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डॉलर के मुकाबले फिसलता रुपया! अब क्या करेगा RBI? SBI रिपोर्ट में सामने आया बड़ा प्लान

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Mar 30, 2026 11:40 pm IST,  Updated : Mar 30, 2026 11:40 pm IST

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब भारतीय मुद्रा पर भी साफ दिखने लगा है। सोमवार को कारोबार के दौरान रुपया डॉलर के मुकाबले 95 के स्तर को पार कर गया, जिससे बाजार में हलचल मच गई। हालांकि दिन के अंत में रुपया थोड़ा संभला और 94.78 पर बंद हुआ, लेकिन लगातार उतार-चढ़ाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

डॉलर के मुकाबले गिरता...- India TV Hindi
डॉलर के मुकाबले गिरता रुपया Image Source : CANVA

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। सोमवार को रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर इंट्राडे में 95 के लेवल को पार कर गया। हालांकि कारोबार के अंत में यह थोड़ी मजबूती के साथ 94.78 पर बंद हुआ, लेकिन बाजार में अस्थिरता और निवेशकों की चिंता साफ नजर आई। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि रुपया संभालने के लिए रिजर्व बैंक क्या कदम उठाएगा?

ईरान युद्ध और वैश्विक अनिश्चितता के चलते डॉलर की मांग बढ़ गई है। जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में डर बढ़ता है, निवेशक सुरक्षित ऑप्शन के तौर पर डॉलर की ओर रुख करते हैं। इसी वजह से रुपये पर दबाव बना हुआ है और इसमें लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।

SBI रिपोर्ट में क्या है बड़ा सुझाव?

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की रिसर्च रिपोर्ट में RBI को एक अहम सलाह दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के पास 700 अरब डॉलर से ज्यादा का विदेशी मुद्रा भंडार है, जो 10 महीने के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त है। SBI का कहना है कि RBI को सिर्फ मुश्किल समय के लिए ही इन भंडार को बचाकर नहीं रखना चाहिए, बल्कि जरूरत पड़ने पर बाजार में दखल देकर रुपये को सहारा देना चाहिए।

तेल कंपनियों के लिए अलग व्यवस्था का सुझाव

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के लिए एक अलग विंडो बनाई जानी चाहिए। इससे उनकी रोजाना की डॉलर मांग को बाजार से अलग किया जा सकेगा। इससे असली मांग और सप्लाई की तस्वीर साफ होगी और रुपये की अस्थिरता को बेहतर तरीके से कंट्रोल किया जा सकेगा।

RBI के हालिया फैसले का असर

हाल ही में RBI ने बैंकों के लिए नेट ओपन पोजिशन (NOP) की सीमा 100 मिलियन डॉलर तय की है। रिपोर्ट के अनुसार, इससे ऑनशोर और ऑफशोर बाजार में अंतर बढ़ सकता है और लिक्विडिटी पर दबाव बन सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर वैश्विक हालात ऐसे ही बने रहे, तो रुपये में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे में RBI के लिए सही समय पर सही कदम उठाना बेहद जरूरी होगा।

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