वाशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने के लिए अगले हफ्ते रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात करेंगे। मगर इस ऐलान के साथ ही यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की परेशान हो गए हैं, क्योंकि इस बैठक में यूक्रेन को शामिल नहीं किया जा रहा है। ट्रंप ने घोषणा करते कहा कि वे राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से अगले सप्ताह अलास्का में मुलाकात करेंगे। इस बहुप्रतीक्षित बैठक का उद्देश्य यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की संभावनाओं पर चर्चा करना है। ट्रंप ने इस बैठक को शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है और कहा है कि इसकी तारीख 15 अगस्त तय की गई है। हालांकि बैठक की पुष्टि अभी तक रूस की ओर से औपचारिक रूप से नहीं की गई है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, “मैं अगले शुक्रवार को अलास्का में पुतिन से मिलूंगा। इस बैठक में हम यूक्रेन में जारी युद्ध को समाप्त करने के रास्तों पर विचार करेंगे। आगे की जानकारी जल्द साझा की जाएगी।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह बैठक न केवल अमेरिका और रूस के बीच, बल्कि वैश्विक स्तर पर शांति बहाली के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
यूक्रेन को इस बैठक में शामिल नहीं किए जाने से जेलेंस्की परेशान हैं। वह कई बार कह चुके हैं कि अमेरिका और रूस की बैठक में यूक्रेन को शामिल किया जाए। जेलेंस्की का कहना है कि यूक्रेन युद्ध पर चर्चा के लिए होने वाली कोई भी बैठक उनकी गैर-मौजूदगी में अधूरी है। हालांकि इस बीच खबरें यह भी हैं कि जेलेंस्की पुतिन से वन टू वन मुलाकात के लिए भी तैयार हो गए हैं। ट्रंप और पुतिन की मुलाकात के बाद अगली बैठक पुतिन और जेलेंस्की के बीच हो सकती है।
रूस की स्थिति को लेकर कुछ विश्लेषकों का मानना है कि क्रेमलिन उन क्षेत्रों को छोड़ने का प्रस्ताव दे सकता है जो उन चार विवादित क्षेत्रों के बाहर हैं, जिन्हें रूस पहले ही अपने क्षेत्र में शामिल करने का दावा कर चुका है। यह संकेत देता है कि वार्ता में क्षेत्रीय सीमाओं को लेकर लचीलापन दिखाया जा सकता है, बशर्ते बातचीत सही दिशा में आगे बढ़े।
पुतिन चाहते थे कि यह बैठक संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में हो। इसी लिए ट्रंप की इस प्रस्तावित बैठक को लेकर अभी तक रूस की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन दोनों देशों के राजनयिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। अमेरिका और रूस के बीच ऐसी किसी बैठक की पुष्टि ने वैश्विक राजनीतिक हलचलों को नया मोड़ दे दिया है, खासकर ऐसे समय में जब यूक्रेन युद्ध अपने तीसरे वर्ष में प्रवेश कर चुका है और लाखों लोग इससे प्रभावित हुए हैं।
अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें इस बैठक पर टिकी हैं, क्योंकि यह न केवल दो देशों के संबंधों के लिहाज से, बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए भी एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है। (एपी)
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