Wednesday, February 04, 2026
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Crypto मार्केट में एक सप्ताह के अन्दर 500 अरब डॉलर स्वाहा, इस वजह से निवेशक हलकान

जानकारों के मुताबिक, यह गिरावट मैक्रोइकॉनॉमिक और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताओं का नतीजा है, लेकिन लंबी अवधि में क्रिप्टो की बुनियादी मजबूती बनी हुई है। निवेशकों को सतर्क रहते हुए मैक्रो डेवलपमेंट्स पर नजर रखनी चाहिए।

Edited By: Sourabha Suman @sourabhasuman
Published : Feb 04, 2026 03:31 pm IST, Updated : Feb 04, 2026 03:31 pm IST
बिटकॉइन का 73,000 डॉलर से नीचे जाना भारी बिकवाली के दबाव को दिखाता है। - India TV Paisa
Photo:PIXABAY बिटकॉइन का 73,000 डॉलर से नीचे जाना भारी बिकवाली के दबाव को दिखाता है।

क्रिप्टोकरेंसी मार्केट में पिछले एक हफ्ते से भी कम समय में भारी गिरावट आई है। CoinGecko के आंकड़ों के मुताबिक, 29 जनवरी के बाद कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन में करीब 467.6 अरब डॉलर (लगभग आधा ट्रिलियन डॉलर) की कमी दर्ज की गई है। इस बिकवाली में बिटकॉइन सबसे आगे रहा। बुधवार को बिटकॉइन में हल्की रिकवरी देखी गई, जहां यह 1.31% बढ़कर 76,681.72 डॉलर पर पहुंच गया। लेकिन मंगलवार को यह 15 महीनों के निचले स्तर 72,877 डॉलर तक गिर चुका था, यह स्तर आखिरी बार नवंबर 2024 में देखा गया था, जब डोनाल्ड ट्रंप की दोबारा राष्ट्रपति जीत के बाद क्रिप्टो-अनुकूल नीतियों की उम्मीदें चरम पर थीं।

बिटकॉइन करीब 13% नीचे आ चुका

खबर के मुताबिक, इस साल अब तक बिटकॉइन करीब 13% नीचे आ चुका है और अक्टूबर 2025 के अपने ऑल-टाइम हाई 1,26,000 डॉलर से लगभग 39% नीचे ट्रेड कर रहा है। यह भारी बिकवाली अकेले क्रिप्टो स्पेसिफिक नहीं है, बल्कि वैश्विक मैक्रो फैक्टर्स से जुड़ी हुई है।  ब्लूमबर्ग के हवाले से livemint की रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक वित्तीय बाजारों में उथल-पुथल जारी है- सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं में भी तेज उतार-चढ़ाव देखा गया, हालांकि मंगलवार को इनमें कुछ खरीदारी लौटी।

क्रिप्टोकरेंसी मार्केट में गिरावट के प्रमुख कारण

अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव: मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने (जैसे अमेरिकी सैन्य गतिविधियां, ईरान के जवाबी बयान और संभावित सैन्य एस्केलेशन) से निवेशक जोखिम वाली एसेट्स से दूर होकर पारंपरिक सुरक्षित निवेश जैसे डॉलर, ट्रेजरी या कैश की ओर रुख कर रहे हैं। बिटकॉइन को "डिजिटल गोल्ड" मानने के बावजूद, इस दौर में यह रिस्क एसेट की तरह बेचा जा रहा है।

मैक्रोइकॉनॉमिक दबाव: सख्त मौद्रिक नीतियां, ब्याज दरों में अंतर, करेंसी मूवमेंट्स और लिक्विडिटी की कमी से बाजार में घबराहट है। लीवरेज्ड पोजीशंस में बड़े लिक्विडेशन हो रहे हैं, जो गिरावट को और तेज कर रहे हैं।

पोजीशन रीसेट और सेंटिमेंट: जानकार के अनुसार, बिटकॉइन का 73,000 डॉलर से नीचे जाना भारी बिकवाली के दबाव को दिखाता है। उन्होंने कहा कि पिछले 48 घंटों में बिकवाली तेज हुई, लेकिन यह किसी एक कारण से नहीं, यह पोजीशन रीसेट और व्यापक बाजार की घबराहट का नतीजा है।

एक एक्सपर्ट ने भी यही बात दोहराई कि क्रिप्टो बाजार अब मैक्रो संकेतों पर ज्यादा प्रतिक्रिया दे रहा है, न कि क्रिप्टो-स्पेसिफिक खबरों पर। कम लिक्विडिटी के कारण छोटे बदलाव भी बड़े उतार-चढ़ाव ला रहे हैं। 

निकट भविष्य का आउटलुक

एक्सपर्ट का कहना है कि लिक्विडेशन का दबाव फिलहाल बना रह सकता है, लेकिन कीमतें अभी भी महत्वपूर्ण दीर्घकालिक सपोर्ट लेवल से ऊपर हैं। अगर ये स्तर टिके रहें, तो बाजार कुछ समय कंसोलिडेशन (स्थिरता) में जा सकता है, जिसके बाद रिकवरी संभव है। हालांकि, मैक्रो संकेत स्पष्ट होने तक अस्थिरता बनी रहेगी। क्रिप्टो सेक्टर अब सस्टेनेबल पार्टिसिपेशन की ओर बढ़ रहा है-यील्ड आधारित प्रोजेक्ट्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल-वर्ल्ड उपयोग मामलों में रुचि बढ़ रही है। भले ही अल्पकालिक कीमतें सीमित दायरे में रहें, लेकिन बाजार पर्दे के पीछे परिपक्व हो रहा है और वैश्विक हालात के साथ खुद को ढाल रहा है।

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