आज के दौर में क्रेडिट कार्ड सिर्फ एक पेमेंट टूल नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुका है। ऑनलाइन शॉपिंग हो, बिजली-पानी का बिल हो या अचानक आया कोई मेडिकल खर्च क्रेडिट कार्ड तुरंत राहत देता है। लेकिन यही सुविधा तब सिरदर्द बन जाती है, जब समय पर भुगतान न हो और ब्याज दर 30 से 40 फीसदी तक पहुंच जाए। कई लोग बिना समझे सिर्फ मिनिमम अमाउंट ड्यू चुकाते रहते हैं और धीरे-धीरे कर्ज के जाल में फंस जाते हैं। तो ऐसे जाल से कैसे बचें, चलिए जानते हैं।
समय पर और पूरा भुगतान करें
क्रेडिट कार्ड पर ब्याज से बचने का सबसे असरदार तरीका है कि हर महीने पूरा बिल चुकाया जाए। अगर पूरा भुगतान संभव न हो, तो सिर्फ न्यूनतम राशि देने की बजाय उससे ज्यादा रकम जमा करें। इससे बकाया जल्दी कम होगा और ब्याज का असर भी घटेगा।
बैंक से बात करने में न हिचकें
बहुत से कार्डहोल्डर यह नहीं जानते कि वे अपने बैंक से ब्याज दर कम करने की रिक्वेस्ट कर सकते हैं। अगर आपकी क्रेडिट हिस्ट्री अच्छी है और आप लंबे समय से समय पर भुगतान करते आ रहे हैं, तो बैंक आपको कम इंटरेस्ट रेट या बेहतर शर्तें दे सकता है।
बैलेंस ट्रांसफर बन सकता है राहत का रास्ता
अगर आपके कार्ड पर ब्याज बहुत ज्यादा है, तो बैलेंस ट्रांसफर का ऑप्शन अपनाया जा सकता है। कई बैंक शुरुआती 3 से 6 महीने तक कम या शून्य ब्याज पर बैलेंस ट्रांसफर की सुविधा देते हैं। इससे आपको पुराने लोन को चुकाने का मौका मिल जाता है।
सही कार्ड चुनना भी है जरूरी
नया क्रेडिट कार्ड लेते समय सिर्फ रिवॉर्ड्स या कैशबैक न देखें, बल्कि उसकी ब्याज दर जरूर जांचें। लो-इंटरेस्ट कार्ड लंबे समय में आपकी जेब पर कम बोझ डालते हैं।
ऑटो-डेबिट से बचाएं लेट फीस
कई बार भुगतान सिर्फ भूलने की वजह से लेट हो जाता है। ऐसे में ऑटो-डेबिट सुविधा ऑन कर दें, ताकि समय पर भुगतान हो सके और लेट फीस व पेनल्टी से बचा जा सके।
ज्यादा ब्याज क्यों है खतरनाक?
मान लीजिए आपने 50,000 रुपये खर्च किए और ब्याज दर 36% है। अगर समय पर भुगतान नहीं किया, तो सालभर में यह रकम 68,000 रुपये तक पहुंच सकती है। यानी सिर्फ ब्याज में ही 18,000 रुपये का नुकसान।






































