क्रिप्टो की दुनिया में कभी-कभी ऐसा भी हो जाता है, जो किसी सपने से कम नहीं लगता। साउथ कोरिया के बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज बिथम (Bithumb) पर एक ऐसी ही चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां महज एक मानवीय गलती ने 249 लोगों को रातों-रात करोड़पति बना दिया। प्रमोशनल इवेंट के दौरान हुई इस गड़बड़ी ने न सिर्फ एक्सचेंज को मुश्किल में डाला, बल्कि कुछ देर के लिए पूरी क्रिप्टो मार्केट को भी हिला दिया।
कैसे हुई इतनी बड़ी चूक?
दरअसल, बिथम ने एक प्रमोशनल इवेंट के तहत यूजर्स को इनाम देने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसी दौरान एक कर्मचारी से बड़ी टाइपिंग गलती हो गई। कोरियाई वॉन की जगह भुगतान यूनिट में गलती से BTC (बिटकॉइन) टाइप हो गया। नतीजा यह हुआ कि शुक्रवार शाम करीब 7 बजे 249 यूजर्स के खातों में कुल 6,20,000 बिटकॉइन ट्रांसफर हो गए।
हर यूजर को मिले हजारों बिटकॉइन
इस गलती के चलते हर यूजर को औसतन करीब 2490 बिटकॉइन मिले। उस समय एक यूजर को मिले बिटकॉइन की कीमत लगभग 166 मिलियन डॉलर (करीब 1,500 करोड़ रुपये) आंकी गई। इतनी बड़ी रकम एक साथ खाते में देख कई यूजर्स हैरान रह गए, वहीं कुछ ने मौके का फायदा उठाते हुए बिटकॉइन बेच भी दिए।
बिटकॉइन की कीमत में मची हलचल
जिन यूजर्स ने तुरंत बिटकॉइन बेचना शुरू किया, उससे बाजार में अचानक सप्लाई बढ़ गई और बिटकॉइन की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट भले ही कुछ समय के लिए रही, लेकिन इसने एक्सचेंज की काम करने के सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
125 बिटकॉइन अब भी गायब
जैसे ही बिथम को अपनी गलती का एहसास हुआ, कंपनी ने 35 मिनट के भीतर ट्रेडिंग और निकासी पर रोक लगा दी। एक्सचेंज का कहना है कि उन्होंने 6,18,212 बिटकॉइन सफलतापूर्वक वापस ले लिए हैं। यूजर्स द्वारा बेचे गए बिटकॉइन में से भी 93 प्रतिशत रिकवर कर लिए गए, लेकिन इसके बावजूद 125 बिटकॉइन अब तक वापस नहीं मिल पाए हैं।
नुकसान की भरपाई का ऐलान
बिथम ने माना है कि इस घटना से ग्राहकों को करीब 1 अरब वॉन का नुकसान हुआ है। कंपनी ने भरोसा दिलाया है कि जिन यूजर्स को नुकसान हुआ है, उन्हें पूरा मुआवजा दिया जाएगा। इतना ही नहीं, एक्सचेंज ने 10 प्रतिशत एक्स्ट्रा बोनस देने और एक हफ्ते तक सभी लिस्टेड एसेट्स पर ट्रेडिंग फीस माफ करने का भी ऐलान किया है।
भविष्य में नहीं दोहराई जाएगी गलती
इस पूरे मामले के बाद बिथम ने कंपनी-स्तर पर क्राइसिस मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया है। साथ ही भविष्य में ऐसी चूक से बचने के लिए वेरिफिकेशन सिस्टम को मजबूत करने और AI टूल्स की मदद से असामान्य लेनदेन की पहचान करने की योजना बनाई गई है।



































