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अमेरिका के नेतृत्व वाले Pax Silica में शामिल हुआ भारत, समझें नई दिल्ली के लिए क्यों है यह अहम?

 Published : Feb 20, 2026 11:56 am IST,  Updated : Feb 20, 2026 12:07 pm IST

Pax Silica में भारत की भागीदारी न केवल AI और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में रणनीतिक लाभ देगी, बल्कि वैश्विक तकनीकी सप्लाई चेन को अधिक सुरक्षित और समावेशी बनाने में भी योगदान देगी। यह भारत की "मेक इन इंडिया" और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।

शुक्रवार को अमेरिका के नेतृत्व वाले रणनीतिक गठबंधन Pax Silica में शामिल होने के मौके पर दोनों देशों - India TV Hindi
शुक्रवार को अमेरिका के नेतृत्व वाले रणनीतिक गठबंधन Pax Silica में शामिल होने के मौके पर दोनों देशों के प्रतिनिधि। Image Source : ANI

भारत ने शुक्रवार, 20 फरवरी 2026 को एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अमेरिका के नेतृत्व वाले रणनीतिक गठबंधन Pax Silica में औपचारिक रूप से शामिल हो गया। यह फैसला नई दिल्ली में चल रहे भारत एआई प्रभाव शिखर सम्मेलन के दौरान लिया गया, जहां केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव, अमेरिकी आर्थिक मामलों के अवर सचिव जैकब हेलबर्ग और अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने पैक्स सिलिका घोषणा पर हस्ताक्षर किए।

Pax Silica क्या है?

Pax Silica अमेरिकी विदेश विभाग की प्रमुख पहल है, जिसकी शुरुआत दिसंबर 2025 में हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI, सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स (जैसे लिथियम, कोबाल्ट आदि) और संबंधित सप्लाई चेन को सुरक्षित, लचीला और नवाचार-उन्मुख बनाना है। यह गठबंधन "बलपूर्वक निर्भरताए" को कम करने और विश्वसनीय साझेदार देशों के बीच गहन आर्थिक-तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। इसमें शामिल प्रमुख देशों में अमेरिका के अलावा ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, इज़राइल, यूनाइटेड किंगडम, ग्रीस, कतर, संयुक्त अरब अमीरात आदि शामिल हैं।

यह पहल पूरे "सिलिकॉन स्टैक" को कवर करती है- खनिज निकासी से लेकर ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण, सेमीकंडक्टर, AI इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स तक। अमेरिकी अवर सचिव जैकब हेलबर्ग के शब्दों में, "Pax Silica वास्तव में किसी एक देश के खिलाफ नहीं, बल्कि अमेरिका की सप्लाई चेन को मजबूत करने के बारे में है। उन्होंने इसे 21वीं सदी की आर्थिक और तकनीकी व्यवस्था को परिभाषित करने वाला गठबंधन बताया है।

नई दिल्ली के लिए के लिए क्या महत्व?

भारत का इस गठबंधन में शामिल होना अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देता है, खासकर ऐसे समय में जब दोनों देशों के बीच हाल ही में व्यापार समझौतों ने संबंधों को मजबूती प्रदान की है। इससे पहले कुछ टैरिफ विवादों के बावजूद, यह कदम द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक रीसेट का संकेत है।

भारत को इससे मिलने वाले प्रमुख फायदे

  • क्रिटिकल मिनरल्स की सुरक्षित आपूर्ति और प्रोसेसिंग में सहयोग।
  • सेमीकंडक्टर निर्माण और AI इंफ्रास्ट्रक्चर में गहरा भागीदारी।
  • AI मॉडल विकास, फाउंडेशन मॉडल्स और कंप्यूट क्षमता में साझा ढांचा।
  • तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ाना और वैश्विक AI-आधारित अर्थव्यवस्था में मजबूत स्थिति हासिल करना।
  • "विश्वसनीय भागीदार" के साथ निवेश, इनोवेशन और आर्थिक सुरक्षा को बढ़ावा।

यह कदम भारत की उभरती AI क्षमता, विशाल इंजीनियरिंग टैलेंट और सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षाओं को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाता है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि भारत का शामिल होना, 21वीं सदी की आर्थिक और तकनीकी व्यवस्था को परिभाषित करने वाले गठबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। 

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