Sunday, January 18, 2026
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UPI फ्री है… लेकिन कब तक? बजट 2026 से पहले सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई, क्या फ्री डिजिटल पेमेंट का दौर खत्म होगा?

भारत में UPI जितना तेजी से बढ़ा है, उतना ही कमजोर इसका कमाई मॉडल रहा है। सरकार की जीरो MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) पॉलिसी ने डिजिटल पेमेंट को हर गली-मोहल्ले तक पहुंचाया, लेकिन हर UPI ट्रांजैक्शन पर करीब 2 रुपये का खर्च बैंकों और फिनटेक कंपनियों को खुद उठाना पड़ रहा है।

Edited By: Shivendra Singh
Published : Jan 18, 2026 08:05 am IST, Updated : Jan 18, 2026 08:07 am IST
बजट 2026 में बदल सकता है...- India TV Paisa
बजट 2026 में बदल सकता है ‘फ्री UPI’ का नियम?

भारत में आज डिजिटल भुगतान इतना आम हो चुका है कि चाय की दुकान से लेकर किराया, बिजली बिल और मोबाइल तक सब कुछ UPI से चुकाया जा रहा है। QR कोड अब सुविधा का नहीं, बल्कि आजादी का प्रतीक बन चुका है। लेकिन बजट 2026 से पहले UPI को लेकर एक ऐसी सच्चाई सामने आई है, जो इस फ्री डिजिटल पेमेंट मॉडल के भविष्य पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया मिशन के तहत UPI ने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट बाजार बना दिया है। आज देश में डिजिटल लेनदेन का करीब 85% हिस्सा UPI के जरिए होता है। अक्टूबर में ही 20 अरब से ज्यादा ट्रांजैक्शन और 27 लाख करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ। लेकिन इस शानदार आंकड़े के पीछे एक चिंता छिपी है। आंकड़ों के मुताबिक, सिर्फ 45% व्यापारी ही नियमित तौर पर UPI स्वीकार करते हैं। देश के करीब एक-तिहाई पिनकोड में 100 से भी कम एक्टिव UPI मर्चेंट हैं, जबकि संभावनाएं कहीं ज्यादा हैं।

फ्री UPI की असली कीमत

द इकोनॉमिक टाइम्स की एक खबर के अनुसार, UPI की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इस पर जीरो MDR यानी दुकानदार से कोई फीस नहीं ली जाती। सरकार ने छोटे लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए यह व्यवस्था की, जिससे ग्राहक और छोटे व्यापारी दोनों को फायदा मिला। लेकिन हकीकत यह है कि हर UPI ट्रांजैक्शन को पूरा करने में करीब 2 रुपये का खर्च आता है, जिसे अभी बैंक और फिनटेक कंपनियां अपनी जेब से चुकाती हैं। PhonePe, PCI और RBI तक यह मान चुके हैं कि यह मॉडल लंबे समय तक नहीं चल सकता। साल 2023-24 में डिजिटल पेमेंट के लिए सरकार ने 3900 करोड़ रुपये दिए थे, लेकिन 2025-26 में यह रकम घटकर सिर्फ 427 करोड़ रपये रह गई। वहीं, अगले दो साल में UPI सिस्टम को चलाने का खर्च 8000 से 10,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। यही वजह है कि UPI के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ रही हैय़

RBI की चेतावनी और इंडस्ट्री की मांग

RBI गवर्नर ने साफ तौर पर कहा है कि UPI को हमेशा मुफ्त में चलाना संभव नहीं है, क्योंकि इसके संचालन में खर्च आता है और यह खर्च किसी न किसी को उठाना ही होगा। भुगतान कंपनियों का कहना है कि पैसे की कमी की वजह से गांवों तक UPI पहुंचाने, सिस्टम की सुरक्षा मजबूत करने और नए फीचर्स लाने में दिक्कत हो रही है। इसी कारण अब इंडस्ट्री एक बीच का रास्ता सुझा रही है। प्रस्ताव यह है कि छोटे दुकानदारों और लोगों के आपसी लेनदेन (P2P) के लिए UPI मुफ्त ही रहे, लेकिन जिन बड़े कारोबारियों का सालाना टर्नओवर 10 करोड़ रुपये से ज्यादा है, उनसे हर ट्रांजैक्शन पर 0.25 से 0.30 फीसदी तक की मामूली फीस ली जाए।

बजट 2026: निर्णायक मोड़

बजट 2026 UPI के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। या तो सरकार भारी सब्सिडी देकर इसे पूरी तरह फ्री रखे, या फिर सीमित MDR के जरिए इसे आत्मनिर्भर बनाए।

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