Waseem Barelvi Shayari: वसीम बरेलवी आधुनिक उर्दू शायरी का एक ऐसा नाम हैं जिन्हें "जज्बातों का जादूगर" कहा जाए तो गलत नहीं होगा। वे न केवल भारत में, बल्कि पूरी दुनिया में उर्दू मुशायरों के सबसे लोकप्रिय और सम्मानित कवियों में से एक हैं। वसीम बरेलवी की शायरी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे बहुत गहरी बात को बहुत आसान शब्दों में कह देते हैं। उनकी रचनाओं में रिश्तों की कड़वाहट और मिठास का ज़िक्र होता है। सियासत और समाज पर तीखा लेकिन सलीकेदार कटाक्ष मिलता है। इंसानी स्वाभिमान की झलक साफ दिखती है। उनके कुछ शेर तो आज लोगों की ज़बान पर मुहावरों की तरह चढ़े हुए हैं। ऐसे में यहां हम उनके मशहूर शेर लेकर आए हैं। यहां पढ़ें वसीम बरलवी साहब की प्रसिद्ध शायरी।
1. जहां रहेगा वहीं रौशनी लुटाएगा
किसी चराग़ का अपना मकाँ नहीं होता
2. आते आते मिरा नाम सा रह गया
उस के होंटों पे कुछ कांपता रह गया
3. कभी लफ़्ज़ों से ग़द्दारी न करना
ग़ज़ल पढ़ना अदाकारी न करना
4. आंखें गुनाहगार तो नींदें सज़ा हुईं
तुम क्या गए कि घर की कनीज़ें ख़फ़ा हुईं
5. आसमां इतनी बुलंदी पे जो इतराता है
भूल जाता है ज़मीं से ही नज़र आता है
6. शर्तें लगाई जाती नहीं दोस्ती के साथ
कीजे मुझे क़ुबूल मिरी हर कमी के साथ
7. बहुत से ख़्वाब देखोगे तो आंखें
तुम्हारा साथ देना छोड़ देंगी
8. झूट वाले कहीं से कहीं बढ़ गए
और मैं था कि सच बोलता रह गया
9. मुझे पढ़ता कोई तो कैसे पढ़ता
मिरे चेहरे पे तुम लिक्खे हुए थे
10. सफ़र के साथ सफ़र के नए मसाइल थे
घरों का ज़िक्र तो रस्ते में छूट जाता था
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