शेयर बाजार निवेशकों ने 2026-27 के आम बजट से पहले सरकार से कैपिटल मार्केट टैक्सेशन को आसान बनाने का आग्रह किया है, जिसमें लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) पर उच्च छूट सीमा की मांग शामिल है। उन्होंने ये भी सुझाव दिया कि सरकार को ट्रांजैक्शन टैक्स में और बढ़ोतरी करने से बचना चाहिए। आम बजट रविवार, 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया जाएगा और इस बार शेयर बाजार भी बजट के मौके पर रविवार को खुले रहेंगे। बाजार के हितधारकों ने रिटेल और लॉन्ग टर्म निवेशकों को ज्यादा राहत देने के लिए इक्विटी इन्वेस्टमेंट से होने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स पर टैक्स फ्री छूट लिमिट को बढ़ाने की मांग की है।
सरकार से क्या-क्या है मांग
जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज ने कहा कि सरकार को इक्विटी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स के लिए टैक्स-फ्री छूट सीमा को 1.25 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये करना चाहिए। कंपनी ने जटिलता को कम करने और टैक्स स्पष्टता में सुधार के लिए इक्विटी, डेट, सोना और रियल एस्टेट सहित सभी परिसंपत्ति वर्गों में 'दीर्घकालिक' यानी लॉन्ग टर्म की परिभाषा को 12 महीने के रूप में मानकीकृत करने की भी मांग की है। इसके अलावा, इसने पूंजीगत हानि को अन्य मदों के तहत होने वाली आय के साथ समायोजित करने की अनुमति देने की मांग भी की है। बाजार प्रतिभागियों ने लेनदेन से संबंधित टैक्सों में किसी भी तरह की और बढ़ोतरी के खिलाफ चेतावनी दी है।
नकद इक्विटी सौदों पर एसटीटी को डेरिवेटिव की तुलना में कम रखने का प्रस्ताव
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर धीरज रेली ने कहा कि हितधारकों ने सट्टा कारोबार के बजाय दीर्घकालिक निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए नकद इक्विटी सौदों पर प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) को डेरिवेटिव की तुलना में कम रखने का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने शेयर पुनर्खरीद के केवल लाभ वाले हिस्से पर टैक्स लगाने और घरेलू निवेशकों के लिए डिविडेंड टैक्स की दरों को अनिवासी भारतीयों पर लागू होने वाली दरों के अनुरूप बनाने का भी सुझाव दिया।



































