द्वारा फैलाई गई अफवाह और बकवास की बातें हैं।
रूस और यूक्रेन के बीच अमेरिका द्वारा पेश की गई शांति योजना पर यूक्रेन और पश्चिमी देश जिनेवा में बड़ी बैठक कर रहे हैं। इसके अगले चरण में अमेरिका के विदेश मंत्री रूबियो भी शामिल होंगे।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच चल रही वार्ता बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई है। इससे दोनों देशों में सीमा तनाव और अधिक बढ़ने की आशंका है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ बैठक की जगह और तारीख दोनों तय कर दी है। इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमिर जेलेंस्की परेशान हो गए हैं।
अब विश्व की निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या यह समझौता वास्तव में जमीन पर शांति ला पाएगा या यह भी पिछले समझौतों की तरह कागजों तक ही सीमित रह जाएगा। हालांकि इस बार अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भागीदारी और अमेरिका की सीधी मध्यस्थता से उम्मीदें ज़रूर बढ़ गई हैं।
पूरे विश्व को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी कार्यकुशलता और कूटनीति से प्रभावित किया है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देखने को मिल रहा है। दुनिया में भारत की बढ़ती भूमिका को देखते हुए एक बार फिर उसे यूएन शांति स्थापना आयोग का सदस्य बनाया गया है।
रूस से युद्ध के ढाई वर्ष गुजर जाने के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकलने से यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की अब हताश होने लगे हैं। उन्होंने अपने सहयोगियों से मिलकर अब यूक्रेन युद्ध में शांति खोजने के प्रयासों पर काम शुरू कर दिया है।
म्यांमार से लोकतंत्र के समर्थकों के लिए बड़ी खबर है। इस देश में साढ़े तीन साल से चल रहे गृहयुद्ध के बाद जुंटा आर्मी घुटनों पर आ गई है। अब उसने सशस्त्र समूहों को शांति के लिए बातचीत को आमंत्रित किया है।
पीएम मोदी के कीव दौरे के बाद यूक्रेन ने शांति पहल की शुरुआत कर दी है। मगर यूक्रेन की ओर से इसके लिए सबसे पहले सवाल पूछा गया है कि क्या रूसी शांति प्रस्ताव की पुरानी शर्तें यूक्रेन पर अभी भी लागू होती हैं। इसका रूसी विदेश मंत्रालय ने जवाब दे दिया है।
यूक्रेन युद्ध में शांति लाने के लिए स्विट्जरलैंड में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन होने जा रहा है। इसमें 50 से ज्यादा देशों के राष्ट्राध्यक्ष और 100 प्रतिनिधिमंडल शामिल होंगे। यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की की अपील पर भारत भी सम्मेलन में हिस्सा लेगा।
दोनों तरफ से हो रहे हमलों से दोहा शांति समझौते पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। बता दें कि अमेरिका और तालिबान के बीच हाल में समझौता हुआ है। समझौते के तहत अमेरिका अफगानिस्तान से अब करीब 18 साल बाद अपनी सेना को वापस बुलाने के लिए मान गया है।
अफगानिस्तान में अमेरिका और तालिबान के बीच हुए ऐतिहासिक समझौते के बाद वहां हमले रुक नहीं रहे हैं जिसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने तालिबान नेता से शांति कायम करने की ओर आगे बढ़ने पर चर्चा की लेकिन ट्रंप की अपील के कुछ घंटों बाद ही अफगानिस्तान में तालिबानी हमला हुआ।
आर्मी चीफ ने कहा कि पाकिस्तान ने अपने स्टेट को इस्लामिक स्टेट बना दिया है। पहले पाकिस्तान को हमारी तरह धर्मनिरपेक्ष होना होगा। जब वह अपनी कट्टर सोच से बाहर आकर एक सेकुलर स्टेट बनेगा तब हम उससे किसी भी तरह की बातचीत करेंगे।
रूसी समाचार एजेंसी 'तास' के मुताबिक यह दूसरा मौका है, जब रूस युद्ध से प्रभावित अफगानिस्तान में शांति लाने के तरीकों की तलाश करते समय क्षेत्रीय शक्तियों को एक साथ लाने का प्रयास कर रहा है।
उत्तर कोरिया के साथ परमाणु मुद्दे पर जारी गतिरोध सुलझाने के वैश्विक प्रयासों के बीच दक्षिण कोरिया एवं उत्तर कोरिया सोमवार को उच्च-स्तरीय शांति वार्ता करने जा रहे हैं।
ये संयुक्त बयान उस समय आया है जब कुछ दिन पहले ही अपने कश्मीर दौरे पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि उनकी नजर में कश्मीर समस्या का एक ही रामबाण इलाज है और वो है विकास।
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