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"निजी संपत्ति में नमाज अदा करने पर कोई कानूनी रोक नहीं", इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सुनाया फैसला

 Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
 Published : Mar 15, 2026 01:17 pm IST,  Updated : Mar 15, 2026 01:28 pm IST

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि हम समन्वय पीठ के फैसले से सहमत हैं और प्रतिवादी अधिकारियों को याचिकाकर्ताओं के परिसर के भीतर नमाज अदा किए जाने में किसी भी तरह से हस्तक्षेप नहीं करने का निर्देश देते हैं।

इलाहाबाद हाई कोर्ट- India TV Hindi
इलाहाबाद हाई कोर्ट Image Source : FILE (PTI)

प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक फैसले पर सुनवाई करते हुए कहा कि किसी निजी संपत्ति के भीतर धार्मिक सभा या नमाज अदा करने पर कानूनन कोई प्रतिबंध नहीं है। अदालत ने बदायूं जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि वे एक निजी परिसर में स्थित मस्जिद में शांतिपूर्ण तरीके से नमाज पढ़ रहे लोगों के कार्य में कोई हस्तक्षेप न करें या कोई अड़चन ना डालें।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, यह आदेश बदायूं के निवासी अलिशेर द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया गया। याचिकाकर्ता ने अदालत से गुहार लगाई थी कि उसकी संपत्ति के एक हिस्से में वक्फ मस्जिद रजा स्थित है। अलिशेर का आरोप था कि स्थानीय अधिकारी उसे, उसके परिजनों और मुस्लिम समुदाय के अन्य सदस्यों को वहां शांतिपूर्ण तरीके से नमाज अदा करने से रोक रहे हैं या बाधा डाल रहे हैं।

न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति विवेक शरण की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। पीठ ने एक समन्वय पीठ के पुराने विचार से सहमति जताते हुए कहा कि निजी परिसर में धार्मिक गतिविधियों के आयोजन के खिलाफ कानून में कोई रोक नहीं है। अदालत ने आदेश दिया, "हम समन्वय पीठ के निर्णय से सहमत हैं और प्रतिवादी अधिकारियों को याचिकाकर्ताओं के परिसर के भीतर नमाज अदा किए जाने में किसी भी तरह से हस्तक्षेप न करने का निर्देश देते हैं।"

सार्वजनिक व्यवस्था पर स्पष्टीकरण

याचिकाकर्ताओं के वकील ने मरांथा फुल गॉस्पेल मिनिस्ट्रीज बनाम उत्तर प्रदेश सरकार के मामले में एक खंडपीठ द्वारा 27 जनवरी को दिए गए निर्णय का हवाला दिया। इस रिट याचिका को निस्तारित करते हुए अदालत ने 25 फरवरी को दिए निर्णय में 27 जनवरी के निर्णय के आधार पर याचिकाकर्ताओं को राहत दी और स्पष्ट किया कि सार्वजनिक मार्ग या सार्वजनिक संपत्ति पर किसी कानून व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होने पर पुलिस कानून के मुताबिक पर्याप्त कार्रवाई कर सकती है।

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