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Explainer: ईरान के लिए कितना महत्वपूर्ण है "खार्ग द्वीप"...जिसे अमेरिका ने बनाया निशाना; इसे क्यों कहते हैं इकोनॉमी की रीढ़?

Written By: Dharmendra Kumar Mishra @dharmendramedia Published : Mar 15, 2026 05:40 pm IST, Updated : Mar 15, 2026 05:40 pm IST

Israel US Iran War: ईरान पर नकेल कसने के लिए अमेरिका ने अब अपनी युद्ध रणनीति बदल दी है। राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी सेना ईरान के खार्ग द्वीप समेत अन्य द्वीपों को निशाना बना रही है।

ईरान का खार्ग द्वीप।- India TV Hindi
Image Source : AP ईरान का खार्ग द्वीप।

Explainer: इजरायल-अमेरिका और ईरान वार के 15 दिन बीत चुके हैं। इसके बावजूद यह युद्ध थमता नजर नहीं आ रहा। ईरान ने इजरायल से लेकर पूरे मिडिल-ईस्ट में अमेरिकी सैन्य बेसों और दफ्तरों को मिसाइल व ड्रोन हमले में तबाह कर दिया है। ऐसे में युद्ध और भीषण होता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को बार-बार सरेंडर करने की धमकी दे रहे हैं, उल्टे ईरान अमेरिकी संपत्तियों को मिसाइलों के हमले में धुएं में उड़ा रहा है। ऐसे में अमेरिका ने अब ईरान की रीढ़ की हड्डी कहे जाने वाले खार्ग द्वीप को निशाना बनाया है। ऐसे तमाम और ईरानी द्वीप हैं, जिन पर अमेरिका ने हमले की धमकी दी है। 

अमेरिका क्यों कर रहा खार्ग द्वीप पर हमला?

अमेरिका ने ईरान के तट से दूर स्थित खार्ग द्वीप को अब युद्ध का नवीनतम केंद्र बना दिया है। पिछले सप्ताह अमेरिका ने खार्ग द्वीप पर घातक हमले करके ईरानी सैन्य ठिकानों को नष्ट करने का दावा किया। यह द्वीप ईरान के तेल नेटवर्क के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। शुक्रवार को फारस की खाड़ी में स्थित इस द्वीप पर हुए हमले में तेल ढांचा सुरक्षित रहा और शनिवार-रविवार को पता चला कि यहां जहाजों का आवागमन अभी भी जारी है। अभी भी यहां से ईंधन लोड करके भेजे जा रहे हैं। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने द्वीप के सैन्य संसाधनों को "पूरी तरह से नष्ट" कर दिया है, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान या कोई अन्य होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के गुजरने में बाधा डालता है, तो वे तेल ढांचे को निशाना न बनाने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करेंगे।

ईरान के लिए कितना महत्वपूर्ण है खार्ग द्वीप?

ईरान के द्वीप उसके क्षेत्र का छोटा हिस्सा हैं, लेकिन तेल सुविधाओं और सामरिक स्थिति के कारण इनकी अहमियत बहुत अधिक है। ईरान के यह द्वीप फारस की खाड़ी से लेकर होर्मुज जलडमरूमध्य तक फैले हुए हैं। इनमें खार्ग द्वीप सबसे अधिक महत्वूपर्ण है। इसी लिए ट्रंप के करीबी रिपब्लिकन सहयोगी अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने शनिवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट में लिखा, "जो खार्ग द्वीप पर नियंत्रण कर लेगा, वह इस युद्ध के भाग्य को नियंत्रित कर लेगा"। ईरान के तट से लगभग 33 किलोमीटर दूर यह छोटा कोरल द्वीप वह प्रमुख टर्मिनल है, जहां से ईरान के लगभग सभी तेल निर्यात गुजरते हैं। युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने इस द्वीप से 13.7 मिलियन बैरल तेल निर्यात किया है।

