मुंबई की पहचान कही जाने वाली लोकल ट्रेन एक बार फिर सुर्खियों में है। रोजाना लाखों लोगों को ऑफिस, कॉलेज और काम तक पहुंचाने वाली इस लाइफलाइन पर अब अस्थायी ब्रेक लगने जा रहा है। पश्चिम रेलवे (Western Railway) ने बड़ा फैसला लेते हुए गोरेगांव से छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) के बीच चलने वाली लोकल ट्रेन सेवाओं को तीन महीने के लिए बंद करने का ऐलान किया है। इस फैसले से रोजाना चलने वाली 88 लोकल ट्रेनें प्रभावित होंगी, जिससे यात्रियों की मुश्किलें जरूर बढ़ सकती हैं।
रेलवे के मुताबिक, यह ब्लॉक बांद्रा-खार रेलवे ब्रिज को तोड़कर दोबारा बनाने के लिए लिया जा रहा है। यह पुल मुंबई सेंट्रल से बोरीवली के बीच पांचवीं और छठी रेलवे लाइन बिछाने की महत्वाकांक्षी परियोजना का अहम हिस्सा है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य उपनगरीय रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना, ट्रेनों की भीड़ कम करना और यात्रियों को भविष्य में बेहतर सेवाएं देना है। पहले इस काम के लिए छह महीने का समय तय किया गया था, लेकिन यात्रियों को होने वाली परेशानी को देखते हुए इसे घटाकर तीन महीने कर दिया गया है।
पहले भी झेल चुके हैं यात्री परेशानी
यह पहली बार नहीं है जब इस परियोजना के चलते लोकल सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। इससे पहले दिसंबर से जनवरी के बीच कांदिवली से बोरीवली सेक्शन में पांचवीं और छठी लाइन के निर्माण के दौरान रोज़ाना 200 से 250 लोकल ट्रेनें रद्द करनी पड़ी थीं। अब उस चरण के पूरा होने के बाद काम को गोरेगांव-CSMT सेक्शन में शिफ्ट किया गया है, जो तकनीकी रूप से ज्यादा चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
यात्रियों को मिलेगी थोड़ी राहत
हालांकि, यात्रियों के लिए राहत की बात यह है कि बांद्रा से CSMT के बीच लोकल ट्रेन सेवाएं जारी रहेंगी। बांद्रा से बोरीवली के बीच पांचवीं और छठी लाइन का काम पहले ही पूरा हो चुका है, जिससे इस हिस्से में ट्रेनों का संचालन प्रभावित नहीं होगा।
कैसे करें सफर?
गोरेगांव और आसपास के स्टेशनों से यात्रा करने वाले यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे चर्चगेट की ओर जाने वाली वेस्टर्न लाइन की लोकल ट्रेनें लें या सड़क मार्ग से बांद्रा तक पहुंचें। बांद्रा से वे हार्बर लाइन या सेंट्रल रेलवे की सेवाओं का उपयोग कर अपने गंतव्य तक जा सकते हैं।
कितनी बड़ी है परियोजना?
पश्चिम रेलवे की यह विस्तार परियोजना करीब 964.84 करोड़ रुपये की लागत से मंजूर की गई है। इसके पूरा होने के बाद मुंबई के उपनगरीय रेल नेटवर्क में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा और भविष्य में यात्रियों को कम भीड़ और बेहतर कनेक्टिविटी का फायदा मिलेगा। फिलहाल, तीन महीने का यह ब्रेक यात्रियों के लिए चुनौती जरूर है, लेकिन लंबे समय में इसे मुंबई की लोकल व्यवस्था के लिए जरूरी कदम माना जा रहा है।






































