अखिलेश यादव के सौतेले भाई प्रतीक यादव की मौत का मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) तक पहुंच गया है। मानवाधिकार के लिए काम करने वाली Dk foundation नाम की संस्था (NGO) ने शिकायत की है। प्रतीक यादव की संदिग्ध मौत को हत्या बताकर NHRC में शिकायत की गई है। प्रतीक यादव की संदिग्ध मृत्यु मामले में NHRC से स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।
शरीर पर पाए गए चोट के निशान
याचिका में कहा गया है कि प्रारंभिक तौर पर मृत्यु का कारण हृदय गति रुकना (Cardiorespiratory Collapse) बताया जा रहा है, लेकिन मृतक के शरीर पर पाए गए चोट के निशान (Ante-mortem Injuries) और घटना की अचानक प्रकृति कई गंभीर सवाल खड़े करती है। प्रतीक यादव एक स्वस्थ जीवनशैली के लिए जाने जाते थे, ऐसे में उनकी अचानक मृत्यु और शरीर पर मौजूद संदिग्ध निशानों की निष्पक्ष जांच अनिवार्य है।
इन तीन चीजों की उठी मांग
- मामले की जांच के लिए तत्काल SIT (विशेष जांच दल) का गठन हो।
- लखनऊ के सिविल अस्पताल और संबंधित रूट के सीसीटीवी फुटेज को न्यायिक अभिरक्षा में लिया जाए।
- फॉरेंसिक जांच को राज्य के प्रभाव से मुक्त रखकर केंद्रीय प्रयोगशाला (CFSL) के माध्यम से कराया जाए।
आज हुआ अंतिम संस्कार
प्रतीक यादव के पार्थिव शरीर का गुरुवार को लखनऊ के 'बैकुंठ धाम' में अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनके ससुर अरविंद सिंह बिष्ट ने उन्हें मुखाग्नि दी। प्रतीक यादव का 38 वर्ष की उम्र में बुधवार सुबह हृदय और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों के कारण बीमार पड़ने के बाद निधन हो गया था । उन्हें तबीयत खराब होने पर राजधानी के सिविल अस्पताल लाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था।
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