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Year Ender 2025: ट्रंप के पीस प्लान से भी गाजा में नहीं आ सकी 'शांति', कैसे उगेगा मध्य-पूर्व में उम्मीदों का नया सूरज

Written By: Dharmendra Kumar Mishra @dharmendramedia
Published : Dec 27, 2025 03:06 pm IST, Updated : Dec 27, 2025 03:08 pm IST

अगर यह शांति की योजना फेल हुई, तो गाजा का स्थाई विभाजन हो सकता है। इससे मानवीय संकट गहराएगा। यहां की 90% आबादी विस्थापित है और गाजा के पुनर्निर्माण के लिए 50 मिलियन टन मलबा हटाना होगा। ट्रंप जनवरी 2026 में 'पीस बोर्ड' और फेज-2 की घोषणा कर सकते हैं, लेकिन नेटन्याहू की मांगें इसमें बाधा हैं।

गाजा में कब होगा उम्मीदों का नया सुबेरा। - India TV Hindi
Image Source : AP गाजा में कब होगा उम्मीदों का नया सुबेरा।

येरूशलम/वाशिंगटन: इजरायल के साथ 2 साल से युद्ध की आग में झुलस रहा गाजा अब पूरी तरह खंडहर बन चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा शांति योजना भी अब तक इसके दर्द को दूर नहीं कर सकी है। लिहाजा गाजा अब भी अशांत पड़ा है। गाजा के साथ ही साथ पूरे मध्य-पूर्व में निराशाओं के बादल छाये हैं। ऐसे में फिलिस्तीनियों के साथ ही साथ मध्य-पूर्व को भी नये साल में गाजा में शांति और उम्मीदों के नये सूरज के उगने का इंतजार है। मगर सवाल वही है कि आखिर गाजा में शांति का दौर भला कब और कैसे आएगा?

पेंडुलम बनी है ट्रंप की गाजा शांति योजना

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से सितंबर 2025 में पेश की गई गाजा क्षेत्र में स्थायी शांति योजना की उम्मीदें भी अब निराशाओं के कुहासे में धुंधली नजर आ रही हैं। ट्रंप का 20 सूत्री गाजा शांति प्लान पेंडुलम बन चुका है, जिस पर स्थाई अमल नहीं हो पा रहा है। इसे जारी करते समय ट्रंप ने 'मध्य पूर्व की रिवेरा' बनाने का सपना दिखाया था। मगर यह प्लान अब इजरायइल-हमास के बीच बढ़ते तनाव और क्षेत्रीय शक्तियों की जटिल राजनीति में फंस गया है। ऐसे में गाजा का भविष्य न केवल फिलिस्तीनी-इजराइली संघर्ष से जूझ रहा है, बल्कि ईरान से लेकर सऊदी अरब, तुर्की और यूएई जैसी शक्तियों की भू-राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं से भी बंधा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना क्षेत्रीय स्थिरता की बजाय नए संघर्षों को जन्म दे सकती है। 

गाजा में फिर से बसेंगे फिलिस्तीनी।

Image Source : AP
गाजा में फिर से बसेंगे फिलिस्तीनी।

गाजा के साथ मध्य-पूर्व में शांति लाना चाहते थे ट्रंप

ट्रंप की गाजा शांति योजना का मूल उद्देश्य 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले से शुरू हुए युद्ध को समाप्त करना था, जिसमें 1,200 इजरायली मारे गए और 251 बंधक बनाए गए थे। ट्रंप के पीस प्लान के प्रमुख बिंदुओं में तत्काल सीजफायर, सभी बंधकों की रिहाई के बदले हजारों फिलिस्तीनी कैदियों की मुक्ति, गाजा में हुमास को हटाना और डिसआर्म करना, अंतरराष्ट्रीय अरब बलों द्वारा गाजा का अस्थायी प्रशासन, और पांच वर्षों में पुनर्निर्माण।

