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IMF चीफ ने AI को 'सुनामी' बताया, कहा- 40% नौकरियों पर आ सकता है खतरा, जानें और क्या कहा?

 Edited By: Sourabha Suman
 Published : Feb 20, 2026 05:21 pm IST,  Updated : Feb 20, 2026 05:29 pm IST

AI वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए उत्पादकता और वृद्धि का बड़ा इंजन साबित हो सकता है, लेकिन इसके साथ आने वाले रोजगार परिवर्तन को संभालने के लिए स्किल डेवलपमेंट, रीस्किलिंग, शिक्षा सुधार और मजबूत नीतियां जरूरी हैं। भारत जैसी युवा-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए यह सुनहरा मौका है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा।- India TV Hindi
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा। Image Source : IMAGE FROM X POSTED BY @KGEORGIEVA

नई दिल्ली में आयोजित India AI Impact Summit में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए दोधारी तलवार बताया। उन्होंने कहा कि AI वैश्विक जीडीपी ग्रोथ (विकास दर) को सालाना 0.8 प्रतिशत अंक तक बढ़ा सकता है, जिससे कोविड-पूर्व स्तर से भी तेज आर्थिक वृद्धि संभव हो सकती है। जॉर्जीवा ने इसे "शानदार" अवसर करार देते हुए कहा कि यह तेज वृद्धि नए रोजगार और अवसर पैदा करेगी।

भारत को लेकर भरोसा जताया 

एआई को लेकर खासतौर से भारत के संदर्भ में उन्होंने पॉजिटिव बात कही। उन्होंने भरोसा जताया कि AI का सही उपयोग करके 'विकसित भारत' का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने और 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का सपना देख रहा है। आईएमएफ प्रमुख के अनुसार, AI इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने भारत की मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, युवा आबादी, नवाचार (इनोवेशन) और उद्यमिता को सराहा, जो AI को लोकतांत्रिक बनाने में मददगार साबित हो रहा है।

लेकिन रोजगार बाजार पर बड़ा खतरा

उत्साह के साथ-साथ जॉर्जीवा ने गंभीर चेतावनी भी जारी की। आईएमएफ के शोध के मुताबिक, AI वैश्विक स्तर पर 40% नौकरियों को प्रभावित करेगा- उभरते बाजारों में 40% और विकसित अर्थव्यवस्थाओं में 60% तक। उन्होंने AI के असर को "लेबर मार्केट पर त्सुनामी" जैसा बताया, जो तेज, शक्तिशाली और अनदेखा नहीं किया जा सकता।एंट्री-लेवल जॉब्स सबसे ज्यादा जोखिम में हैं, खासकर युवाओं के लिए। कुछ नौकरियां खत्म हो सकती हैं, कुछ बदल जाएंगी, और कुछ अधिक कुशल व उच्च वेतन वाली बनेंगी। असमानता बढ़ने का खतरा है, अगर नीतियां सही नहीं रहीं।

Infosys चेयरमैन नंदन नीलकेणी की राय

इस बीच, इंफोसिस इन्वेस्टर एआई डे 2026 में बोलते हुए Infosys चेयरमैन नंदन नीलेकणि ने कहा कि AI क्रांति कोड लिखने तक सीमित नहीं रहेगी। भविष्य में फोकस AI सिस्टम को संचालित करने, ऑर्केस्ट्रेट करने और उन्हें बिजनेस में प्रभावी ढंग से लागू करने पर होगा। नीलकेणी ने इसे पिछले बदलावों (स्मार्टफोन, क्लाउड) से कहीं ज्यादा मूलभूत बताया, जो बिजनेस मॉडल, ऑपरेशन और टैलेंट को पूरी तरह बदल देगा।

उन्होंने अनुमान लगाया कि AI वैश्विक स्तर पर 170 मिलियन नए हाई-ग्रोथ जॉब्स पैदा कर सकता है- जैसे AI इंजीनियर्स, फॉरेंसिक एनालिस्ट्स, AI लीड्स, फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियर्स आदि। हालांकि, पुरानी कुछ भूमिकाएं (जैसे बेसिक कोडिंग, QA टेस्टिंग) कम प्रासंगिक हो सकती हैं।

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