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रियल एस्टेट का बदला रुख! बिल्डर बना रहे करोड़ों के फ्लैट, लेकिन अफोर्डेबल हाउसिंग क्यों हो गई गायब?

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Feb 21, 2026 07:30 am IST,  Updated : Feb 21, 2026 07:30 am IST

कोरोना महामारी के बाद रियल एस्टेट का बाजार तो फिर से सक्रिय हो गया है, लेकिन अब इसकी दिशा पहले जैसी नहीं रही। जहां पहले सस्ते और मिड-सेगमेंट फ्लैट्स की अच्छी मांग रहती थी, अब प्रीमियम और अपर-मिड सेगमेंट प्रोजेक्ट्स का दबदबा बढ़ता दिखाई दे रहा है।

बिल्डर अफोर्डेबल...- India TV Hindi
बिल्डर अफोर्डेबल हाउसिंग क्यों नहीं बना रहे? Image Source : CANVA

कोरोना महामारी के बाद देश का रियल एस्टेट बाजार फिर पटरी पर लौटा है, लेकिन इसकी दिशा बदल चुकी है। जहां पहले सस्ते और मिड-सेगमेंट घरों की अच्छी मांग रहती थी, वहीं अब बाजार में प्रीमियम और अपर-मिड सेगमेंट का दबदबा बढ़ता दिख रहा है। बड़े शहरों में करोड़ों रुपये के फ्लैट लॉन्च हो रहे हैं, जबकि अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स कम होते जा रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर आम खरीदार के लिए घर क्यों दूर होता जा रहा है?

प्रीमियम सेगमेंट की बढ़ती चमक

रियल एस्टेट बाजार में इस समय प्रीमियम और अपर-मिड सेगमेंट की मांग स्थिर बनी हुई है। इस वर्ग के खरीदार आमतौर पर बैंक लोन पर कम निर्भर होते हैं और ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव से ज्यादा प्रभावित नहीं होते। बेहतर लोकेशन, आधुनिक सुविधाएं और लाइफस्टाइल अपग्रेड उनकी प्रायोरिटी है। डेवलपर्स भी अब बिक्री की संख्या से ज्यादा प्रति यूनिट कीमत पर फोकस कर रहे हैं। यानी कम फ्लैट बेचकर भी ज्यादा कमाई की रणनीति अपनाई जा रही है।

सस्ते और मिड-मार्केट मकानों की बिक्री सुस्त

कोविड के बाद सस्ते और मिड-सेगमेंट घरों की बिक्री में गिरावट देखी गई है। महंगाई, बढ़ती ब्याज दरें और निर्माण लागत में उछाल ने इस वर्ग के खरीदारों को सावधान बना दिया है। पहली बार घर खरीदने वाले लोग अब बजट को लेकर ज्यादा सतर्क हैं और खरीद का फैसला टाल रहे हैं। हालांकि किराए में लगातार बढ़ोतरी से यह साफ है कि अफोर्डेबल हाउसिंग की जरूरत खत्म नहीं हुई है। मांग बनी हुई है, लेकिन सप्लाई सीमित होती जा रही है।

आखिर क्यों नहीं आ रहे अफोर्डेबल प्रोजेक्ट?

डेवलपर्स का कहना है कि जमीन की कीमतें महानगरों से लेकर छोटे शहरों तक तेजी से बढ़ी हैं। साथ ही, कंस्ट्रक्शन मैटेरियल की लागत पिछले तीन साल में करीब 60 फीसदी तक बढ़ चुकी है। ऐसे में कम कीमत वाले मकान बनाना आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो गया है। सरकार ने अफोर्डेबल हाउसिंग की परिभाषा तय तो कर दी है, लेकिन जमीन और लागत पर राहत नहीं मिलने से प्राइवेट डेवलपर्स के लिए इस सेगमेंट में प्रोजेक्ट लॉन्च करना मुश्किल हो रहा है।

क्या आगे बदलेगा ट्रेंड?

विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक आम खरीदार बड़ी संख्या में बाजार में नहीं लौटेंगे, तब तक रियल एस्टेट की असली ग्रोथ अधूरी रहेगी। अगर सरकार रियायती दरों पर जमीन उपलब्ध कराए या अफोर्डेबल हाउसिंग की परिभाषा में बदलाव करे, तो इस सेगमेंट में फिर से जान आ सकती है।

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