इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.30 पर खुला, जो पिछले बंद स्तर 91.49 के मुकाबले 119 पैसे की बढ़त दर्शाता है।
वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच भारतीय मुद्रा पर दबाव है। आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबवे अपनी वास्तविक क्षमता से कम परफॉर्म कर रहा है।
इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया डॉलर के मुकाबले 89.89 पर खुला और कारोबार के दौरान 89.95 के निचले और 89.84 के ऊपरी स्तर तक पहुंचा।
गवर्नर ये स्पष्ट किया कि आगे चलकर वृद्धि की रफ्तार कुछ नरम पड़ेगी और महंगाई बढ़कर आरबीआई के 4 प्रतिशत के लक्ष्य के करीब पहुंचेगी।
आरबीआई का घोषित रुख ये है कि वो रुपये-डॉलर एक्सचेंज रेट के किसी स्तर या दायरे को लक्षित नहीं करता बल्कि विदेशी मुद्रा बाजार में केवल तभी हस्तक्षेप करता है जब अत्यधिक अस्थिरता हो।
अगर मुद्रा विनिमय के प्रभाव को अलग रखें तो मार्च से जून 2025 तक भारत का बाहरी कर्ज 6.2 अरब डॉलर बढ़ा होता, जबकि असल में ये वृद्धि 11.2 अरब डॉलर दिखी।
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया एक बार फिर कमजोर हो रहा है। यह भारतीय इकोनॉमी के लिए अच्छी खबर नहीं है।
रुपये में मजबूती से भारत को आयात करना सस्ता होगा। इससे महंगाई कम करने में मदद मिलेगी। विदेश जाना और पढ़ाई करने का खर्च कम होगा। निवेशकों का भरोसा भारतीय अर्थव्यव्स्था पर बढ़ेगा।
रुपया टूटने का असर भारतीय अर्थव्यवस्था, आम जनता और बिजनेस जगत पर होगा। रुपये में कमजोरी आने से विदेशों से आयत करना महंगा होगा। इसके चलते जरूरी वस्तुओं की कीमत बढ़ सकती है। यानी महंगाई का बोझ आप पर बढ़ेगा।
रुपये में इस साल अभी तक करीब 2 प्रतिशत की गिरावट आई है। 6 नवंबर, 2024 को अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद से डॉलर के मुकाबले रुपये में 3.2 प्रतिशत की गिरावट आई है जबकि इस दौरान डॉलर इंडेक्स में 2.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
रुपये में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार गिरावट है। सोमवार को यह अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। आज रुपया टूटर 87.29 पर पहुंच गया है।
डॉलर इंडेक्स कमजोर होने से रुपया मजबूत हुआ। आज छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.15 प्रतिशत की गिरावट के साथ 107.89 पर रहा।
घरेलू बाजारों में बिकवाली और विदेशी कोषों की लगातार निकासी के चलते रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से भी रुपये पर दबाव पड़ा।
भारतीय रुपये के लिए साल 2022 बेहद खराब रहा है। अमेरिकी डॉलर ने 7 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है। आइए जानते हैं कि साल 2023 में रुपये की चाल कैसी रहने वाली है?
भारतीय करेंसी रुपया को मजबूत करने के तरीकों के बारे में पता चल गया है। इसी साल नोबेल पुरस्कार जीत चुके एक अमेरिकी अर्थशास्त्री ने एक शानदार तरकीब बताई है। आइए उसके बारे में जानते हैं साथ ही उस अमेरिकी के बारे में भी जानेंगे।
Rupees vs Dollar: डॉलर के मुकाबले रुपया एक बार फिर कमजोर हो गया है। रुपये में गिरावट से एक ओर जहां व्यापार घाटा बढ़ेगा वहीं दूसरी ओर जरूरी सामान के दाम में बढ़ोतरी होगी।
में वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘सबसे पहली बात, मैं इसे इस तरह नहीं देखूंगी कि रुपया फिसल रहा है बल्कि मैं यह कहना चाहूंगी कि रुपये में मजबूती आई है।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, इससे पूर्व के सत्र में रुपये के अपने सर्वकालिक निम्न स्तर को छूने के बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने संभवत: बाजार में हस्तक्षेप किया।
भारी विदेशी धन निवेश के साथ आर्थिक गतिविधियों के बढ़ने के बाद रुपया एशियाई मुद्राओं में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन गया।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में घरेलू इकाई अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 74.80 पर खुली और फिर आगे गिरकर 74.87 पर पहुंच गई।
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