Budget 2026: प्राइवेट सेक्टर के सतर्क बने रहने के बीच 1 फरवरी को पेश किए जाने वाले बजट में सरकार पूंजीगत व्यय पर अपना फोकस जारी रख सकती है और इसमें मौजूदा 11.21 लाख करोड़ रुपये से 10-15 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, आगामी बजट में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय बढ़ाने के लिए काफी गुंजाइश होगी और सरकार को इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए। वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट रविवार, 1 फरवरी को संसद में पेश किया जाएगा।
रातों-रात 30 प्रतिशत नहीं बढ़ सकता पूंजीगत व्यय
पीडब्ल्यूसी के भागीदार और आर्थिक सलाहकार सेवा प्रमुख रानेन बनर्जी ने कहा, ''मेरा मानना है कि अर्थव्यवस्था में पूंजीगत व्यय को खपाने की क्षमता बहुत ज्यादा नहीं है। अगर आप इसे रातों-रात 30 प्रतिशत बढ़ाना चाहते हैं, तो ये नहीं होने वाला, क्योंकि इसके लिए आपको निर्माण कंपनियों की क्षमता, भारी मशीनरी की क्षमता और बहुत सारी मशीनों की जरूरत होती है। इसलिए, ये रातों-रात 30 प्रतिशत नहीं बढ़ सकता। हमारा मानना है कि पूंजीगत व्यय में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद की जा सकती है और हम लगभग 12,000 अरब रुपये के आवंटन की उम्मीद कर रहे हैं।''
पिछले बजट में पूंजीगत व्यय के लिए था 11.21 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2025-26 के लिए पूंजीगत व्यय के रूप में 11.21 लाख करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव रखा था। इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर के अनुसार निजी पूंजीगत व्यय के साथ समस्या ये रही है कि ये असमान है और सभी क्षेत्रों में धीमा नहीं है। सीमेंट और स्टील जैसे पारंपरिक क्षेत्र विस्तार के लिए पैसा लगा रहे हैं, क्योंकि ये अतिरिक्त क्षमता बढ़े हुए सार्वजनिक निवेश का परिणाम है, जो निजी क्षेत्र के लिए मांग पैदा कर रहा है।
इन सेक्टरों में देखी जा रही है पूंजीगत व्यय में वृद्धि
अदिति नायर ने कहा कि डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक व्हीकल और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे नए सेक्टरों में काफी सकारात्मकता और पूंजीगत व्यय में वृद्धि देखी जा रही है, जबकि निर्यात उन्मुख क्षेत्र और आयात से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करने वाले क्षेत्र अधिक चुनौतीपूर्ण स्थिति का सामना कर रहे हैं। नायर ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में उच्च सरकारी पूंजीगत व्यय की दिशा में काफी तेजी देखी जाएगी।



































