दावोसः अमेरिकी नेतृत्व पर उठ रहे सवालों के बीच दावोस में राष्ट्रपति ट्रंप ने गुरुवार को स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) के दौरान गाजा पर अपने प्रस्तावित 'बोर्ड ऑफ पीस' के पहले चार्टर का औपचारिक उद्घाटन और हस्ताक्षर समारोह किया। यह एक अंतरराष्ट्रीय निकाय है जो वैश्विक संघर्षों को सुलझाने के लिए बनाया गया है, हालांकि इसकी शुरुआत इजरायल-हमास युद्ध के बाद गाजा के पुनर्निर्माण और शासन की निगरानी से हुई थी। अब इसका दायरा बहुत व्यापक हो गया है। इसकी स्थायी सदस्यता के लिए 1 अरब डॉलर का मूल्य टैग लगाया गया है। पाकिस्तान समेत कई देशों ने ट्रंप के साथ इस पर हस्ताक्षर भी कर दिया है। जबकि चीन जैसे देशों ने फिलहाल इससे दूरी बना ली है।
ट्रंप ने उद्घाटन के दौरान क्या कहा?
ट्रंप ने उद्घाटन भाषण में दावा किया कि "हर कोई" इस बोर्ड का हिस्सा बनना चाहता है। उन्होंने कहा कि वे संयुक्त राष्ट्र सहित कई अन्य देशों और संगठनों के साथ मिलकर काम जारी रखेंगे। ट्रंप ने इसे "बहुत रोमांचक दिन" बताया और कहा कि बोर्ड "सुंदर ढंग से चल रहा"। यह पहले से ही काम शुरू कर चुका है। समारोह में कई देशों के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और शीर्ष राजनयिक मौजूद थे, जिनमें शामिल हैं।
इन प्रमुख नेताओं ने किया हस्ताक्षर
ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस मसौदे पर अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो, पराग्वे के राष्ट्रपति सैंटियागो पेना, उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्ज़ियोयेव, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान और अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने हस्ताक्षर किया।
ट्रंप होंगे बोर्ड के अध्यक्ष
ट्रंप ने इस बोर्ड की अध्यक्षता स्वयं संभालने की बात कही है। इसके चार्टर के अनुसार वे इसे जीवन भर संभाल सकते हैं। हालांकि भविष्य में वह अमेरिकी राष्ट्रपति किसी अन्य को नामित कर सकते हैं। बोर्ड ऑफ पीस का यह विचार ट्रंप की 20-सूत्री गाजा सीजफायर योजना से निकला था, जिसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भी समर्थन दिया था। शुरू में यह गाजा के पुनर्निर्माण, मानवीय सहायता और शासन पर फोकस करने वाला छोटा समूह था, लेकिन अब यह वैश्विक संघर्षों (जैसे यूक्रेन, अन्य क्षेत्रीय विवाद) को सुलझाने वाले निकाय के रूप में पेश किया जा रहा है। कुछ आलोचकों का मानना है कि यह संयुक्त राष्ट्र के कार्यों को चुनौती दे सकता है या प्रतिस्पर्धी बन सकता है। हालांकि ट्रंप ने कहा है कि UN को जारी रहना चाहिए।
पाकिस्तान समेत 20 से ज्यादा देशों ने किए हस्ताक्षर
पाकिस्तान समेत 20 से अधिक देशों ने चार्टर पर हस्ताक्षर किए हैं या शामिल होने की पुष्टि की है। इन प्रमुख सदस्य देशों में शामिल हैं:
- पाकिस्तान
- सऊदी अरब
- संयुक्त अरब अमीरात
- मिस्र
- कतर
- जॉर्डन
- तुर्की
- इंडोनेशिया
- मोरक्को
- हंगरी
- अर्जेंटीना
- अजरबैजान
- आर्मेनिया
- उज्बेकिस्तान
- कजाकिस्तान
- कोसोवो
- बेलारूस
- वियतनाम
- इजरायल
बोर्ड पर किन देशों का समर्थन और कौन विरोध में
मुस्लिम-बहुल देशों सऊदी अरब, तुर्की, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, कतर आदि ने संयुक्त बयान में गाजा में स्थायी सीजफायर, पुनर्निर्माण और "न्यायपूर्ण शांति" का समर्थन किया है। जबकि यूरोपीय सहयोगी जैसे फ्रांस, नॉर्वे, स्वीडन और ब्रिटेन ने मुख्य रूप से UN को कमजोर करने की आशंका और रूस जैसी सरकारों की भागीदारी के कारण अभी इसमें शामिल होने से इनकार किया है या संकोच जताया है। वहीं रूस, चीन, यूक्रेन आदि ने अभी इस पर निर्णय नहीं लिया है। हालांकि चीन ने एक बयान में इस बोर्ड में शामिल होने से इनकार कर दिया है।
भारत ने भी नहीं किया हस्ताक्षर
