कोलकाता: इस वक्त की बड़ी खबर कोलकाता से सामने आ रही है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) में अंदरूनी कलह का एक और संकेत तब मिला, जब बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले एक गुट ने सोमवार को एक नई कमेटी बनाने और पार्टी में दूसरे सबसे बड़े नेता अभिषेक बनर्जी को सस्पेंड करने की घोषणा की। जानकारी के मुताबिक टीएमसी के बागी विधायकों ने तृणमूल कांग्रेस के पार्षदों के साथ एक सीक्रेट मीटिंग की। सूत्रों के मुताबिक बैठक में तृणमूल कांग्रेस के नाम और लोगो का इस्तेमाल किया गया, लेकिन ममता बनर्जी की तस्वीर का इस्तेमाल नहीं किया गया। साथ ही, सूत्रों के मुताबिक, इस सीक्रेट मीटिंग से आने वाले दिनों में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ सख्त एक्शन लेने का फैसला किया गया है।
कोलकाता में की गई सीक्रेट मीटिंग
बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल के विपक्षी नेता और बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने आज दोपहर न्यू टाउन के एक होटल में तृणमूल के पुराने और मौजूदा पार्षदों के एक ग्रुप से एक जरूरी सीक्रेट मीटिंग की। इस सीक्रेट मीटिंग में करीब 60 से 70 पार्षद और बड़े नेता शामिल हुए। इस मीटिंग में राज्य के पुराने मंत्री और विधायक जावेद खान, अरूप रॉय और कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के कई पार्षद मौजूद थे।
अभिषेक बनर्जी के खिलाफ एक्शन
सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में 11 सदस्यों की कमेटी बनाई गई है। अरूप रॉय को इस नेशनल वर्किंग कमेटी का प्रेसिडेंट बनाया गया है। सूत्रों का यह भी कहना है कि एक प्रस्ताव पास करके अभिषेक बनर्जी को सस्पेंड कर दिया गया है। गौरतलब है कि इस सीक्रेट मीटिंग में तृणमूल कांग्रेस पार्टी के नाम और लोगो का इस्तेमाल तो किया गया, लेकिन ममता बनर्जी की कोई तस्वीर इस्तेमाल नहीं की गई।
बड़ीं संख्या में मौजूद रहे बागी नेता
गुट के सूत्रों के अनुसार लगभग 60 विधायक और बड़ी संख्या में पार्षद, जिनमें कोलकाता नगर निगम के कई प्रतिनिधि भी शामिल हैं, या तो बैठक में मौजूद थे या उन्होंने इसकी कार्यवाही का समर्थन किया। कुछ ही दिन पहले 80 में से 58 विधायकों ने विधानसभा में विपक्ष के नेता पद के लिए ऋतब्रत बनर्जी के दावे का समर्थन किया था और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पसंद को खारिज कर दिया था। इसके बाद बागी गुट ने दावा किया है कि विधानसभा में उनकी संख्या बढ़कर लगभग 65 विधायकों तक पहुंच गई है। संसद में, हाल ही में पार्टी को एक और झटका तब लगा जब उसके 28 में से 20 लोकसभा सदस्य कथित तौर पर तृणमूल संसदीय दल से अलग हो गए और उन्होंने नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय कर लिया, साथ ही भाजपा-नेतृत्व वाले राजग को समर्थन देने की घोषणा की।
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