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क्रिप्टोकरेंसी वाले सावधान! लाइव सेल्फी, आईपी एड्रेस देना हुआ अनिवार्य, सॉफ्टवेयर से रोका जाएगा डीपफेक

 Published : Jan 11, 2026 08:28 pm IST,  Updated : Jan 11, 2026 08:29 pm IST

फाइनेंशियल इंटेलीजेंस यूनिट ने क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज और यूजर्स के लिए सख्त नई गाइडलाइंस जारी कर दी हैं, सॉफ्टवेयर से अब कड़ी जांच होगी।

Cryptocurrency Guidelines- India TV Hindi
क्रिप्टोकरेंसी Image Source : FREEPIK

Cryptocurrency Guidelines for Exchanges and Users: क्रिप्टो मार्केट में अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए भारत की वित्तीय खुफिया इकाई यानी फाइनेंशियल इंटेलीजेंस यूनिट (एफआईयू) ने सख्त नई गाइडलाइंस जारी कर दी हैं। अब क्रिप्टो एक्सचेंजों के लिए नए 'एंटी मनी लॉन्ड्रिंग' और नो योर कस्टमर गाइडलाइंस के तहत ग्राहकों की पहचान पक्की करने के लिए नए कदम उठाए जा रहे हैं जिससे डीपफेक फ्रॉड को रोका जा सकेगा। इस महीने आठ तारीख को जारी इन ताजा गाइडलाइंस के मुताबिक क्रिप्टो एक्सचेंजों को वर्चुअल डिजिटल ऐसेट सर्विस प्रोवाइडर के रूप में क्लासीफइड किया गया है। अब इन्हें सिर्फ डॉक्यूमेंट के अपलोड से आगे बढ़कर गहरी जांच का सामना करना पड़ेगा। शारीरिक मौजूदगी यानी फिजिकल प्रेसेंस की जांच और जियो-टैगिंग जैसे नियम अनिवार्य कर दिए गए हैं। इन गाइडलाइंस को मार्च 2023 में पहली बार पब्लिश होने के लगभग तीन साल बाद अपडेट किया गया है।

यूजर्स को लेनी होगी लाइव सेल्फी-सॉफ्टवेयर यूज से होगी जांच

इसके तहत यूजर्स को अब एक 'लाइव सेल्फी' लेनी होगी। इसमें ऐसे सॉफ्टवेयर का यूज किया जाएगा, जो यह कन्फर्म करेगा कि व्यक्ति खुद वहां मौजूद है। इसमें पलक झपकाने या सिर हिलाने को कहा जाएगा। यह कदम फोटो या 'डीपफेक' के जरिए होने वाली धोखाधड़ी को रोकने के लिए उठाया गया है।

अकाउंट बनाते समय आईपी एड्रेस देना हुआ अनिवार्य

साथ ही अकाउंट बनाते समय यूजर्स किस जगह अक्षांश और देशांतर यानी लैटिट्यूड और लॉन्गिट्यूट पर हैं तारीख, समय और किस आईपी एड्रेस का उपयोग कर रहा है, इसका सटीक रिकॉर्ड भी रखना होगा। बैंक खाते की सक्रियता और स्वामित्व साबित करने के लिए सिर्फ एक रुपये का ट्रांजेक्शन अनिवार्य कर दिया गया है। इसके तहत पैन कार्ड के साथ ही आधार, पासपोर्ट या वोटर आईडी जैसा दूसरा पहचान पत्र देना होगा। साथ ही ईमेल और फोन नंबर का ओटीपी वेरिफिकेशन भी जरूरी है।

जानें और क्या है गाइडलाइंस में

इन गाइडलाइंस में एक्सचेंजों द्वारा इनिशियल कॉइन ऑफरिंग (ICO) और इनिशियल टोकन ऑफरिंग (ITO) को हतोत्साहित किया गया है, जो शेयर बाजारों में IPO के जैसे हैं। इनमें कहा गया है कि टंबलर, मिक्सर और गुमनामी बढ़ाने वाले टोकन से जुड़े लेन-देन को सुविधा नहीं दी जानी चाहिए।

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