Bhagwan Ji Ki Aarti Lyrics In Hindi: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि एकादशी का व्रत करने से श्री हरि विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। साथ ही घर-परिवार में सदैव सुख-समृद्धि और संपन्नता बनी रहती है। प्रत्येक माह में दो बार एकादशी का व्रत किया जाता एक कृष्ण और दूसरा शुक्ल पक्ष में। दोनों ही एकादशी महत्वपूर्ण मानी जाती है। आपको बता दें कि हर मास में आने वाली एकादशी का अलग-अलग नाम होता है। ऐसे ही चैत्र माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को पापमोचिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। पापमोचिनी एकादशी का व्रत आज यानी 11 मार्च 2026, रविवार को रखा जाएगा।
पापमोचिनी एकादशी के दिन विधिपूर्वक भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। इसके साथ ही अगर आपके दांपत्य जीवन में कोई परेशानी चल रही हैं तो वो भी दूर हो जाती है और रिश्ते में मधुरत बढ़ने लगती हैं। पापमोचिनी एकादशी के दिन भगवना विष्णु को उनकी प्रिय चीजें जरूर अर्पित करें। नारायण की प्रिय चीजें, केला, पंचामृत, तुलसी, पीले रंग की मिठाई, पंजीरी, मखाने की खीर आदि चीजें हैं। इसके अलावा पापमोचिनी एकादशी की पूजा का संपन्न विष्णु जी की आरती के साथ करें। नारायण की आरती करने से घर में सकारात्मकता और खुशहाली बनी रहती है।
॥ विष्णु जी की आरती ॥
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी ! जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
ॐ जय जगदीश हरे।
जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।
स्वामी दुःख विनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
ॐ जय जगदीश हरे।
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी।
स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥
ॐ जय जगदीश हरे।
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
स्वामी तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
ॐ जय जगदीश हरे।
तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।
स्वामी तुम पालन-कर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
ॐ जय जगदीश हरे।
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥
ॐ जय जगदीश हरे।
दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
ॐ जय जगदीश हरे।
विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
स्वमी पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥
ॐ जय जगदीश हरे।
श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।
स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥
ॐ जय जगदीश हरे।
Vishnu Ji Aarti PDF
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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