Israel Iran War: अमेरिका ने रूसी क्रूड ऑयल पर लगे कड़े प्रतिबंधों में एक महत्वपूर्ण ढील देने की घोषणा की है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने मार्च, 2026 में भारत और कुछ अन्य देशों को रूसी कच्चे तेल को खरीदने के लिए 30 दिन की विशेष छूट दे दी है। अमेरिका की तरफ से यह कदम ऐसे वक्त में उठाया गया जब वह लगातार अन्य देशों पर रूसी क्रूड ऑयल न खरीदने का दबाव बना रहा था। आइए विस्तार से समझें कि अमेरिका ने रूसी तेल पर यह बैन कब और क्यों लगाए थे, और अब उसे अपने ही निर्णय से पीछे हटने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ा।
बता दें कि जब रूस ने 24 फरवरी, 2022 को यूक्रेन पर हमला बोला, तो इसके जवाब में अमेरिका और पश्चिमी देशों ने मॉस्को की इकोनॉमी को कमजोर बनाने की रणनीति अपनाई। रूस की इनकम का सबसे बड़ा सोर्स उसका तेल और गैस एक्सपोर्ट था। मार्च, 2022 में अमेरिका ने अपने यहां रूसी क्रूड ऑयल, गैस और कोयले के इम्पोर्ट पर पूरी तरह से बैन लगा दिया। अमेरिकी प्रशासन ने इसका मकसद रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की 'वॉर मशीन' की फंडिंग को रोकना बताया था।
फिर दिसंबर, 2022 में अमेरिका, यूरोपियन यूनियन और G7 देशों ने मिलकर रूसी कच्चे तेल पर 60 डॉलर प्रति बैरल का 'प्राइस कैप' लागू कर दिया। इसका मुख्य उद्देश्य यह था कि दुनिया भर में तेल की सप्लाई तो बनी रहे, लेकिन रूस उससे ज्यादा मुनाफा न कमा पाए। इस प्रकार के बैन के बाद रूस अपना तेल भारी डिस्काउंट के साथ भारत और चीन को बेचने लगा। अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में भारत पर 25 प्रतिशत का टैरिफ भी लगाया था, ताकि भारत को रूस का क्रूड ऑयल खरीदने से रोका जाए।
अमेरिका का यह कदम इसका बड़ा उदाहरण है कि जियोपॉलिटिक्स में राष्ट्रीय हित और आर्थिक सुरक्षा आखिरकार सख्त प्रतिबंधों पर भारी पड़ गई। हालांकि, ट्रंप प्रशासन इसे सिर्फ 30 दिन का शॉर्ट-टर्म उपाय बताने में लगा हुआ है ताकि रूस को कोई बड़ा आर्थिक फायदा न हो, लेकिन यह तो साफ हो गया है कि मिडिल-ईस्ट के संकट ने अमेरिका को अपनी ही बैन वाली नीति के साथ व्यावहारिक समझौता करने के लिए विवश कर दिया। वहीं, इस बीच रूस को अपना कच्चा तेल भारत समेत तमाम देशों को बेचने का सुनहरा मौका मिल गया है।
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