Viral Video: बेंगलुरु की एक महिला ने हिमालय की ट्रैकिंग के दौरान एक वीडियो शेयर किया है। इसमें वह पहाड़ों में कथित तौर पर तेज संगीत बजा रहे एक समूह पर गुस्सा जाहिर कर रही है। इस वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर हलचल मच गई है। इंस्टाग्राम पर सौपिका के नाम से पहचानी जाने वाली इस महिला ने बताया कि करीब दो घंटे से शोर हो रहा था और इससे उसके ट्रैकिंग ग्रुप को परेशानी हो रही थी।
इंस्टाग्राम पर शेयर किया वीडियो
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @sowpika नामक हैंडल से शेयर किया गया है। वीडियो में महिला ने बताया कि, 'मैं पहाड़ों में हूं। ज़रा पीछे देखो। और यही तो ट्रैकर्स करते हैं। क्या आपको सुनाई दे रहा है? मैं आपको दिखाती हूं।' उन्होंने दावा किया कि उनके समूह ने लोगों से आवाज कम करने को भी कहा था, लेकिन उपद्रव जारी रहा। उन्होंने कहा, 'हमने तो आपसे अनुरोध भी किया था कि आप लोग बहुत तेज आवाज कर रहे हैं, जिससे हमारे समूह को परेशानी हो रही है। नहीं... हमें नहीं पता कि ये लोग कहां से आए हैं। ये एक निजी समूह है, लेकिन ये लोग यही कर रहे हैं। पिछले दो घंटों से ये लोग हिमालय में पहाड़ों पर बहुत तेज़ आवाज में संगीत बजा रहे हैं। मुझे बहुत गुस्सा आ रहा है।'
'ये लोग ट्रैकिंग क्यों करते हैं'
महिला ने सवाल उठाया कि अगर लोगों को प्रकृति का सम्मान नहीं करना है तो वे ट्रैकिंग पर क्यों आते हैं। उन्होंने कहा, 'ये लोग इस तरह की ट्रैकिंग पर क्यों आते हैं? ये लोग ट्रैकिंग क्यों करना चाहते हैं? आप किसी पब में जाकर नाचते हैं, है ना? ये लोग तो यहां शोर मचा रहे हैं और इस तरह की हरकतें कर रहे हैं। और अभी रात भी नहीं हुई है, सूर्यास्त का समय है।' उन्होंने कहा कि, 'आप दोस्तों के साथ खुश होते हैं, बातें करते हैं, यह एक बात है। लेकिन इस तरह प्रकृति और आसपास के लोगों को परेशान नहीं करना चाहिए। मुझे बहुत गुस्सा आ रहा है। भारत में सिविक सेंस का अभाव भयावह है। मेरा मतलब है, मुझे ही देख लीजिए। देखिए, देखिए?' वीडियो को इस कैप्शन के साथ शेयर किया गया था, 'हम भारतीय तो अपने पहाड़ों को भी नहीं छोड़ते! ये लोग ट्रैकिंग क्यों करते हैं!'
यूजर्स ने दी प्रतिक्रिया
इस वीडियो को देखने के बाद इस पर कई लोगों ने रिएक्ट किया। इसमें एक यूजर ने लिखा कि, 'इसीलिए ट्रैकिंग के दौरान साइलेंस जोन को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।'
दूसरे यूजर ने लिखा कि, 'लोग पहाड़ों पर जाते हैं लेकिन अपने साथ शहर का शोर ले जाते हैं।'
तीसरे यूजर ने लिखा कि, 'यह आनंद नहीं है, यह आपके आस-पास के सभी लोगों को परेशान कर रहा है।'
चौथे यूजर ने लिखा कि, 'ट्रैकिंग प्रकृति, शांति और अनुशासन के बारे में है, न कि तेज म्यूजिक के बारे में।'
पांचवें यूजर ने लिखा कि, 'कई सार्वजनिक स्थानों पर सिविक सेंस का अभाव है।'
छठे यूजर ने लिखा कि, 'ऐसा व्यवहार सच्चे ट्रैकर्स के अनुभव को खराब कर देता है।'
वहीं, एक अन्य ने लिखा कि, 'पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्रों में तेज़ संगीत बजाने पर जुर्माना होना चाहिए।'
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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