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Share Market Closing: सेंसेक्स 500 से ज्यादा अंक लुढ़का, एक झटके में निवेशकों के डूबे ₹3 लाख करोड़; जानिए गिरावट की बड़ी वजह

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Feb 05, 2026 03:54 pm IST,  Updated : Feb 05, 2026 03:54 pm IST

दलाल स्ट्रीट पर आज निवेशकों के लिए दिन भारी रहा। हफ्ते के आखिरी कारोबारी सत्र में सेंसेक्स एक्सपायरी के दबाव और कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच शेयर बाजार फिसल गया। सेंसेक्स 503.76 अंक टूटकर 83,313.93 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 133.20 अंक गिरकर 25,642.80 के स्तर पर आ गया।

सेंसेक्स-निफ्टी हुए...- India TV Hindi
सेंसेक्स-निफ्टी हुए धड़ाम Image Source : CANVA

दलाल स्ट्रीट पर गुरुवार को बिकवाली का जबरदस्त दबाव देखने को मिला। सेंसेक्स एक्सपायरी के दिन बाजार ने निवेशकों को बड़ा झटका दिया। कारोबार की शुरुआत से ही बाजार कमजोरी के साथ ट्रेड करता दिखा और दिनभर उतार-चढ़ाव के बाद लाल निशान में बंद हुआ। एक ही सत्र में निवेशकों की संपत्ति करीब ₹3 लाख करोड़ घट गई, जिससे बाजार में डर और सतर्कता का माहौल बन गया।

कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 503.76 अंक की गिरावट के साथ 83,313.93 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 133.20 अंक टूटकर 25,642.80 के स्तर पर आ गया। हालांकि मिडकैप इंडेक्स दिन के निचले स्तर से कुछ संभलता नजर आया, लेकिन बाजार की समग्र धारणा कमजोर ही रही।

वैश्विक संकेतों से बढ़ा दबाव

भारतीय बाजार पर आज कमजोर वैश्विक संकेतों का साफ असर दिखा। एशियाई बाजारों में भारी गिरावट देखने को मिली। दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब 4 फीसदी टूट गया, जबकि जापान का निक्केई लगभग 1 फीसदी गिरा। इससे पहले अमेरिकी बाजारों में नैस्डैक 1.5 फीसदी फिसला था। वैश्विक स्तर पर टेक शेयरों में बिकवाली हो रही है, जिसकी बड़ी वजह एआई सेक्टर में बढ़ती लागत और ऊंचे वैल्यूएशन को लेकर चिंता है। निवेशक अब मुनाफावसूली कर रहे हैं।

Q3 नतीजों ने नहीं भरा भरोसा

तीसरी तिमाही के नतीजे बाजार की उम्मीदों पर पूरी तरह खरे नहीं उतर सके हैं। कई कंपनियों के नतीजे अनुमान से कमजोर रहे, जिससे निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई। बजट और भारत-अमेरिका ट्रेड डील से जुड़ी उम्मीदें पहले ही कीमतों में शामिल हो चुकी थीं, अब फोकस फिर से कमाई और वैल्यूएशन पर लौट आया है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में ऊंचे वैल्यूएशन को लेकर चिंता बढ़ रही है।

RBI पॉलिसी से पहले सतर्कता

निवेशक आरबीआई की मौद्रिक नीति बैठक के नतीजों से पहले भी सतर्क नजर आए। भले ही ब्याज दरों में बदलाव की उम्मीद कम है, लेकिन ग्रोथ, महंगाई और लिक्विडिटी को लेकर केंद्रीय बैंक के संकेतों पर बाजार की नजर बनी हुई है।

रुपये की कमजोरी ने भी बढ़ाई चिंता

डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने भी बाजार पर दबाव डाला। डॉलर इंडेक्स में मजबूती से विदेशी निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई, जिससे एफआईआई की खरीदारी पर ब्रेक लगता दिखा।

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