पाक ऑक्यूपाइड कश्मीर की राजधानी मुज़फ़्फ़राबाद में आज आतंकी हमजा बुरहान मारा गया। हमज़ा बुरहान आतंकी संगठन अल बदर का कमांडर था और भारत का मोस्ट वांटेड टेरेरिस्ट था। नवंबर 2020 में पुलवामा में CRPF कैंप में ग्रेनेड अटैक हुआ था और जानकारी के मुताबिक ये हमला हमज़ा बुरहान ने ही करवाया था। वह पीओके में छुपा बैठा था और मुज़फ़्फ़राबाद में रह रहा था। आज सुबह मुज़फ़्फ़राबाद में अज्ञात लोगों ने, हमज़ा बुरहान को गोली मार दी। पीओके की लोकल मीडिया के मुताबिक़, हमज़ा बुरहान को मुज़फ़्फ़राबाद में एक स्कूल के सामने दो बाइक सवारों ने रोका और गोलियों से भून डाला। हमज़ा ने जान बचाने के लिए अपनी गाड़ी से उतरकर भागने की कोशिश की, लेकिन अटैकर्स ने उसको भागने का मौक़ा नहीं दिया और उसे गोलियों से छलनी कर दिया। मौक़े पर ही उसकी मौत हो गई।
कौन था आतंकी हमजा बुरहान
हमज़ा बुरहान का असली नाम अर्ज़ुमंद गुलज़ार डार था और वो पुलवामा के रत्नीपुरा इलाक़े का रहने वाला था। क़रीब सात साल पहले वो सीमा पार करके पाक ऑक्यूपाइड कश्मीर चला गया था और आईएसआई के पालतू आतंकी संगठन अल बदर में शामिल हो गया था। उसे साउथ कश्मीर में टेरर एक्टिविटीज़ बढ़ाने, नए दहशतगर्दों की भर्ती करने और ओवरग्राउंड वर्कर्स को हथियार सप्लाई करने की जिम्मेदारी मिली थी। साल 2020 में पुलवामा के CRPF कैंप पर हमले का मास्टर माइंड यही दहशतगर्द था। इस अटैक के बाद आईएसआई ने हमज़ा बुरहान को अल बद्र का ऑपरेशनल कमांडर बना दिया था। उसके बाद कई आतंकी हमलों में हमजा बुरहान का नाम आया लेकिन आज उसे अज्ञात लोगों ने जहन्नुम का रास्ता दिखा दिया।
सात साल पहले पाकिस्तान चला गया था हमजा
अरजमंद गुलजार मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के रत्नीपोरा इलाके का रहने वाला था। बताया जाता है कि वह करीब सात साल पहले वैध दस्तावेजों के जरिए पाकिस्तान गया था, जहां उसने आतंकी संगठन अल-बद्र जॉइन कर लिया। बाद में वह संगठन का ऑपरेशनल कमांडर बन गया और पाकिस्तान से बैठकर कश्मीर में आतंकियों की भर्ती, फंडिंग और हथियारों की सप्लाई का नेटवर्क चलाने लगा।
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने उसे लंबे समय से “मोस्ट वांटेड” सूची में डाल रखा था। भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने वर्ष 2022 में उसे आधिकारिक रूप से आतंकवादी घोषित किया था। मंत्रालय के अनुसार वह पुलवामा और दक्षिण कश्मीर में आतंक फैलाने, युवाओं को आतंकी संगठनों में भर्ती कराने और आतंकवाद के लिए आर्थिक सहायता जुटाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा था।
पुलवामा से आतंकी नेटवर्क का कनेक्शन
पुलवामा लंबे समय से घाटी में आतंकी गतिविधियों का संवेदनशील केंद्र रहा है। इसी क्षेत्र से कई बड़े आतंकी चेहरे सामने आए, जिनमें बुरहान वानी का नाम भी शामिल रहा, जिसने सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को कट्टरपंथ की ओर प्रभावित किया था। अरजमंद गुलजार को भी उसी “डिजिटल कट्टरपंथ” मॉडल का हिस्सा माना जाता है, जिसमें सोशल मीडिया और स्थानीय नेटवर्क के जरिए युवाओं को हथियार उठाने के लिए उकसाया जाता था।
पिछले कुछ सालों में लश्कर ए तैयबा और जैश ए मोहम्मद के एक दर्जन से ज्यादा कमांडर इसी तरह मारे जा चुके हैं। किसी को मस्जिद में गोली मारी गई तो किसी को मदरसे में। कोई जेल में मरा मिला तो कोई सड़क पर, लेकिन इनको किसने मारा, आज तक ये किसी को नहीं पता। इसी साल जनवरी में लश्कर के कमांडर अब्दुल ग़फ़्फ़ार को अज्ञात हमलावरों ने गोली मार दी थी। अब्दुल ग़फ़्फ़ार लश्कर के चीफ हाफ़िज़ सईद का करीबी था। इसी तरह से पिछले साल मई में लश्कर का आतंकवादी सैफ़ुल्लाह ख़ालिद, सिंध में मारा गया था, वो बैंगलोर के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस और रामपुर में CRPF कैंप पर हमले का मुजरिम था।
अब तक अज्ञात हमलावरों ने कितनों की जान ली
- मार्च 2025 में अज्ञात हमलारों ने ISI के एजेंट मुफ़्ती शाह मीर को बलोचिस्तान में गोली मार दी थी। मुफ़्ती शाह मीर ही, भारत के पूर्व नेवी ऑफ़िसर कुलभूषण जाधव को ईरान से किडनैप किया था।
- मार्च 2024 में दहशतगर्दों के मददगार पाकिस्तानी सेना के अफ़सर, मेजर दानियाल को पेशावर में अज्ञात हमलावरों ने मौत के घाट उतार दिया था। मेजर दानियाल ने 2016 में बारामुला में सेना के काफ़िले पर हमले की साज़िश रची थी।
- दिसंबर 2023 में अज्ञात हमलावरों मे हाफ़िज़ सईद के क़रीबी आतंकी अदनान अहमद को कराची में गोली मार दी थी। अदनान, पंपोर में CRPF के काफिले पर हमले का आरोपी था।
- नवंबर 2023 में कराची में ही जैश-ए-मुहम्मद के आतंकवादी रहीमुल्लाह को अज्ञात लोगों ने गोली मार दी थी। रहीमुल्लाह, मसूद अज़हर का क़रीबी था और भारत में आतंकी हमलों के लिए फंड जुटाता था।
- अक्टूबर 2023 में नक़ाबपोश हमलावरों ने जैश के एक और कमांडर शाहिद लतीफ़ को मौत के घाट उतार दिया था। शाहिद लतीफ़ 2016 में पठानकोट के एयरफ़ोर्स बेस पर हमले का मास्टरमाइंड था।
- इनके अलावा पाकिस्तान में अबु क़ताल, अकरम ग़ाज़ी, ख्वाजा शाहिद, मौलाना ज़िया उर रहमान, बशीर अहमद, ज़हूर इब्राहिम, दाऊद मलिक, एजाज आबिद और लाल मुहम्मद जैसे और भी कई आतंकवादी इसी तरह निपटाए जा चुके हैं।