Wednesday, February 04, 2026
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Explainer: IT सेक्टर में कयामत! Anthropic के नए AI अपडेट ने पूरी दुनिया में मचाया कोहराम, आखिर क्या है ये बला?

दुनियाभर के शेयर बाजारों और आईटी सेक्टर के लिए आज का दिन किसी 'ब्लैक डे' से कम नहीं रहा। कल तक जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) केवल इंसानों की मदद करने वाला एक स्मार्ट साधन लग रहा था, आज वह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए मुश्किल भर साबित होता दिख रहा है।

Edited By: Shivendra Singh
Published : Feb 04, 2026 05:01 pm IST, Updated : Feb 04, 2026 05:40 pm IST
Anthropic का नया AI टूल बना IT...- India TV Hindi
Anthropic का नया AI टूल बना IT सेक्टर से लिए मुसीबत

बुधवार की सुबह शेयर बाजार के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं थी। जैसे ही ट्रेडिंग शुरू हुई, आईटी सेक्टर में बिकवाली का ऐसा तूफान उठा कि वॉल स्ट्रीट से लेकर दलाल स्ट्रीट तक हाहाकार मच गया। सैकड़ों अरब डॉलर की वैल्यू कुछ ही घंटों में स्वाहा हो गई। वजह कोई आर्थिक मंदी नहीं, न ही ब्याज दरों का डर बल्कि एक टेक्नोलॉजी अपडेट। इस अपडेट का नाम Claude Cowork है, जिसे AI कंपनी Anthropic ने लॉन्च किया है। एनालिस्ट्स इस तबाही को एक नया नाम SaaSpocalypse दे रहे हैं, जिसका मतलब SaaS कंपनियों के लिए प्रलय होता है।

क्या है Claude Cowork और क्यों मचा बवाल?

अपने Claude चैटबॉट के लिए मशहूर Anthropic ने जनवरी के अंत में Claude Cowork के लिए 11 नए ओपन-सोर्स AI प्लगइन्स लॉन्च किए। Claude Cowork एक एजेंटिक AI असिस्टेंट है, जो सिर्फ सवालों के जवाब नहीं देता, बल्कि फाइल पढ़ सकता है, डॉक्यूमेंट ड्राफ्ट कर सकता है, फोल्डर मैनेज कर सकता है और यूजर की परमिशन से मल्टी-स्टेप टास्क पूरा कर सकता है। ये प्लगइन्स अलग-अलग प्रोफेशनल कामों के लिए बनाए गए हैं, जैसे- सेल्स, मार्केटिंग, फाइनेंस, डेटा एनालिसिस, कस्टमर सपोर्ट और प्रोडक्ट मैनेजमेंट। लेकिन असली डर इसके लीगल वर्कफ्लो प्लगइन ने पैदा किया।

लीगल प्लगइन से क्यों कांपे निवेशक?

इस लीगल AI प्लगइन की मदद से कॉन्ट्रैक्ट रिव्यू, NDA की जांच, कंप्लायंस चेक और लीगल ब्रीफिंग जैसे काम ऑटोमेट हो सकते हैं। Anthropic ने साफ कहा कि यह टूल कानूनी सलाह नहीं देता और हर आउटपुट को लाइसेंस प्राप्त वकील से रिव्यू कराना जरूरी है। इसके बावजूद बाजार नहीं संभला। निवेशकों को लगा कि अगर AI यह सब कर सकता है, तो फिर महंगे लीगल सॉफ्टवेयर और सब्सक्रिप्शन की जरूरत ही क्या रह जाएगी?

एक दिन में उड़ गए 285 अरब डॉलर

इस डर का असर शेयर बाजार पर तुरंत दिखा। Thomson Reuters के शेयर 15% से ज्यादा टूट गए। Goldman Sachs का US सॉफ्टवेयर स्टॉक्स ट्रैकर अपने सबसे खराब सिंगल-डे परफॉर्मेंस पर पहुंच गया। Nasdaq 1.4% लुढ़का और इसके झटके भारत तक पहुंचे।

भारतीय IT शेयरों में भी हड़कंप

अमेरिका में बिकवाली की लहर का असर भारतीय आईटी दिग्गजों पर भी पड़ा। TCS का शेयर 7.01% गिरकर 2999.10 रुपये पर बंद हुआ, जबकि Infosys 7.26% टूटकर 1535.80 रुपये पर आ गया। इसके अलावा, HCL Tech, Wipro और Tech Mahindra में भी 4% तक की गिरावट देखने को मिली। ग्लोबल टेक दिग्गज कंपनियों पर नजर डालें तो

  • NVIDIA: 2.84% गिरा
  • Microsoft: 2.87% फिसला
  • Amazon: 1.79% नीचे
  • Alphabet (Google): 1.22% गिरा

आखिर डर किस बात का है?

मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक असली डर AI की ताकत से ज्यादा उसके बिजनेस मॉडल से है। अब तक AI कंपनियां सिर्फ मॉडल बेचती थीं, जिन पर सॉफ्टवेयर कंपनियां अपने प्रोडक्ट बनाती थीं। लेकिन Anthropic अब सीधे वर्कफ्लो का मालिक बनना चाहती है। यानी जो काम पहले Thomson Reuters, Salesforce या DocuSign जैसे प्लेटफॉर्म करते थे, वही काम अब AI खुद करने लगा है। Jefferies ने इसे साफ शब्दों में कहा कि पहले AI मददगार था, अब वो रिप्लेसमेंट बनता जा रहा है।

OpenAI बनाम Anthropic

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कॉर्पोरेट AI मार्केट में Anthropic तेजी से आगे निकल रही है। आज Anthropic के बिजनेस का करीब 80% हिस्सा एंटरप्राइज क्लाइंट्स से आता है। Claude Code ने कुछ ही महीनों में 1 बिलियन डॉलर का ARR छू लिया है। कंपनी अब कथित तौर पर 350 बिलियन डॉलर के वैल्यूएशन पर फंडिंग जुटाने की तैयारी में है।

छंटनी का डर और बढ़ा

शेयर बाजार में गिरावट के साथ अब नौकरी को लेकर भी चिंता बढ़ने लगी है। सोशल मीडिया पर लोग चर्चा कर रहे हैं कि भारतीय IT सेक्टर में फिर से छंटनी शुरू हो सकती है। हालांकि TCS या Infosys जैसी कंपनियों ने अभी तक कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया है, लेकिन नई भर्तियां पहले से ही काफी धीमी चल रही हैं। Zoho के फाउंडर श्रीधर वेम्बु ने भी इशारों-इशारों में कहा कि AI उस गुब्बारे को फोड़ रहा है, जो जरूरत से ज्यादा मार्केटिंग और कम इनोवेशन से फूला हुआ था।

खतरे की घंटी या नया अवसर?

एन्थ्रोपिक का यह अपडेट इस बात का सबूत है कि एआई अब केवल फीचर नहीं रह गया है, बल्कि यह खुद एक बिजनेस बन चुका है। सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए कहीं छिपने की जगह नहीं है। हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह केवल एक शॉर्ट टर्म पैनिक है। उनके अनुसार, एआई भले ही काम करे, लेकिन इंसनों की जरूरत हमेशा रहेगी। जो आईटी कंपनियां खुद को तेजी से एआई-फर्स्ट मॉडल में ढाल लेंगी, वे ही इस कयामत से बच पाएंगी।

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