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कभी युद्ध, कभी शांति...बच्चों की तरह लड़ रहे थाईलैंड-कंबोडिया; सीमा विवाद को लेकर फिर दोनों पक्षों ने किया युद्धविराम

 Published : Dec 27, 2025 01:44 pm IST,  Updated : Dec 27, 2025 01:44 pm IST

थाईलैंड और कंबोडिया के बीच शनिवार को फिर से नया युद्ध विराम समझौता हुआ है। इसके तहत थाईलैंड कंबोडिया के 18 सैनिकों की भी रिहाई करेगा।

थाईलैंड और कंबोडिया के बीच समझौते की फाइल फोटो- India TV Hindi
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच समझौते की फाइल फोटो Image Source : AP

बैंकॉक: थाईलैंड और कंबोडिया ने शनिवार को एक नये युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर किया है। इस समझौते का उद्देश्य सीमा पर क्षेत्रीय दावों को लेकर कई सप्ताह से चल रहे सशस्त्र संघर्ष को समाप्त करना है। यह समझौता स्थानीय समयानुसार दोपहर 12 बजे से प्रभावी हो गया। समझौते के अलावा लड़ाई रोकने के प्रावधान के साथ-साथ दोनों पक्षों द्वारा कोई आगे सैन्य गतिविधि नहीं करने और एक-दूसरे के हवाई क्षेत्र का सैन्य उद्देश्यों के लिए उल्लंघन नहीं करने पर सहमति बनी है। पिछले करीब 6 महीनों में थाईलैंड और कंबोडिया के बीच यह चौथा युद्ध विराम समझौता है। ताजा जंग करीब 20 दिनों तक चली

युद्ध विराम में लागू होंगी ये शर्तें

इस युद्ध विराम में कई शर्तें लागू होंगी। बता दें कि शनिवार तक की लड़ाई में केवल थाईलैंड ने कंबोडिया पर हवाई हमले किए थे।  कंबोडिया के रक्षा मंत्रालय के अनुसार शनिवार सुबह भी कुछ स्थानों पर हमले किए गए। अब इस समझौते की एक प्रमुख शर्त यह है कि थाईलैंड युद्धविराम पूरी तरह 72 घंटे तक कायम रहने के बाद जुलाई में पहले संघर्ष के दौरान पकड़े गए 18 कंबोडियाई सैनिकों को वापस सौंपेगा। इन सैनिकों की रिहाई कंबोडियाई पक्ष की प्रमुख मांग रही है। समझौते में दोनों देशों ने जुलाई में पांच दिन की लड़ाई समाप्त करने वाले पुराने युद्धविराम और उसके बाद के समझौतों का पालन करने की प्रतिबद्धता जताई है। 

जुलाई में ट्रंप ने कराया था सीजफायर

जुलाई का मूल युद्धविराम मलेशिया की मध्यस्थता से हुआ था और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में लागू किया गया था। ट्रंप ने दोनों देशों को समझौते पर सहमत नहीं होने पर व्यापारिक सुविधाएं रोकने की धमकी दी थी। इस समझौते को अक्टूबर में मलेशिया में हुए क्षेत्रीय सम्मेलन में और विस्तार से औपचारिक रूप दिया गया था, जिसमें ट्रंप भी शामिल हुए थे। इन समझौतों के बावजूद दोनों देशों के बीच कटु प्रचार युद्ध जारी रहा और सीमा पर छोटी-मोटी हिंसा होती रही, जो दिसंबर की शुरुआत में बड़े पैमाने पर भारी संघर्ष में बदल गई। इसके बाद से दोनों देशों बच्चों की तरह कभी लड़ते हैं तो कभी युद्ध विराम पर सहमत हो जाते हैं। अगले कुछ दिनों में ही दोबारा जंग भड़क जाती है। 

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