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31 जुलाई तक नहीं भरा ITR तो जेब पर पड़ेगा भारी बोझ! जानें कितनी लगेगी पेनल्टी और क्या-क्या होंगे नुकसान

 Published : Jul 29, 2026 09:02 pm IST,  Updated : Jul 29, 2026 09:02 pm IST

अगर आपने अभी तक ITR फाइल नहीं किया है, तो अब देर करना महंगा पड़ सकता है। एसेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए ITR फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 है। इस डेडलाइन के बाद रिटर्न दाखिल करने पर आपको लेट फीस, ब्याज और कई अन्य वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

31 जुलाई की डेडलाइन चूक...- India TV Hindi
31 जुलाई की डेडलाइन चूक गए तो होगा बड़ा नुकसान! Image Source : CANVA

अगर आपने अभी तक एसेसमेंट ईयर 2026-27 का इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल नहीं किया है, तो अब बिल्कुल भी लापरवाही न करें। 31 जुलाई 2026 इसकी आखिरी तारीख है। इस डेडलाइन के बाद रिटर्न भरने पर सिर्फ लेट फीस ही नहीं, बल्कि ब्याज, टैक्स से जुड़े कई फायदे और भविष्य में मिलने वाले कुछ अधिकार भी प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में समय पर ITR दाखिल करना आपकी जेब और भविष्य दोनों के लिए फायदेमंद रहेगा।

डेडलाइन छूटने पर भी भर सकते हैं ITR

अगर किसी कारण से आप 31 जुलाई तक ITR दाखिल नहीं कर पाते हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आयकर कानून के तहत आप 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। हालांकि, इसके लिए आपको एक्स्ट्री फीस और ब्याज देना होगा।

कितनी लगेगी लेट फीस?

  • इनकम टैक्स एक्ट की धारा 234F के अनुसार लेट फीस आपकी आय पर निर्भर करती है।
  • यदि आपकी सालाना आय 5 लाख रुपये से ज्यादा है, तो आपको 5,000 रुपये तक की लेट फीस देनी होगी।
  • यदि आपकी आय 5 लाख रुपये या उससे कम है, तो अधिकतम 1,000 रुपये की लेट फीस लगेगी।
  • वहीं, जिन लोगों की आय टैक्स के दायरे में नहीं आती और वे स्वेच्छा से ITR भर रहे हैं, उन्हें लेट फीस नहीं देनी होगी।

बकाया टैक्स पर देना होगा ब्याज

अगर आपके ऊपर टैक्स बकाया है और आपने समय पर रिटर्न दाखिल नहीं किया, तो धारा 234A के तहत बकाया टैक्स पर हर महीने 1% की दर से ब्याज देना होगा। यह ब्याज 1 अगस्त 2026 से तब तक लगेगा, जब तक पूरा टैक्स जमा नहीं हो जाता।

देर से ITR भरने के 4 बड़े नुकसान

  1. घाटे का लाभ नहीं मिलेगा: शेयर बाजार, F&O या बिजनेस में हुए नुकसान को भविष्य के मुनाफे से एडजस्ट करने का मौका खत्म हो सकता है।
  2. रिफंड मिलने में होगी देरी: अगर आपका TDS ज्यादा कटा है, तो टैक्स रिफंड आने में देर होगी। साथ ही रिफंड पर मिलने वाले ब्याज का भी नुकसान हो सकता है।
  3. ओल्ड टैक्स रिजीम का ऑप्शन छूट सकता है: बिलेटेड रिटर्न भरने पर कई मामलों में ओल्ड टैक्स रिजीम चुनने का ऑप्शन नहीं मिलेगा और डिफॉल्ट रूप से न्यू टैक्स रिजीम लागू हो सकती है।
  4. इनकम टैक्स नोटिस का खतरा: अगर 31 दिसंबर तक भी ITR दाखिल नहीं किया गया, तो आयकर विभाग नोटिस जारी कर सकता है।

आखिरी दिन का इंतजार न करें

आपको बता दें कि आखिरी दिन पोर्टल पर भारी ट्रैफिक या तकनीकी दिक्कतें आ सकती हैं। इसलिए अंतिम समय का इंतजार करने के बजाय जल्द से जल्द ITR दाखिल कर देना समझदारी होगी। इससे आप लेट फीस, ब्याज, रिफंड में देरी और अन्य कानूनी परेशानियों से बच सकते हैं। समय पर ITR फाइल करना न केवल नियमों का पालन है, बल्कि आपकी फाइनेंशियल प्लानिंग को भी मजबूत बनाता है।

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