Explainer: लीबिया के पूर्व तानाशाह रहे कर्नल गद्दाफी के आखिरी उत्तराधिकारी बेटे सैफ-अल-इस्लाम की भी हत्या कर दी गई है। इसके बाद गद्दाफी का परिवार खा लीबिया की राजनीतिक में खात्मा माना जा रहा है। बता दें कि लीबिया के जिंतान शहर में मास्क पहन कर आए 4 हमलावरों ने कर्नल मुअम्मर गद्दाफी के दूसरे और सबसे प्रमुख बेटे सैफ-अल-इस्लाम गद्दाफी की नृशंस हत्या कर दी। हमलावरों को 53 वर्षीय सैफ को उनके आवास के बगीचे में गोली मार दी। जानकारी के मुताबिक आखिरी दम तक गद्दाफी का बेटा हमलावरों से लड़ता रहा, लेकिन अंत में मारा गया। इसके बाद लीबिया की राजनीति में अब गद्दाफी परिवार का अंत माना जा रहा है।
सैफ-अल-इस्लाम की राजनीतिक टीम के सलाहकार अब्दुल्लाह उस्मान अब्दुर्रहीम ने एक सोशल मीडिया पोस्ट पर इसे "कायरतापूर्ण और विश्वासघाती हत्या" बताया। लीबिया के अटॉर्नी जनरल कार्यालय के अनुसार घटना की जांच शुरू कर दी गई है। अभी तक हमलावरों की पहचान या मकसद स्पष्ट नहीं हो सका है। यह घटना लीबिया की पहले से ही अस्थिर राजनीति में एक नया मोड़ ला सकती है, जहां सैफ गद्दाफी समर्थकों का प्रतीक था।
क्या है लीबिया में कर्नल गद्दाफी के परिवार का सत्ता से जुड़ा इतिहास
बुधवार को हमले में मारा गया सैफ-अल-इस्लाम का पिता कर्नल मुअम्मर गद्दाफी ने करीब 4 दशक तक लीबिया पर राज किया। कर्नल गद्दाफी के नाम से मशहूर मुअम्मर ने 1969 में राजा इद्रिस का तख्तापलट कर दिया था। इसके बाद उसने लीबिया की सत्ता पर कब्जा कर लिया। कर्नल गद्दाफी ने करीब 42 वर्षों तक लीबिया पर शासन किया और 2011 तक तानाशाही शासन किया। कर्नल गद्दाफी की "धमक" की वजह से लीबिया एक "जमाहीरिया" (जनता का राज्य) बना, जहां उन्होंने 'ग्रीन बुक' के जरिए अपनी विचारधारा थोपी।
गद्दाफी ने 40 वर्षों में बढ़ाई धमक और तानाशाही
गद्दाफी ने देश में पेट्रोलियम निर्यात से जहां लीबिया की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया, वहीं दूसरी तरफ अफ्रीका में अपना जबरदस्त प्रभाव बढ़ाया। हालांकि दमनकारी नीतियों से विरोध बढ़ा। उन्होंने पश्चिमी देशों से संबंध सुधारे, लेकिन बलूचों और बर्बर समुदायों का दमन भी किया। कर्नल गद्दाफी के शासन में लीबिया अफ्रीका का सबसे अमीर देश बना, लेकिन भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन यहां आम हो गए थे। गद्दाफी की "धमक" इतनी थी कि उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में भी आक्रामक भाषण दिए, खुद को "किंग ऑफ किंग्स ऑफ अफ्रीका" कहकर संबोधित किया।
कैसे मारा गया कर्नल मुअम्मर गद्दाफी?
करीब 4 दशक तक लीबिया पर शासन करने वाले कर्नल मुअम्मर गद्दाफी का अंत बहुत बुरा हुआ। वह लीबिया का तानाशाह कहा जाता था। 20 अक्टूबर 2011 को कर्नल गद्दाफी एक हमले में सिर्ते शहर में ढेर कर दिया गया। यह घटना 2011 की लीबियाई क्रांति (अरब स्प्रिंग का हिस्सा) के दौरान हुई, जब नेशनल ट्रांजिशनल काउंसिल (NTC) के विद्रोही बलों ने गद्दाफी को पकड़ लिया और बाद में मार डाला। मौत से बचने के लिए कर्नल गद्दाफी ने अपने गृहनगर सिर्ते में छिपने और भागने का प्रयास किया। वह अपने 75 वाहनों के काफिले में भागने की कोशिश कर रहा था। मगर NATO समर्थित फ्रांस के लड़ाकू विमानों कर्नल गद्दाफी के काफिले पर हवाई हमला कर दिया। इस हमले में काफिले के कई वाहन नष्ट हो गए। गद्दाफी घायल होकर एक बड़े ड्रेनेज पाइप (नाली/कल्वर्ट) में छिप गया, जहां उसेके कुछ बॉडीगार्ड भी थे। इस दौरान मिलिशिया के NTC के लड़ाकों ने पाइप के पास गोलीबारी शुरू कर दी। गद्दाफी के बॉडीगार्ड ने ग्रेनेड फेंका, लेकिन वह वापस उछलकर उनके ही बीच फट गया, जिसमें उनके रक्षा मंत्री अबू बक्र यूनिस जाबर की मौत हो गई। गद्दाफी घायल हो गए (पैर और पीठ में गोली लगी)। इसके बाद विद्रोहियों ने गद्दाफी को पकड़कर पाइप से बाहर खींच लिया।
फिल्मी स्टाइल में मारा गया गद्दाफी