ट्रंप ने गाजा को 'स्मार्ट सिटी' और रिसॉर्ट्स से भरकर 'मध्य पूर्व का रिवेरा' बनाने का वादा किया था, जिसमें अमेरिकी ट्रस्टीशिप के तहत 10-15 वर्षों तक नियंत्रण रहेगा। फिलिस्तीनियों को 'स्वैच्छिक' प्रवास के लिए प्रोत्साहन (5,000 डॉलर नकद, किराया और भोजन सब्सिडी) देने का प्रस्ताव भी है, जिसे आलोचक 'जबरन विस्थापन' बताते हैं। योजना में वेस्ट बैंक का कोई जिक्र नहीं है और फिलिस्तीनी राज्य की बात अस्पष्ट है। ट्रंप अपने इस प्लान से गाजा के साथ मध्य-पूर्व में भी शांति लाना चाहते थे।  

गाजा में अब तक क्यों नहीं आ सकी शांति

ट्रंप की शांति योजना अभी गाजा में पूरी तरह से लागू नहीं हो सकी है। अक्टूबर 2025 में इजरायल और हमास में इसी शांति योजना पर सीजफायर के बावजूद गाजा अब तक अशांत बना है। इसकी कई वजहे हैं। पहला यह कि इजरायल ने उत्तरी गाजा में 'सुरक्षा बफर जोन' बनाया, जिसे फिलिस्तीन समर्थक योजना के विपरीत मानते हैं। इसके अलावा हमास ने डिसआर्म (हथियार डालने) से इनकार कर दिया। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप से पांचवीं मुलाकात में गाजा के आधे हिस्से पर कब्जा रखने, ईरान पर हमला और 80-100 अरब डॉलर की अतिरिक्त सहायता मांगी, जो योजना की मूल भावना से टकराती है। दिसंबर 2025 तक गाजा में सीजफायर उल्लंघनों में वृद्धि हुई, जिसमें इजरायल की ओर से बमबारी और हमास की ओर से रॉकेट हमले शामिल हैं। यूएन सिक्योरिटी काउंसिल ने योजना को मंजूरी दी, लेकिन यूरोपीय-अरब पहल ने इसे 'नाजुक' बताया। ट्रंप की टीम में जेरेड कुश्नर और स्टीव विटकॉफ जैसे सलाहकार नेतन्याहू के रवैये से नाराज हैं, जबकि हमास ने कहा कि इजरायल के अस्तित्व तक हथियार नहीं छोड़ेंगे। 

क्या होगा मध्य-पूर्व का भविष्य

अगर गाजा में शांति नहीं आती है तो इससे मध्य-पूर्व के भविष्य पर भी संकट के बादल मंडराते रहेंगे। इसकी वजह है कि गाजा का भविष्य मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक गहराई से जुड़ा है। ट्रंप की योजना अब्राहम एकॉर्ड्स का विस्तार है, जिसमें सऊदी अरब और सीरिया को शामिल करने की बात है। इजरायल ने दिसंबर 2025 में सोमालीलैंड को मान्यता दी, जो गाजा से फिलिस्तीनियों को बसाने की पुरानी योजना का हिस्सा था, लेकिन अमेरिका ने इसे त्याग दिया।

ईरान का प्रभाव हमास और हिजबुल्लाह के माध्यम से जारी है, जो ट्रंप की योजना को चुनौती देता है। सऊदी और यूएई जैसे देश गाजा के पुनर्निर्माण में निवेश करना चाहते हैं, लेकिन इजरायल के विस्तारवाद से सतर्क हैं। तुर्की ने अंतरराष्ट्रीय बल में भूमिका मांगी, लेकिन इजरायल विरोधी है। योजना में 'पीस बोर्ड' का गठन ट्रंप करेंगे, जिसमें टोनी ब्लेयर जैसे नाम शामिल हैं, जो क्षेत्रीय शक्तियों को एकजुट करने का प्रयास है। हालांकि  आलोचक कहते हैं कि यह फिलिस्तीनियों को साइडलाइन कर इजरायल को मजबूत करता है। 

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