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10 साल का इंतजार खत्म, NSE को आईपीओ लाने के लिए सेबी ने दे दी NOC, लिस्टिंग की राह साफ

NSE की लिस्टिंग योजना की समीक्षा के लिए मार्च 2025 में सेबी ने एक आंतरिक समिति का गठन भी किया था। अब NOC जारी होने के साथ ही NSE के IPO का रास्ता लगभग साफ होता नजर आ रहा है।

Edited By: Sourabha Suman @sourabhasuman
Published : Jan 30, 2026 11:16 pm IST, Updated : Jan 30, 2026 11:16 pm IST
NOC मिलने के बाद एक्सचेंज ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू करेगा।- India TV Paisa
Photo:ऑफिशियल वेबसाइट NOC मिलने के बाद एक्सचेंज ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू करेगा।

पूंजी बाजार नियामक सेबी ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) को उसके बहुप्रतीक्षित इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (आईपीओ) के लिए नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट यानी NOC जारी कर दिया है। करीब दस वर्षों से नियामकीय अड़चनों और को-लोकेशन विवाद के चलते अटकी एनएसई की लिस्टिंग प्रक्रिया को इससे बड़ी राहत मिली है। यह जानकारी एक्सचेंज के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को दी।

वर्ष 2016 में पहली बार ड्राफ्ट ऑफर डॉक्यूमेंट हुआ था दाखिल

खबर के मुताबिक, देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज एनएसई ने वर्ष 2016 में लगभग ₹10,000 करोड़ जुटाने के लिए पहली बार ड्राफ्ट ऑफर डॉक्यूमेंट दाखिल किए थे। यह आईपीओ मौजूदा शेयरधारकों द्वारा ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के जरिए लाया जाना था। हालांकि, गवर्नेंस से जुड़ी चिंताओं और को-लोकेशन मामले के चलते सेबी ने उस समय मंजूरी रोक दी थी। इसके बाद एनएसई ने कई बार नियामक से अनुमति प्राप्त करने का प्रयास किया।

विकास यात्रा का अहम पड़ाव

सेबी से मंजूरी मिलने पर NSE के चेयरपर्सन श्रीनिवास इंजेटी ने इसे एक्सचेंज की विकास यात्रा का अहम पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि सेबी की स्वीकृति के साथ हम अपने सभी हितधारकों के लिए वैल्यू क्रिएशन के एक नए अध्याय की शुरुआत कर रहे हैं। यह मंजूरी भारतीय अर्थव्यवस्था और पूंजी बाजार में NSE की महत्वपूर्ण भूमिका पर भरोसे को और मजबूत करती है।

IPO की राह में बड़ा कदम

इससे पहले इसी महीने सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने जानकारी दी थी कि नियामक ने अनफेयर मार्केट एक्सेस यानी को-लोकेशन मामले में NSE की सेटलमेंट एप्लिकेशन को ‘इन-प्रिंसिपल’ मंजूरी दे दी है। इसे IPO की राह में बड़ा कदम माना गया। पांडे ने संकेत दिया था कि लगभग एक महीने के भीतर NOC जारी किया जा सकता है। NSE ने जून 2025 में सेटलमेंट प्ली दाखिल की थी।

भारतीय पूंजी बाजार का सबसे बड़ा आईपीओ!

को-लोकेशन केस में कुछ ब्रोकर्स पर NSE के ट्रेडिंग सिस्टम तक तरजीही पहुंच मिलने के आरोप लगे थे, जिसके चलते एक्सचेंज की लिस्टिंग योजना लंबे समय तक अटकी रही। वर्षों तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद, NSE ने 2025 में इस मामले के निपटारे के लिए ₹1,388 करोड़ का भुगतान करने की पेशकश की। प्रस्तावित NSE IPO को भारतीय पूंजी बाजार के सबसे बड़े आईपीओ में से एक माना जा रहा है। बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, अनलिस्टेड ग्रे मार्केट में NSE का वैल्यूएशन ₹5 लाख करोड़ से अधिक आंका जा रहा है और इसके करीब 1.77 लाख शेयरधारक हैं।

DRHP दाखिल करने की प्रक्रिया होगी शुरू

NSE के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ आशीष कुमार चौहान ने पहले कहा था कि इन-प्रिंसिपल मंजूरी एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने बताया था कि NOC मिलने के बाद एक्सचेंज ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू करेगा। उनके अनुसार, NOC मिलने के लगभग चार महीने बाद DRHP फाइल किया जा सकता है और नियामकीय मंजूरी के बाद 7–8 महीनों में IPO बाजार में आ सकता है।

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