ट्रम्प द्वारा घोषित "शांति बोर्ड" के आयोजन के दौरान भारत ने भी इस चार्टर पर हस्ताक्षर नहीं किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई वैश्विक नेताओं को अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस बोर्ड में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है, जिसकी घोषणा गाजा पट्टी में इजरायल और हमास के बीच हुए युद्धविराम समझौते के दूसरे चरण के तहत की गई थी। फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम, चीन, जर्मनी और कई अन्य प्रमुख देशों ने भी ट्रम्प के "शांति बोर्ड" के हस्ताक्षर समारोह में भाग नहीं लिया।
ट्रंप की क्या है मंशा
ट्रंप ने बोर्ड को "सबसे प्रभावशाली" और "काम पूरा करने वाले" नेताओं का समूह बताया। फाउंडिंग एग्जीक्यूटिव बोर्ड में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, जारेड कुश्नर, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर आदि शामिल हैं। यह घटनाक्रम दावोस में ग्रीनलैंड विवाद के बाद आया है, जहां ट्रंप ने टैरिफ धमकी वापस ली थी। बोर्ड की सफलता अब गाजा सीजफायर की स्थिरता और वैश्विक समर्थन पर निर्भर करेगी, जबकि यूक्रेन जैसे अन्य मुद्दों पर ट्रंप जेलेंस्की और पुतिन से बातचीत जारी रख रहे हैं। स्थिति तेजी से विकसित हो रही है।
ट्रंप ने कहा-सबसे प्रतिष्ठित बोर्ड
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विस आल्प्स में फोरम के साइडलाइन पर होने वाले “चार्टर घोषणा” से पहले अपने विचार पर विश्वास जताया। “हमारे पास बहुत सारे शानदार लोग हैं जो इसमें शामिल होना चाहते हैं,” ट्रंप ने बुधवार को मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल-फत्ताह अल-सिसी के साथ बैठक के दौरान कहा। मिस्र उन देशों में शामिल है जिन्होंने बोर्ड में शामिल होने की घोषणा की है। ट्रंप ने कहा, “यह अब तक का सबसे प्रतिष्ठित बोर्ड होगा।”
35 देश अब तक सहमत
एनबीसी 5 न्यूज के अनुसार दावोस में एक वरिष्ठ प्रशासन अधिकारी ने पत्रकारों को बताया कि करीब 35 देश इस परियोजना में शामिल होने पर सहमत हो चुके हैं, जबकि 60 देशों को आमंत्रित किया गया था। अधिकारी ने व्हाइट हाउस के नियमों के तहत नाम न छापने की शर्त पर बात की। ट्रंप ने बोर्ड को संयुक्त राष्ट्र (UN) के कुछ कार्यों को बदलने और अंततः उसे अप्रासंगिक बनाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि कुछ देशों के नेता शामिल होने की योजना बना रहे हैं, लेकिन उन्हें अपनी संसद से मंजूरी चाहिए। साथ ही, कुछ गैर-आमंत्रित देशों से भी सदस्यता के बारे में पूछताछ आ रही है। कौन शामिल होगा, अभी स्पष्ट नहीं।
ट्रंप के प्लान पर सवाल
ट्रंप के इस प्लान पर बड़े सवाल बने हुए हैं। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि मॉस्को अपने “रणनीतिक साझेदारों” से परामर्श के बाद ही फैसला करेगा। पुतिन गुरुवार को मॉस्को में फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास की मेजबानी करने वाले हैं। कुछ ने सवाल उठाया कि पुतिन और अन्य नेताओं को आमंत्रित क्यों किया गया। ट्रंप ने कहा कि वे “सभी शक्तिशाली” लोगों को चाहते हैं। “मेरे पास कुछ विवादास्पद लोग हैं। लेकिन ये ऐसे लोग हैं जो काम पूरा करते हैं। इनके पास जबरदस्त प्रभाव है।” इस बीच, कुछ यूरोपीय देशों ने आमंत्रण ठुकरा दिया है। फ्रांस के इनकार के बाद नॉर्वे और स्वीडन ने भाग नहीं लेने का संकेत दिया। फ्रांसीसी अधिकारियों ने कहा कि वे गाजा शांति योजना का समर्थन करते हैं, लेकिन चिंता है कि बोर्ड संयुक्त राष्ट्र को संघर्ष सुलझाने के मुख्य मंच के रूप में बदल सकता है।
ब्रिटेन भी नहीं करेगा हस्ताक्षर
ब्रिटिश विदेश मंत्री यवेट कूपर ने कहा कि ब्रिटेन रूस की भागीदारी पर चिंताओं के कारण दावोस में ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस चार्टर पर हस्ताक्षर नहीं करेगा। हम आज हस्ताक्षरकर्ताओं में शामिल नहीं होंगे, क्योंकि यह एक कानूनी संधि है जो बहुत व्यापक मुद्दे उठाती है, और हमें राष्ट्रपति पुतिन की भागीदारी पर भी चिंता है।
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