खार्ग को क्यों कहते हैं ईरान के इकोनॉमी की रीढ़

खार्ग द्वीप सर्वाधिक तेल समृद्ध है। इससे ईरान को तेल से काफी राजस्व मिलता है, जिसमें चीन जैसे देशों को शिपमेंट होते हैं। इसलिए खार्ग पर हमला न केवल वर्तमान सरकार को नुकसान पहुंचाएगा, बल्कि भविष्य में आने वाली किसी भी व्यवस्था की व्यवहार्यता को भी प्रभावित कर सकता है। इस द्वीप के दक्षिण में स्टोरेज टैंक हैं, साथ ही हजारों श्रमिकों के लिए आवास बनाए गए हैं। यहां गजेल्स (हिरण) रिफाइनरी और डिपो के पास स्वतंत्र घूमते हैं, जो खार्ग को ईरान की सबसे मूल्यवान और संवेदनशील संपत्तियों में से एक बनाते हैं। द्वीप पर मध्ययुगीन पुर्तगाली किला और फारस की खाड़ी में सबसे पुराने ईसाई मठों में से एक के खंडहर भी हैं। रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट के ऊर्जा शोधकर्ता पेट्रास कटिनास ने कहा कि खार्ग द्वीप ईरान की सरकार और सेना को फंडिंग के लिए महत्वपूर्ण है। यदि ईरान खार्ग पर नियंत्रण खो देता है, तो देश के लिए कार्य करना मुश्किल हो जाएगा, भले ही यह सैन्य या परमाणु लक्ष्य न हो।" इसलिए ईरान की इकोनॉमी के लिए इसे रीढ़ की हड्डी कहा जाता है। 

अगर अमेरिका ने कर लिया खार्ग पर कब्जा तो क्या होगा?

अगर अमेरिका ने खार्ग द्वीप पर कब्जा कर लिया तो वह तेहरान पर वार्ता का दबाव बढ़ा सकेगा। क्योंकि यह द्वीप "इसकी अर्थव्यवस्था का मुख्य नोड" है। जेपी मॉर्गन की ग्लोबल कमोडिटी रिसर्च टीम ने इस सप्ताह एक निवेश नोट में चेतावनी दी कि द्वीप पर हमले से बड़े आर्थिक प्रभाव पड़ेंगे। इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर और अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के क्रिटिकल थ्रेट्स प्रोजेक्ट की सैटेलाइट विश्लेषण से पता चला कि शुक्रवार को अमेरिकी हमलों में 90 से अधिक लक्ष्यों को निशाना बनाया गया, जिसमें एयर डिफेंस, रडार साइट, एयरपोर्ट और होवरक्राफ्ट बेस शामिल हैं। 

खार्ग के बाद अबू मूसा और ग्रेटर एवं लेसर टुनब भी निशाने पर 

खार्ग के बाद अबू मूसा और ग्रेटर एवं लेसर टुनब भी अमेरिका के निशाने पर हैं। ये तीन छोटे द्वीप लंबे समय से ईरान और अमेरिका के सहयोगी खाड़ी राज्यों के बीच तनाव की फ्रंटलाइन रहे हैं। ईरानी सेनाओं ने नवंबर 1971 में खाड़ी से ब्रिटेन के पीछे हटने के बाद इन द्वीपों पर कब्जा कर लिया था। ईरान इन द्वीपों पर सैन्य संसाधन और गैरिसन बनाए हुए है। द्वीपों पर क्षेत्रीय विवाद खाड़ी का सबसे लगातार फ्लैशपॉइंट बना हुआ है। ईरान ने दावा किया कि अमेरिका ने अबू मूसा पर भी हमला किया,  जिसे अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने तुरंत स्वीकार नहीं किया। 

केश्म द्वीप भी ईरान की नब्ज

फारस की खाड़ी का सबसे बड़ा द्वीप केश्म द्वीप होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित है और यहां लगभग 1.5 लाख निवासी रहते हैं। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका ने 8 मार्च को द्वीप पर एक डिसेलिनेशन प्लांट पर हमला किया, जिसे वाशिंगटन ने स्वीकार नहीं किया। मगर अराघची ने चेतावनी दी कि ईरान के ढांचे पर हमला करना खतरनाक कदम है, जिसके गंभीर परिणाम होंगे। (इनपुट-एपी)

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