दिल्ली एनसीआर के भीड़-भाड़ वाले हाउसिंग मार्केट्स के लंबे साए में सोनीपत धीरे-धीरे अपनी अलग पहचान बना रहा है। पहले यह शहर सिर्फ औद्योगिक केंद्र के रूप में जाना जाता था, लेकिन अब यह टियर-2 शहर रियल एस्टेट निवेशकों और होमबायर्स की नजरों में नई उम्मीद के रूप में उभर रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी, औद्योगिक निवेश और सस्ती प्रॉपर्टी रेट्स ने इसे लंबी अवधि के निवेश के लिए एक अट्रैक्टिव ऑप्शन बना दिया है।
कनेक्टिविटी ने घटाई दूरी
सोनीपत की रियल एस्टेट क्रांति में इंफ्रास्ट्रक्चर सबसे बड़ा कारण रहा है। अर्बन एक्सटेंशन रोड-II, पश्चिमी और पूर्वी पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, दिल्ली–सोनीपत–पानीपत रैपिड ट्रांजिट सिस्टम और दिल्ली मेट्रो की येलो लाइन विस्तार जैसे प्रोजेक्ट शहर को दिल्ली और नोएडा से सीधे जोड़ रही हैं। इन परिवहन नेटवर्क्स के चलते अब दिल्ली में यात्रा करना आसान हो जाएगा और पेशेवरों के लिए रोजाना कम्यूट भी संभव होगा।
औद्योगिक आधार बढ़ा मांग
सोनीपत का औद्योगिक परिदृश्य भी रियल एस्टेट की सफलता में मदद कर रहा है। मारुति सुजुकी का 18,000 करोड़ रुपये का प्लांट हजारों नए रोजगार पैदा करेगा। साथ ही, जापान–इंडिया इंस्टीट्यूट फॉर मैन्युफैक्चरिंग और हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के मॉडल टाउनशिप्स और लॉजिस्टिक्स पार्क्स ने शहर में स्थिर रोजगार का आधार तैयार किया है।
सस्ती कीमतों में हाई क्वालिटी
गुरुग्राम और नोएडा की तुलना में सोनीपत में अभी भी शुरुआती कीमतों पर प्रॉपर्टी मिल रही है। साथ ही, आधुनिक सुविधाओं के साथ लक्जरी टाउनशिप्स भी बन रहे हैं, जो मिड-टू-प्रीमियम सेगमेंट के खरीदारों को आकर्षित कर रहे हैं। इस मिश्रण ने नए घर खरीदने वालों और लॉन्ग-टर्म निवेशकों दोनों को अपनी ओर खींचा है।
एक्सपर्ट्स का नजरिया
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सोनीपत रियल एस्टेट क्रांति के किनारे खड़ा है। यहां की कनेक्टिविटी और औद्योगिक निवेश इसे निवेशकों के लिए हॉटस्पॉट बना रहे हैं। आपको बता दें कि सोनीपत मास्टर प्लान 2031 और DMIC जैसे प्रोजेक्ट के साथ शहर की रियल एस्टेट ग्रोथ और मजबूत होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, 2030 तक सोनीपत में निवेशक मल्टी-फोल्ड रिटर्न की उम्मीद कर सकते हैं।



































