आज से पहले रुपये ने बीते 16 दिसंबर 2025 को 91.14 ऑल टाइम लो का रिकॉर्ड बनाया था। बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में बिकवाली ने भारतीय रुपये को कमजोर किया है।
फॉरेन एक्सचेंज ट्रेडर्स ने कहा कि रिस्क से बचने की धारणा और इंपोर्टरों की ओर से डॉलर की मजबूत मांग ने निवेशकों की धारणाओं को और कमजोर किया है।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने सितंबर में 23,885 करोड़ रुपये, अगस्त में 34,990 करोड़ रुपये और जुलाई में 17,700 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर पैसे निकाले गए थे।
आरबीआई का घोषित रुख ये है कि वो रुपये-डॉलर एक्सचेंज रेट के किसी स्तर या दायरे को लक्षित नहीं करता बल्कि विदेशी मुद्रा बाजार में केवल तभी हस्तक्षेप करता है जब अत्यधिक अस्थिरता हो।
भारत और पाकिस्तान की मुद्राओं में आज जो बड़ा अंतर है, वो सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि नीतियों, फैसलों और स्थिरता की भी कहानी है। जहां भारत ने धैर्य और दिशा के साथ आगे बढ़ने की कोशिश की, वहीं पाकिस्तान राजनीतिक और आर्थिक उतार-चढ़ाव में उलझता रहा
इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपये में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया। ये 85.95 पर खुला और फिर इसने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 85.11 के ऊपरी स्तर और 86.10 के निचले स्तर को छुआ।
रुपये में इस साल अभी तक करीब 2 प्रतिशत की गिरावट आई है। 6 नवंबर, 2024 को अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद से डॉलर के मुकाबले रुपये में 3.2 प्रतिशत की गिरावट आई है जबकि इस दौरान डॉलर इंडेक्स में 2.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
अरब देशों में शामिल कुवैत की करेंसी, दुनिया की सबसे महंगी करेंसी है। कुवैत की करेंसी को कुवैती दीनार के नाम से जाना जाता है। आज की कीमतों के आधार पर देखें तो 1 कुवैती दीनार की वैल्यू 280.77 रुपये के बराबर है। इतना ही नहीं, 1 कुवैती दीनार की वैल्यू 3.24 अमेरिकी डॉलर के बराबर है।
डॉलर इंडेक्स कमजोर होने से रुपया मजबूत हुआ। आज छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.15 प्रतिशत की गिरावट के साथ 107.89 पर रहा।
पिछले कुछ हफ्तों में रुपया लगभग हर दिन नए निचले स्तर को छू रहा है। पिछले दो सत्रों में 13 पैसे की गिरावट के बाद गुरुवार को डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा 12 पैसे गिरकर 85.27 पर आ गई थी।
रुपये का पिछला रिकॉर्ड निम्नतम बंद स्तर 9 दिसंबर को दर्ज किया गया था, जब यह डॉलर के मुकाबले 20 पैसे गिरकर 84.86 पर बंद हुआ था। मजबूत अमेरिकी डॉलर और कमजोर घरेलू बाजारों के कारण रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। अमेरिका में बढ़ती मुद्रास्फीति के कारण अमेरिकी डॉलर में तेजी आई।
इंटरबैंक फॉरेन करेंसी एक्सचेंज मार्केट में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 84.07 पर खुला। कारोबार के दौरान ये 84.06 के उच्चस्तर और 84.12 के निचले स्तर के बीच कारोबार के बाद आखिर में चार पैसे की गिरावट के साथ 84.11 प्रति डॉलर (अस्थायी) के सर्वकालिक निचले स्तर पर बंद हुआ।
आज घरेलू शेयर बाजार में तेजी और डॉलर के कमजोर होने से रुपये को मिले समर्थन को पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच विदेशी फंड्स की निकासी ने बेअसर कर दिया।
अमेरिका की खराब जॉब रिपोर्ट से शुरू हुआ गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है और इसका पूरी दुनिया पर व्यापक असर देखने को मिल रहा है। सबसे पहले इसका असर शेयर बाजारों पर दिखा और अब करेंसी भी इसकी चपेट में आ गई है।
ब्रेंट क्रूड की कीमतें (Crude Oil Price) इस साल 100 डॉलर के लेवल को पार कर सकती हैं। आगे रुपये की चाल पूरी तरह तेल की कीमतों पर निर्भर करेगा।
कभी कभी हमारे पास ऐसे नोट सामने आ जाते हैं, जिन पर पेन, पेंसिल से चित्रकारी या लिखावट की गयी होती है। दूसरी ओर अगर आप इससे जुड़े नियमों के बारें में नहीं जानते तो उन्हें जानने की जरूरत है, क्योंकि करेंसी में लिखावट से कई चीजें जुड़ी हुई हैं।
भारतीय रुपये के लिए साल 2022 बेहद खराब रहा है। अमेरिकी डॉलर ने 7 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है। आइए जानते हैं कि साल 2023 में रुपये की चाल कैसी रहने वाली है?
पाउंड 1980 के दशक की शुरुआत में देखे गए स्तरों पर कारोबार कर रहा है। हालांकि, इस दौरान अन्य मुद्राएं भी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुई हैं।
RBI ने भारत में अधिकृत बैंकों को Indian Rupee में व्यापार की सुविधा के लिए किसी भी भागीदार व्यापारिक देश के संबंधित बैंकों के विशेष रुपया वोस्ट्रो खाते खोलने की अनुमति दे दी है।
कच्चे तेल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों तक का आयात, विदेशी शिक्षा और विदेश यात्रा महंगी होने के साथ ही महंगाई की स्थिति और खराब होने की आशंका है।
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