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तेल संकट के बीच अमेरिका का यू-टर्न! ट्रंप सरकार ने समंदर में फंसे रूसी तेल को खरीदने की दी हरी झंडी

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Mar 13, 2026 08:44 am IST,  Updated : Mar 13, 2026 08:44 am IST

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और बढ़ती तेल कीमतों के बीच अमेरिका ने बड़ा फैसला लिया है। अमेरिका ने रूसी तेल पर लगे कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी ढील देने का फैसला किया है। अमेरिकी सरकार ने उन देशों को सीमित समय के लिए अनुमति दी है कि वे समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीद सकें।

तेल संकट को काबू करने...- India TV Hindi
तेल संकट को काबू करने की कोशिश Image Source : CANVA

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच अमेरिका ने बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी प्रशासन ने उन देशों को अस्थायी अनुमति देने का फैसला किया है जो समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीदना चाहते हैं। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान युद्ध के कारण ग्लोबल एनर्जी बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है और तेल की सप्लाई को लेकर चिंता गहरा रही है।

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने घोषणा की है कि वह एक अस्थायी लाइसेंस जारी कर रहा है, जिसके तहत कुछ प्रतिबंधित रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की डिलीवरी और बिक्री की अनुमति दी जाएगी। यह अनुमति सीमित टाइम के लिए दी गई है और इसका मकसद ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई को बढ़ाना है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों को काबू में रखने में मदद मिल सकती है। दरअसल, ईरान के साथ जारी संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते जोखिम के कारण तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

भारत को भी मिल चुकी है छूट

इससे पहले अमेरिका ने भारत को भी रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट दी थी। यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर कई तरह के कड़े प्रतिबंध लगाए गए थे, जिसके चलते कई देशों के लिए रूसी तेल खरीदना मुश्किल हो गया था। हालांकि मौजूदा हालात को देखते हुए अमेरिका ने कुछ सीमित छूट देने का फैसला किया है ताकि ग्लोबल मार्केट में सप्लाई बनी रहे और कीमतों में ज्यादा उछाल न आए।

कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्लोबल एनर्जी मार्केट में स्थिरता बनाए रखने के लिए कदम उठा रहे हैं। उनका कहना है कि यह कदम तेल की कीमतों को कंट्रोल रखने और बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए उठाया गया है। सरकार का दावा है कि यह अनुमति केवल उस रूसी तेल पर लागू होगी जो पहले से समुद्र में ट्रांजिट में है। इससे रूस को एक्स्ट्रा आर्थिक लाभ नहीं मिलेगा क्योंकि उसकी ज्यादातर आय तेल के उत्पादन के समय लगने वाले टैक्स से आती है।

दुनिया भर के बाजार पर असर

एनालिस्ट का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है। ऐसे में अमेरिका का यह फैसला ग्लोबल एनर्जी मार्केट को स्थिर करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

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