पकड़े जाने के तुरंत बाद विद्रोहियों ने कर्नल गद्दाफी को जमीन पर पटक दिया। जमकर लात-घूंसे मारे और एक ने बेयोनेट (चाकू जैसे हथियार) से उसके गुदा में हमला किया। एक वीडियो फुटेज में गद्दाफी को खून से लथपथ, घायल और भयभीत दिखाया गया था। वह बार-बार चिल्लाता रहा, "मुझे गोली मत मारो!" और "मैंने तुम्हें क्या किया?"...मगर विद्रोही गद्दाफी को एक पिकअप ट्रक पर लाद ले गए। रास्ते में गोलीबारी हुई या पीटाई के कारण वह मारा गया। आधिकारिक रिपोर्ट में कहा गया कि सिर में गोली लगी और अस्पताल पहुंचने से पहले गद्दाफी की मौत हो गई। कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि वह एम्बुलेंस में ही मर गए। NTC ने शुरू में दावा किया कि क्रॉसफायर में मौत हुई, लेकिन वीडियो से साफ है कि कैद में ही यातना दी गई और मार डाला गया।
मौत के बाद गद्दाफी का क्या हुआ
मौत के बाद गद्दाफी का शव मिस्राता ले जाया गया, जहां लोगों ने उसके साथ प्रदर्शन किया। पोस्टमॉर्टम से पता चला कि सिर में गोली लगी थी। ह्यूमन राइट्स वॉच ने इसे एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल हत्या (न्यायिक हत्या) बताया और जांच की मांग की। यह घटना विवादास्पद रही, क्योंकि NTC ने उन्हें जीवित पकड़ा था, लेकिन यातना देकर मार डाला। यह मौत लीबिया के 42 साल के तानाशाही शासन का अंत थी, लेकिन उसके बाद देश गृहयुद्ध में फंस गया और आज तक अस्थिर है। गद्दाफी की मौत को कुछ लोग "जनता की जीत" मानते हैं, जबकि कई इसे क्रूर और मानवाधिकार उल्लंघन बताते हैं।
कर्नल गद्दाफी की मौत के बाद आखिरी उत्तराधिकारी था सैफ-अल-इस्लाम
गद्दाफी के 4 दशकों के शासन में लीबिया की सत्ता केंद्रीकृत रही, जहां परिवारवाद हावी था। इसके बाद गद्दाफी के प्रमुख बेटे सैफ-अल-इस्लाम को उनका बड़ा उत्तराधिकारी माना गया। सैफ ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पीएचडी की पढ़ाई की थी। उसने दुनिया के पश्चिमी देशों से संबंध सुधारने में बड़ी भूमिका निभाई। साल 2011 की अरब स्प्रिंग में विरोध प्रदर्शनों को दबाने में सैफ की भूमिका से उन्हें युद्ध अपराधी माना गया। गद्दाफी की मौत के बाद लीबिया गृहयुद्ध में फंस गया, जहां मिलिशिया, ISIS जैसे आतंकी और विदेशी हस्तक्षेप (तुर्की, रूस, UAE) ने देश को बांट दिया। 2011 के बाद लीबिया की स्थिति अराजक बनी।
2014 से लीबिया में दो सरकारें
साल 2014 से लीबिया में 2 सरकारें काम कर रही थीं। पूर्व में खलीफा हफ्तार की LNA (रूस-मिस्र समर्थित) और पश्चिम में UN-समर्थित GNU (तुर्की-कतर समर्थित)। वहीं सैफ को 2011 में गिरफ्तार कर लिया गया था। बाद में 2015 में मौत की सजा सुनाई गई, लेकिन 2017 में रिहा हो गए। वे जिंतान में रहते हुए राजनीति में वापसी की कोशिश कर रहे थे। 2021 में राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार बने। मगर कानूनी बाधाओं से अयोग्य हो गये। सैफ गद्दाफी वफादारों (ग्रीन आर्मी) का प्रतीक थे, जो पूर्व शासन की स्थिरता को याद करते हैं। अब सैफ-अल-इस्लामी की मौत से लीबिया का भविष्य और अधिक अंधकारमय हो गया है। अब लीबिया में नए संघर्ष भड़क सकते हैं।
लीबिया का भविष्य अब किस ओर?
लीबिया का भविष्य अब और अनिश्चित लगता है। सैफ की हत्या से राजनीतिक शून्यता पैदा होगा, जो हफ्तार या दबेबा जैसे नेताओं को फायदा पहुंचा सकता है। गद्दाफी परिवार के बचे सदस्यों (जैसे सादी गद्दाफी) पर खतरा बढ़ेगा। लीबिया में तेल उत्पादन (1.2 मिलियन बैरल/दिन) प्रभावित हो सकता है, जो अर्थव्यवस्था का आधार है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, UN-समर्थित चुनाव प्रक्रिया रुक सकती है। रूस (LNA समर्थक) और तुर्की (GNU समर्थक) का हस्तक्षेप बढ़ सकता है, जबकि यूरोप माइग्रेशन और ऊर्जा सुरक्षा के लिए चिंतित है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह हत्या लीबिया को फिर गृहयुद्ध की ओर धकेल सकती है, जहां मिलिशिया युद्ध बढ़ेंगे। गद्दाफी की धमक अब इतिहास है, लेकिन उसकी छाया लीबिया की अस्थिरता में बनी रहेगी। यदि जांच पारदर्शी नहीं हुई, तो बदले की राजनीति और तेज होगी। लीबिया को स्थिरता के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन और समावेशी चुनाव की जरूरत है, वरना 4 दशकों की सत्ता की "धमक" सिर्फ अराजकता का प्रतीक बनेगी।
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