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थम नहीं रही रुपये की गिरावट! डॉलर के मुकाबले 100 के पार गया रुपया तो आपकी जेब पर क्या होगा असर? आसान भाषा में समझिए

 Written By: Shivendra Singh
 Published : May 14, 2026 12:23 pm IST,  Updated : May 14, 2026 12:25 pm IST

डॉलर के मुकाबले रुपये की यह गिरावट कई वैश्विक और घरेलू कारणों से जुड़ी मानी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, विदेशी निवेश में कमी और डॉलर की मजबूत स्थिति ने रुपये पर दबाव बढ़ाया है।

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डॉलर के सामने टूटता रुपया!

भारतीय रुपये में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। आज रुपया डॉलर के मुकाबले 95.95 के स्तर को पार कर गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो वह दिन दूर नहीं जब डॉलर 100 रुपये के मनोवैज्ञानिक स्तर को छू लेगा। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि डॉलर के महंगा होने और रुपये के कमजोर होने का आपकी निजी जिंदगी पर क्या असर पड़ सकता है? आइए जानते हैं क्या-क्या चीजें महंगी हो जाएंगी।

1. पेट्रोल-डीजल और ट्रांसपोर्टेशन की मार

भारत अपनी जरूरत का लगभग 80% कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है, जिसका भुगतान डॉलर में करना होता है। जब रुपया कमजोर होता है, तो सरकार और तेल कंपनियों को वही तेल खरीदने के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इसका सीधा नतीजा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में सामने आता है। जब ईंधन महंगा होता है, तो माल ढुलाई महंगी हो जाती है, जिससे फल, सब्जियां और रोजमर्रा का सामान महंगा हो जाता है।

2. मोबाइल, लैपटॉप और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स

अगर आप नया स्मार्टफोन या लैपटॉप खरीदने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपको परेशान कर सकती है। भारत में बिकने वाले ज्यादातर इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स के पार्ट्स विदेशों से आयात किए जाते हैं। डॉलर महंगा होने से इन कंपोनेंट्स की लागत बढ़ जाती है, जिससे मोबाइल फोन, टीवी, फ्रिज और वॉशिंग मशीन जैसी चीजों की कीमतें बढ़ना तय है।

3. विदेश में पढ़ाई और घूमना होगा 'लग्जरी'

उन परिवारों के लिए यह सबसे बड़ा झटका है जिनके बच्चे विदेशों में पढ़ाई कर रहे हैं। ट्यूशन फीस और रहने का खर्च डॉलर में चुकाना होता है। अगर डॉलर 100 रुपये का होता है, तो एजुकेशन लोन की किस्तें और कुल खर्च अचानक 10-15% तक बढ़ सकता है। इसी तरह, विदेश यात्रा का सपना देखने वालों के लिए फ्लाइट टिकट और होटल बुकिंग काफी महंगी हो जाएगी।

4. खाने के तेल और दालों पर असर

भारत फूड तेलों (खासकर पाम ऑयल) और दालों का बड़ा आयातक है। रुपया गिरने से इन आवश्यक वस्तुओं का आयात महंगा हो जाता है, जिससे आपके किचन का बजट बिगड़ना निश्चित है। '100 का डॉलर' मध्यम वर्गीय परिवार की थाली से दाल और तेल की मात्रा कम कर सकता है।

5. आरबीआई और आपकी ईएमआई

रुपये को संभालने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को अक्सर सख्त कदम उठाने पड़ते हैं। महंगाई को काबू में करने के लिए अगर आरबीआई ब्याज दरें बढ़ाता है, तो आपके होम लोन और कार लोन की ईएमआई बढ़ जाएगी। यानी रुपये की गिरावट आपकी बचत को दोतरफा नुकसान पहुंचाती है।

डॉलर का 100 रुपये के करीब पहुंचना केवल एक आर्थिक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह हर भारतीय की पर्चेजिंग पावर पर सीधा हमला है। आने वाले समय में यदि वैश्विक परिस्थितियों में सुधार नहीं हुआ, तो आम आदमी को महंगाई के एक नए दौर के लिए तैयार रहना होगा।

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