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डोनाल्ड ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बताया 'शर्मनाक', सभी देशों पर 10 फीसदी एक्स्ट्रा टैरिफ लगाने का किया ऐलान

 Edited By: Vineet Kumar Singh
 Published : Feb 20, 2026 11:59 pm IST,  Updated : Feb 21, 2026 12:25 am IST

अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने 6–3 के बहुमत से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आपातकालीन शक्तियों के तहत लगाए गए टैरिफ को रद्द कर दिया। इसके बाद ट्रंप ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कोर्ट के फैसले को निराशाजनक और शर्मनाक करार दिया।

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस करते अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। Image Source : AP

वॉशिंगटन: अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कई देशों पर लगाए गए भारी आयात शुल्क यानी कि टैरिफ को रद्द कर दिया है। शुक्रवार को सुनाए गए इस फैसले में कोर्ट ने 6–3 के बहुमत से कहा कि ट्रंप ने जिन आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करके ये टैरिफ लगाए थे, वे सही नहीं थे। माना जा रहा है कि इस फैसले से ट्रंप की आर्थिक योजनाओं को बड़ा झटका लगा है। कोर्ट का फैसला सामने आने के बाद ट्रंप ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हमारी बात नहीं सुनी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि कोर्ट का फैसला निराशाजनक है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निराशाजनक बताते हुए कहा कि अदालत ने शर्मनाक फैसला लिया है।

ट्रंप ने सभी देशों पर 10 फीसदी टैरिफ बढ़ाया

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नाखुश नजर आ रहे ट्रंप ने सभी देशों पर 10 फीसदी टैरिफ बढ़ाने का ऐलान किया। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'टैरिफ पर मेरे पास और भी विकल्प हैं। अब मैं और ज्यादा टैरिफ वसूल सकता हूं। अमेरिका की आर्थिक सुरक्षा जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट विपक्ष के दबाव में आ गया। मैंने दूसरे राष्ट्रपतियों से ज्यादा अच्छे फैसले लिए। मैंने अमेरिका को अरबों डॉलर का फायदा कराया। अमेरिका की सुरक्षा के लिए मैं और ज्यादा टैरिफ लगा सकता हूं।' ट्रंप ने कहा कि 10 फीसदी का ग्लोबल टैरिफ लगाया जाएगा।

ट्रंप के टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सु्प्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अमेरिकी संविधान बहुत स्पष्ट शब्दों में कांग्रेस को टैक्स लगाने की पूरी ताकत देता है, जिसमें टैरिफ या ड्यूटी भी शामिल हैं।  चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने फैसले में लिखा, 'संविधान बनाने वालों ने टैक्स लगाने की कोई भी शक्ति राष्ट्रपति या कार्यपालिका को नहीं दी थी।' तीन जजों सैमुअल अलिटो, क्लेरेंस थॉमस और ब्रेट कावानॉ ने इस फैसले से असहमति जताई। जस्टिस कावानॉ ने कहा कि ये शुल्क नीति के हिसाब से अच्छे हों या बुरे, लेकिन कानून, इतिहास और पुराने फैसलों के आधार पर ये पूरी तरह वैध हैं।

ट्रंप प्रशासन के अधिकारी निकालेंगे तोड़?

चीफ जस्टिस रॉबर्ट्स ने आगे कहा कि अब तक किसी भी राष्ट्रपति को अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति कानून (IEEPA) के तहत ऐसी शुल्क लगाने की ताकत नहीं मिली, इसलिए ऐसी शक्ति कभी थी ही नहीं। इस फैसले से ट्रंप को पूरी तरह शुल्क लगाने से नहीं रोका जा सकता, क्योंकि वे दूसरे कानूनों का इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन इस फैसले से उनकी कुछ शक्तियों पर ज्यादा रोक लग गई है। फिर भी ट्रंप प्रशासन के बड़े अधिकारियों का कहना है कि वे दूसरे तरीकों से टैरिफ की व्यवस्था को पहले जैसी ही रखने की कोशिश करेंगे।

ट्रंप ने अदालत के फैसले को शर्मनाक बताया

जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में गया तो ट्रंप ने कहा था कि केस में उनके खिलाफ फैसला आने से देश की अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ा नुकसान होगा। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के समय ट्रंप दोनों पार्टियों यानी कि डेमोक्रेट और रिपब्लिकन के करीब 24 गवर्नरों से व्यक्तिगत बैठक कर रहे थे।  जब उन्हें बहुमत से लिए गए इस फैसले की खबर दी गई, तो उन्होंने इसे 'शर्मनाक' बताया। सर्वेक्षणों से पता चलता है कि आम लोगों में ट्रंप द्वारा लगाए गए ये टैरिफ ज्यादा पसंद नहीं किए जा रहे थे। दरअसल, आम लोगों का मानना था कि टैरिफ की वजह से महंगाई बढ़ रही है और खर्चा चलाना मुश्किल हो रहा है।

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