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Lathmar Holi 2026: बृज में लाठी-डंडों से क्यों खेली जाती है होली? यहां जानें लट्ठमार होली खेलने की वजह और तारीख

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Feb 08, 2026 11:17 pm IST,  Updated : Feb 08, 2026 11:17 pm IST

Holi 2026: बरसाना की लट्ठमार होली देखने के लिए देश-विदेश से लोग आते हैं। इस दिन महिलाएं पुरुषों पर रंग, गुलाल के साथ ही लाठियां भी बरसाती हैं। तो यहां जानें इस अनोखी होली मनाने की परंपरा के बारे में।

लठमार होली 2026- India TV Hindi
लठमार होली 2026 Image Source : PTI

Brij Lathmar Holi 2026: यूं तो होली का त्यौहार पूरी दुनिया में धूमधाम के साथ मनाया जाता है लेकिन ब्रज की होली सबसे अलग होती है। ब्रज की होली देखने के लिए देश ही नहीं बल्कि दुनिया से भी लोग आते हैं। मथुरा-वृंदावन की होली पूरी दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यहां होली की शुरुआत बसंत पंचमी के दिन से ही हो जाती है। इस दिन मंदिर में लड्डू गोपाल को गुलाल लगाया जाता है। ब्रज में होली रंग, गुलाल के अलावा फूल, लड्डू और लाठियों से भी खेली जाती है। कृष्ण जन्मभूमि ब्रज की धरती पर मनाई जाने वाली लट्ठमार होली देखने के लिए भारी संख्या में लोग यहां आते हैं। तो आइए जानते हैं कि इस साल लट्ठमार होली कब खेली जाएगी और इसे मनाने के पीछे की मान्यता क्या है। 

लट्ठमार होली 2026 डेट

इस साल ब्रज में लट्ठमार होली 26 फरवरी को खेली जाएगी। इस दिन बरसाना की गोपियां नंदगांव से आए पुरुषों पर लाठियां बरसाकर होली खेलती हैं। इस दौरान सभी पुरुष लाठियों की मार अपने हाथों में ली हुई चमड़े की या धातु से बनीं ढालों पर झेलते हैं। बरसाना की लट्ठमार होली देखने के लिए दूर दूर से लोग आते हैं। इस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए हर कोई व्याकुल रहता है। धार्मिक मान्यता है कि द्वापरयुग में श्रीकृष्ण ने राधारानी और गोपियों के साथ लट्ठमार होली खेलने की शुरुआत की थी।  उसके बाद से ही इस परंपरा की शुरुआत हुई और तब से आज तक लोग बड़े आनंद के साथ लट्ठमार होली खेलते हैं।

लट्ठमार होली क्यों खेली जाती है?

लट्ठमार होली को कृष्ण राधा के प्रेम का प्रतीक माना जाता है। इस होली में डंडों के साथ खास रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। पौराणिक मान्यताओ के अनुसार, द्वापरयुग में नंदगांव से कृष्ण अपने ग्वालों की टोली के साथ बरसाने की राधा और गोपियों के साथ होली खेलने और उन्हें सताने के लिए बरसाना जाते थे। इससे परेशान होकर राधा रानी छड़ी लेकर कन्हैया और उनके ग्वालों के पीछे छड़ी मारने के लिए भागती थीं। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हर साल फाल्गुन महीने में बरसाने की महिलाएं और नंदगांव के पुरुष लट्ठमार होली खेलते हैं।  नंदगांव की टोलियां रंग, गुलाल लेकर महिलाओं संग होली खेलने बरसाना पहुंचते हैं। इस होली में गोपियां हुरियारों का लट्ठ और गुलाल दोनों से स्वागत करती हैं। महिलाएं उन पर खूब लाठियां बरसाती हैं।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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