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उत्तर 24 परगना के हाबरा से पाकिस्तानी जासूस होने के शक में एक व्यक्ति गिरफ्तार, फर्जी पहचान-पत्र जब्त

 Reported By: Onkar Sarkar Written By: India TV West Bengal Bureau Desk
 Published : Aug 12, 2026 02:34 pm IST,  Updated : Aug 12, 2026 02:34 pm IST

बंगाल स्पेशल टास्क फोर्स ने पाकिस्तानी जासूस होने के शक में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। सूत्रों की मानें तो ISI से इस सख्स के तार जुड़े हुए हैं। विस्तार से पढ़ें पूरी खबर।

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पाकिस्तानी जासूस होने के शक में एक व्यक्ति गिरफ्तार Image Source : MAGNIFIC

पश्चिम बंगाल की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए उत्तर 24 परगना जिले के हाबरा इलाके से एक संदिग्ध व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। इस व्यक्ति पर पाकिस्तानी जासूस होने का शक है। संदिग्ध की पहचान पाकिस्तान के फैसलाबाद के रहने वाले रऊफ के तौर पर हुई है। रऊफ पर ISI एजेंट के तौर पर काम करने का शक है। जांचकर्ताओं के अनुसार रऊफ ने नेपाल बॉर्डर के जरिए गैर-कानूनी तरीक से भारत में एंट्री ली थी। रऊफ कोलकाता में स्थायी रूप से बसने की प्लानिंग में था और इसके लिए 'वाहफ' नाम से उसने नकली पहचान अपनाई थी। कोलकाता के तोपसिया का नकली पता दिखाकर जाली भारतीय पहचान पत्रों का इस्तेमाल करते हुए रऊफ ने अपनी असली पहचान छुपाने की पूरी कोशिश की थी। पश्चिम बंगाल की स्पेशल टास्क फोर्स ने सारे फर्जी पहचान पत्र जब्त कर लिए हैं और जांच अभी जारी है। 

जांच एजेंसियों के अनुसार, संदिग्ध का पूरा नाम राणा रऊफ है जो पाकिस्तान के फैसलाबाद का निवासी बताया जा रहा है। अधिकारियों की मानें तो ISI एजेंट के रूप में रऊफ भारत में काम कर रहा था और देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां एकत्र करने की कोशिश में लगा हुआ था। रऊफ से पूछताछ के दौरान पता चला कि वो नेपाल बॉर्डर के जरिए अवैध रूप से भारत में आया था। इसके बाद भारत में स्थायी रूप से रहने के लिए उसने फर्जी दस्तावेज भी बना लिए थे और खुद को उसने बंगाल के तोपसिया का रहने वाला बता रहा था। 

स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने छापेमारी के दौरान संदिग्ध से फर्जी भारतीय पहचान-पत्र भी जब्त किया था। फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां आरोपी से सख्ती से पूछताछ में लगी हुई हैं। रऊफ भारत कब आया था, उसे भारत में किन लोगों से मदद मिली, वो ISI को अब तक क्या जानकारियां दे चुका है और उसकी आगे की प्लानिंग क्या थी? इन सब बातों का पता जांच एजेंसियों के द्वारा लगाया जाएगा। रऊफ के जरिए भारत में फैले जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश भी हो सकता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय एजेंसियां भी जांच में शामिल हो सकती हैं।  

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