डिलीवरी ऐप्स पर ऑर्डर पहुंचाने वाले, घरों में काम करने वाले और रोज कमाकर गुजारा करने वाले लाखों गिग वर्कर्स के लिए सरकार बड़ी राहत की तैयारी में है। जिन लोगों के पास न पक्की नौकरी है, न सैलरी स्लिप और न ही मजबूत CIBIL स्कोर है, अब उन्हें भी बैंकिंग सिस्टम से जोड़ने की दिशा में एक अहम कदम उठाया जा रहा है। केंद्र सरकार जल्द ही एक नई माइक्रोक्रेडिट स्कीम शुरू करने जा रही है, जिसके तहत बिना किसी गारंटी के 10,000 रुपये तक का लोन दिया जाएगा।
अप्रैल से शुरू हो सकती है नई माइक्रोक्रेडिट स्कीम
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह योजना अप्रैल से लागू की जा सकती है। इसका खाका केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने तैयार किया है। इस स्कीम का मकसद स्विगी, जोमैटो, जेप्टो, ब्लिंकिट जैसे प्लेटफॉर्म्स पर काम करने वाले डिलीवरी वर्कर्स, घरेलू सहायकों और अन्य असंगठित शहरी कामगारों को आर्थिक सहारा देना है। सरकार हर साल पात्र लाभार्थियों को 10,000 रुपये तक का माइक्रो लोन उपलब्ध कराएगी, ताकि वे बाइक, मोबाइल फोन या काम से जुड़ा जरूरी सामान खरीद सकें।
पीएम-स्वनिधि की तर्ज पर बनेगी स्कीम
यह नई स्कीम प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (PM-SVANidhi) स्कीम से प्रेरित होगी। पीएम-स्वनिधि के तहत पहले चरण में 10,000 रुपये का लोन दिया जाता है, जिसे समय पर चुकाने पर आगे 20,000 और फिर 50,000 रुपये तक का लोन मिल सकता है। इसके साथ ही 7% ब्याज सब्सिडी और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने जैसे फायदे भी मिलते हैं। नई गिग वर्कर्स स्कीम में भी इसी तरह का ढांचा अपनाए जाने की संभावना है।
किन लोगों को मिलेगा फायदा?
इस स्कीम का लाभ उन्हीं कामगारों को मिलेगा, जिनकी पहचान सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होगी। ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत गिग वर्कर्स, घरेलू सहायक और अन्य असंगठित कामगार इस लोन के लिए पात्र हो सकते हैं। जिनके पास यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN), आधार जैसे वैध दस्तावेज होंगे और जिनका रिकॉर्ड सत्यापित होगा, उन्हें प्रायोरिटी दी जाएगी।
बैंकिंग सिस्टम से जोड़ने की कोशिश
सरकार का मानना है कि बड़ी संख्या में गिग वर्कर्स ऐसे हैं, जिन्हें बैंक से लोन सिर्फ इसलिए नहीं मिल पाता क्योंकि उनके पास कोई औपचारिक आय प्रमाण या क्रेडिट हिस्ट्री नहीं होती। यह नई स्कीम उनकी इसी समस्या का समाधान करेगी और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगी।
असंगठित कामगारों के लिए बड़ा कदम
नवंबर 2025 तक ई-श्रम पोर्टल पर 31 करोड़ से ज्यादा असंगठित कामगार और लाखों गिग वर्कर्स रजिस्टर्ड हो चुके हैं। ऐसे में यह स्कीम न सिर्फ आर्थिक मदद का जरिया बनेगी, बल्कि लाखों लोगों को औपचारिक फाइनेंशियल ढांचे से जोड़ने का रास्ता भी खोलेगी।



































