Saturday, February 21, 2026
Advertisement
  1. Hindi News
  2. विदेश
  3. अन्य देश
  4. अब कांगो और रवांडा ने भी किए शांति समझौते पर हस्ताक्षर, अमेरिका ने की मध्यस्थता

अब कांगो और रवांडा ने भी किए शांति समझौते पर हस्ताक्षर, अमेरिका ने की मध्यस्थता

Edited By: Dharmendra Kumar Mishra @dharmendramedia Published : Jun 28, 2025 10:56 am IST, Updated : Jun 28, 2025 10:56 am IST

अब विश्व की निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या यह समझौता वास्तव में जमीन पर शांति ला पाएगा या यह भी पिछले समझौतों की तरह कागजों तक ही सीमित रह जाएगा। हालांकि इस बार अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भागीदारी और अमेरिका की सीधी मध्यस्थता से उम्मीदें ज़रूर बढ़ गई हैं।

कांगो और रवांडा के साथ अमेरिका ने कराया शांति समझौता। - India TV Hindi
Image Source : AP कांगो और रवांडा के साथ अमेरिका ने कराया शांति समझौता।

वाशिंगटन: इरान और इजरायल में सीजफायर कराने के  बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वह जल्द ही कांगो और रवांडा के बीच भी शांति समझौता कराएंगे। अब अमेरिका को इसमें सफलता मिल गई है। अफ्रीकी महाद्वीप के दो पड़ोसी देश, कांगो गणराज्य और रवांडा ने शुक्रवार को अमेरिका की मध्यस्थता में एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किया है। यह समझौता पूर्वी कांगो में दशकों से चल रही हिंसा को समाप्त करने और इस खनिज संपन्न क्षेत्र में अमेरिकी सरकार और कंपनियों की पहुंच को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कब से जंग में थे कांगो और रवांडा

इस ऐतिहासिक मौके पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘व्हाइट हाउस’ में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों से मुलाकात की और कहा, “आज हिंसा और विनाश के एक लंबे अध्याय का अंत हो गया है। अब यह पूरा क्षेत्र आशा, अवसर, सद्भाव, समृद्धि और शांति का एक नया अध्याय शुरू करने जा रहा है।” यह समझौता अमेरिकी विदेश मंत्रालय के संधि कक्ष में संपन्न हुआ, जहां कांगो की विदेश मंत्री थेरेसे काइकवाम्बा वैगनर और रवांडा के विदेश मंत्री ओलिवियर नदुहुंगिरेहे ने हस्ताक्षर किए। इस दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस समझौते को "तीस वर्षों से चले आ रहे संघर्ष के बाद एक निर्णायक क्षण" बताया। क्यों दोनों देशों के बीच करीब 35 वर्षों से संघर्ष चल रहा था। 

दोनों देशों के संघर्ष में अब तक मारे गए लाखों लोग

कांगो मध्य अफ्रीका का एक विशाल देश है। पिछले कई दशकों से 100 से अधिक सशस्त्र समूहों की हिंसा से त्रस्त रहा है। इनमें से कई शक्तिशाली गुटों को रवांडा का समर्थन प्राप्त है। इस क्षेत्र में 1990 के दशक से लेकर अब तक लाखों लोगों की जानें जा चुकी हैं और लाखों विस्थापित हुए हैं। हालांकि यह समझौता एक आशाजनक कदम माना जा रहा है, लेकिन कई विश्लेषकों का मानना है कि यह पूरी तरह से संघर्ष को समाप्त नहीं करेगा। कुछ प्रमुख विद्रोही समूहों ने इस समझौते को अपने ऊपर लागू नहीं मानते हुए इसका बहिष्कार किया है।

समझौते क्या स्थिर रहेगा?

समझौते के बाद आयोजित एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में वैगनर ने कहा, “कुछ घाव जरूर भर जाएंगे, लेकिन उनके निशान शायद कभी न मिटें।” वहीं रवांडा के विदेश मंत्री नदुहुंगिरेहे ने कहा, “हम एक अनिश्चित समय में प्रवेश कर रहे हैं। हालांकि यह समझौता उम्मीद की एक किरण है, लेकिन अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। पिछली बार की तरह अगर इसे लागू नहीं किया गया, तो स्थिति फिर बिगड़ सकती है।” उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के लगातार समर्थन से इस बार शांति की राह पर ठोस प्रगति की जा सकती है। इस दौरान उन्होंने अमेरिका के अलावा खाड़ी देश कतर के सहयोग की भी सराहना की, जिसने इस प्रक्रिया में मध्यस्थता और समर्थन प्रदान किया।

समझौता टूटा तो अमेरिका क्या करेगा

जब ट्रंप से पूछा गया कि यदि यह समझौता टूट गया तो अमेरिका की क्या प्रतिक्रिया होगी, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें नहीं लगता कि ऐसा होगा। लेकिन उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर समझौते का उल्लंघन हुआ, तो जिम्मेदार पक्ष को "बहुत भारी कीमत" चुकानी पड़ेगी। यह समझौता अमेरिका के लिए न सिर्फ राजनयिक सफलता है, बल्कि आर्थिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि कांगो क्षेत्र बहुमूल्य खनिजों से भरपूर है, जिनका उपयोग वैश्विक तकनीकी उत्पादों, खासकर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और बैटरियों में होता है। इस क्षेत्र में स्थिरता आने से अमेरिकी कंपनियों को इन खनिजों तक कानूनी और सुरक्षित पहुंच मिल सकेगी। (एपी)

Latest World News

Google पर इंडिया टीवी को अपना पसंदीदा न्यूज सोर्स बनाने के लिए यहां
क्लिक करें

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Around the world से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें विदेश

Advertisement
Advertisement
Advertisement