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7 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल करेंगे Uber, Ola, Rapido के ड्राइवर्स, यात्रियों की बढ़ेंगी मुश्किलें; जानिए क्या है उनकी मांगे?

Edited By: Shivendra Singh Published : Feb 06, 2026 04:26 pm IST, Updated : Feb 06, 2026 05:37 pm IST

अगर आप रोजमर्रा की यात्रा के लिए Uber, Ola या Rapido जैसी ऐप-बेस्ड कैब सर्विस पर निर्भर रहते हैं, तो 7 फरवरी का दिन आपके लिए परेशानी भरा साबित हो सकता है। देशभर में इन प्लेटफॉर्म्स से जुड़े ड्राइवर एक साथ काम बंद करने जा रहे हैं।

Ola-Uber की स्ट्राइक- India TV Paisa
Photo:ANI Ola-Uber की स्ट्राइक

अगर आप 7 फरवरी को कहीं जाने की प्लानिंग बना रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। देश भर में Uber, Ola और Rapido जैसी ऐप-बेस्ड कैब सेवाओं के ड्राइवर्स ने देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। इस विरोध प्रदर्शन को ऑल इंडिया ब्रेकडाउन नाम दिया गया है, जिसके तहत ड्राइवर्स एक साथ अपनी राइड-हेलिंग ऐप्स को बंद कर देंगे। यात्रियों को ऑफिस जाने, एयरपोर्ट पहुंचने या किसी जरूरी काम के लिए वैकल्पिक साधन तलाशने होंगे।

क्या है ‘ऑल इंडिया ब्रेकडाउन’?

इस हड़ताल का आह्वान तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) ने अन्य राष्ट्रीय श्रमिक संगठनों के साथ मिलकर किया है। यूनियन का कहना है कि ऐप-आधारित ड्राइवर लंबे समय से अनदेखी और शोषण का सामना कर रहे हैं। यूनियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि कोई न्यूनतम किराया नहीं, कोई रेगुलेशन नहीं, अंतहीन शोषण। इसी के विरोध में ड्राइवर 7 फरवरी को काम ठप करेंगे।

ड्राइवर हड़ताल पर क्यों जा रहे हैं?

ड्राइवर संगठनों का आरोप है कि Uber, Ola, Rapido और अन्य एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले चालकों के लिए सरकार द्वारा तय न्यूनतम किराया सिस्टम मौजूद नहीं है। कंपनियां अपनी मर्जी से किराया तय करती हैं, जिससे ड्राइवरों की कमाई अस्थिर हो जाती है। यूनियन ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को लिखे पत्र में कहा है कि इस व्यवस्था के कारण ड्राइवरों को कम आमदनी, बढ़ते खर्च और असुरक्षित भविष्य का सामना करना पड़ रहा है। उनका दावा है कि लाखों ड्राइवर गरीबी की कगार पर पहुंच रहे हैं, जबकि प्लेटफॉर्म कंपनियां लगातार मुनाफा कमा रही हैं।

सरकार से ड्राइवरों की प्रमुख मांगें

ड्राइवर यूनियन ने मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस, 2025 का हवाला देते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनकी मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:

  • न्यूनतम बेस किराया तय हो: केंद्र और राज्य सरकारें ऐप-आधारित सेवाओं जैसे कैब, ऑटो और बाइक टैक्सी के लिए न्यूनतम बेस फेयर तय करें। यह किराया ड्राइवर यूनियनों से परामर्श के बाद तय किया जाए।
  • निजी वाहनों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर रोक: यूनियन की मांग है कि निजी (नॉन-कमर्शियल) वाहनों को व्यावसायिक परिवहन के लिए इस्तेमाल करने पर सख्त रोक लगे या उन्हें अनिवार्य रूप से कमर्शियल कैटेगरी में बदला जाए।
  • ड्राइवरों की आजीविका की सुरक्षा: किराया संरचना, कमीशन और इंसेंटिव सिस्टम को पारदर्शी बनाया जाए ताकि ड्राइवरों की आमदनी स्थिर रह सके।

यात्रियों पर क्या पड़ेगा असर?

7 फरवरी को हड़ताल के चलते Uber, Ola और Rapido की सेवाएं आंशिक या पूरी तरह बाधित हो सकती हैं। इसका असर खासतौर पर सुबह और शाम के पीक आवर्स में देखने को मिल सकता है, जब ऑफिस आने-जाने वालों की संख्या ज्यादा होती है। यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे उस दिन मेट्रो, बस, लोकल ट्रेन या निजी वाहन जैसे अन्य साधनों की प्लनिंग पहले से बना लें। एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन जाने वाले यात्रियों को ज्यादा सतर्कता बरतने की जरूरत होगी।

क्या यह हड़ताल पूरे देश में असर दिखाएगी?

यूनियन का दावा है कि यह हड़ताल पूरे भारत में होगी, हालांकि असर हर राज्य और शहर में अलग-अलग हो सकता है। कुछ जगहों पर सेवाएं पूरी तरह ठप हो सकती हैं, जबकि कहीं आंशिक संचालन जारी रह सकता है।

आगे क्या?

अगर सरकार और एग्रीगेटर कंपनियों के बीच बातचीत से कोई समाधान नहीं निकलता, तो ड्राइवर यूनियन ने आगे और बड़े आंदोलन की चेतावनी भी दी है। दूसरी ओर, यात्री इस टकराव में फंसे नजर आ रहे हैं, जिन्हें अपनी रोजमर्रा की आवाजाही के लिए वैकल्पिक इंतजाम करने होंगे।

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