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संसद की सीढ़ियों पर चाय-बिस्किट खाने पर घिरे राहुल गांधी, पूर्व सैनिकों ने की माफी की मांग

 Reported By: Devendra Parashar, Edited By: Amar Deep
 Published : Mar 17, 2026 02:22 pm IST,  Updated : Mar 17, 2026 02:53 pm IST

संसद की सीढ़ियों पर बैठकर चाय-बिस्किट खाने को लेकर राहुल गांधी विवादों में घिर गए हैं। पूर्व सैनिकों ने एक लेटर लिखा है और इसमें उन्होंने संसद की मर्यादा भंग करने के लिए राहुल गांधी से माफी की मांग की है।

राहुल गांधी ने संसद की सीढ़ियों पर खाई चाय-बिस्किट।- India TV Hindi
राहुल गांधी ने संसद की सीढ़ियों पर खाई चाय-बिस्किट। Image Source : PTI

नई दिल्ली: हाल ही में राहुल गांधी संसद की सीढ़ियों पर चाय-बिस्किट खाने को लेकर विवादों में फंस गए हैं। अब पूर्व सैनिकों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने राहुल गांधी से इस कृत्य के लिए माफी की मांग की है। बाकायदा इसके लिए लेटर भी जारी किया गया है। जारी लेटर में कहा है गया है कि भारत की संसद हमारे संवैधानिक ढांचे में एक अद्वितीय और उच्च स्थान रखती है। संसद की गरिमा महज एक परंपरा का विषय नहीं है, बल्कि संवैधानिक लोकाचार का एक अनिवार्य तत्व है, जो हमारे लोकतंत्र को संचालित करता है। लोकसभा और राज्यसभा के कक्षों से जुड़ी पवित्रता, संसदीय परिसर के सभी क्षेत्रों पर समान रूप से लागू होती है। इसमें सीढ़ियां, गलियारे और लॉबी शामिल हैं। ये आकस्मिक स्थान नहीं हैं, बल्कि संसद के अभिन्न अंग हैं, और इनमें अपेक्षित आचरण संस्था की गरिमा को प्रतिबिंबित करना चाहिए।

संसदीय अधिकार की घोर अवहेलना

लेटर में आगे कहा है कि इस संदर्भ में 12 मार्च को घटी घटनाएं अत्यंत चिंताजनक हैं। संसद परिसर के भीतर प्रदर्शन या विरोध प्रदर्शन पर स्पष्ट रूप से प्रतिबंध लगाने के बावजूद, राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष ने इस निर्देश की अवहेलना की। इससे न केवल प्रक्रिया का उल्लंघन होता है, बल्कि यह संसदीय अधिकार की घोर अवहेलना और व्यक्तिगत राजनीतिक तमाशे को संवैधानिक संस्था की गरिमा से ऊपर रखने की इच्छा को दर्शाता है। राहुल गांधी, कई अन्य सांसदों के साथ, संसद की सीढ़ियों पर चाय-बिस्किट खाते हुए देखे गए, जो देश की सर्वोच्च विधायी संस्था के सदस्यों के लिए पूरी तरह से अशोभनीय था। 

संसद की सीढ़ियां तमाशे का स्थान नहीं

पूर्व सैनिकों ने लेटर में कहा है कि संसद की सीढ़ियां राजनीतिक तमाशे का स्थान नहीं हैं। संसद परिसर के भीतर ऐसा आचरण शिष्टाचार के मानदंडों की स्पष्ट अवहेलना को दर्शाता है। दुर्भाग्यवश, राहुल गांधी ने संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह नाटकीयता के माध्यम से सार्वजनिक चर्चा और मर्यादा के स्तर को बार-बार गिराया है। राहुल गांधी को इस व्यवहार के लिए राष्ट्र से माफी मांगनी चाहिए और उस दृष्टिकोण पर आत्मनिरीक्षण करना चाहिए जिसके कारण यह व्यवहार हुआ, ताकि संसद की गरिमा, अधिकार और संस्थागत पवित्रता पूरी तरह से संरक्षित रहे।

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