Chaitra Navratri Kalash Sthapana Muhurat 2026: अमावस्या के साये में चैत्र नवरात्रि का होगा आगाज, नोट कर लें 19 मार्च को कलश स्थापना का सबसे सटीक मुहूर्त
Chaitra Navratri Kalash Sthapana Muhurat 2026: अमावस्या के साये में चैत्र नवरात्रि का होगा आगाज, नोट कर लें 19 मार्च को कलश स्थापना का सबसे सटीक मुहूर्त
Written By: Laveena Sharma@laveena1693
Published : Mar 17, 2026 08:27 am IST,
Updated : Mar 17, 2026 08:27 am IST
Chaitra Navratri Kalash Sthapana Muhurat 2026: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व वैसे तो चैत्र अमावस्या के अगले दिन मनाया जाता है। लेकिन इस बार ये दोनों त्योहार एक ही दिन मनाए जाएंगे। बता दें ऐसा संयोग पूरे 72 सालों बाद बन रहा है। जानिए ऐसे में घटस्थापना यानी कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।
Chaitra Navratri Kalash Sthapana Muhurat 2026 (चैत्र नवरात्रि घटस्थापना मुहूर्त 2026): चैत्र नवरात्रि में 72 सालों बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बनने जा रहा है जब मां अंबे का स्वागत और चैत्र अमावस्या का स्नान-दान एक ही दिन किया जाएगा। दरअसल 19 मार्च 2026 को अमावस्या और प्रतिपदा तिथि का मेल हो रहा है। इस दिन सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि रहेगी। जिस वजह से अमावस्या से जुड़े कर्मकांड 19 तारीख की सुबह में किए जाएंगे। वहीं मां दुर्गा का आगमन भी इसी दिन किया जाएगा। चलिए जानते हैं ऐसे में कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या रहने वाला है।
चैत्र नवरात्रि के दिन कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 19 मार्च 2026 की सुबह 06 बजकर 52 मिनट से 09 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। वहीं घटस्थापना का अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 20 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। प्रतिपदा तिथि 19 मार्च 2026 की सुबह 06 बजकर 52 मिनट से 20 मार्च 2026 की सुबह 04 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। इसके बाद द्वितीया तिथि लग जाएगी।
कलश स्थापना की सरल विधि (Navratri Kalash Sthapana Vidhi)
सबसे पहले तो कलश स्थापना के स्थान का चयन करें। घर की उत्तर-पूर्व दिशा घटस्थापना के लिए सबसे उत्तम मानी जाती है। आप चाहें तो घर के मंदिर के पास भी कलश स्थापित कर सकते हैं।
कलश स्थापना के लिए एक मिट्टी के पात्र में शुद्ध मिट्टी डालें और उसमें जौ बोएं।
फिर तांबे या मिट्टी का कलश लें और उसके मुख पर कलावा बांध लें। फिर उसमें जल, गंगाजल, सिक्का, सुपारी और अक्षत डालें।
फिर कलश के मुख पर आम के 5 पत्ते रखें और उसके ऊपर एक जटा वाले नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर रख दें।
इसके बाद कलश की विधि विधान पूजा करें।
इसके बाद हाथ में जल लेकर मां दुर्गा का ध्यान करें और व्रत करने का संकल्प लें।